सभा-संगत
खाद्य सुरक्षा के लिए जरूरी है जैविक खेती
मॉनसेंटों जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बीजों और खाद से हो रही खेती के दुष्परिणाम देश के हर इलाके में दिखने लगे हैं। हर साल पंजाब और हरियाणा में भूजल का स्तर लगातार नीचे जा रहा है। इसके जरिए होने वाली खेती की खाद-पानी और कीटनाशकों की भूख लगातार बढ़ती जा रही है।
सिर पर सवार है मैला उतरने का नाम नहीं लेता
सभ्यता के विकास में मल निस्तारण समस्या रही हो या न रही हो, लेकिन भारत में कुछ लोगों के सिर पर आज भी मैला सवार है. तमाम कोशिशों के बावजूद भारत सरकार उनके सिर से मैला नहीं उतार पायी है जो लंबे समय से इस काम से निजात पाना चाहते हैं. हालांकि सरकार द्वारा सिर से मैला हटा देने की तय आखिरी तारीख कल बीत गयी लेकिन कल ही 31 मार्च को दिल्ली में जो 200 लोग इकट्ठा हुए थे वे आज वापस अपने घरों को लौट गये हैं. तय है, आज से उन्हें फिर वही सब काम करना पड़ेगा जिसे हटाने की मंशा लिये वे दिल्ली आये थे. उमाशंकर मिश्र की रिपोर्ट- ...शहीदे आजम भगत सिंह की 'जयंती'
इसी 23 मार्च की शाम मुझे एक असहज अनुभव हुआ। शहीद-ए-आजम भगत सिंह के बलिदान दिवस पर आयोजित एक छोटे से समारोह में शामिल होने का अवसर मिला। श्रोताओं की अधिकतम संख्या एक सौ रही होगी। इनमें भी बूढ़े अधिक थे, युवा कम। बूढ़े लोग खुद से तथा अपने अतीत से मोहग्रस्त और आत्म-मुग्ध थे तो युवा लगभग निस्पृह या कि तटस्थ मुख-मुद्रा में।...भारतीय मुसलमान कभी तालिबान नहीं हो सकते
भारतीय मुसलमानों में जहां कहीं असहिष्णुता दिखती है वहां उनकी तुलना तालिबान से कर दी जाती है. भारत में मुसलमान तालिबानी मानसिकता के शिकार नहीं है. पाकिस्तान के मुकाबले भारत में मुसलमान ज्यादा उदार और सर्वसमावेशी स्वभाव वाले हैं. भारत के मुसलमान जिस प्रांत में रहते हैं वहां की न केवल भाषा बोलते हैं बल्कि उनका खान-पान, पहनावा भी स्थानीय संस्कृति से प्रभावित है. इसलिए भारतीय मुसलमानों में तालिबानी मानसिकता और कट्टरता के लिए कोई जगह नहीं है. ...सांप्रदायिकता का जहर
गांधीवादी विचारक और लेखक कुमार प्रशांत जेपी की छांव में पले-बढ़े. शांति सेना के साथ जुड़कर लंबे समय तक काम किया. वर्तमान संदर्भ में हमारे सामने जो चुनौतियां हैं उनके मुख्यरूप से तीन प्रकार हैं. पहली चुनौती है सांप्रदायिकता, दूसरी चुनौती है पूंजी का जहर और तीसरी चुनौती है हिंसा का फैलता दायरा. गांधी शांति प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित संगोष्ठी में बोलते हुए इन तीनों विषयों पर कुमार प्रशांत ने विस्तार से प्रकाश डाला है. हम क्रमशः यहां प्रकाशित कर रहे हैं- संपादक....मिश्रित संस्कृति या मायाजाल?
क्या भारत सचमुच एक मिश्रित संस्कृतिवाला देश है? या फिर ऐसा किसी खास उद्येश्य के तहत स्थापित किया जा रहा है. दिल्ली में आयोजित एक सभा में जो विद्वतजन मिले उनकी बहुत सी बातें सोचने पर मजबूर करती हैं. किसी को शक नहीं कि भारत एक खास प्रकार की जीवनशैली जीनेवाले लोगों का देश है जो रूढ़ होकर आज अधिकांश हिन्दू के रूप में पहचाना जाता है. जिस प्रकार के प्रतिक्रियावादी हिन्दुत्व को भारतीय जीवनदर्शन के रूप में प्रचारित किया जा रहा है उसे जस के तस स्वीकार करने में बहुत पेंच है. ...जय हो, मंगल हो, कल्याण हो !
आप सबका शुभ हो. आपके बीच आकर मुझे बड़ी प्रसन्नता हो रही है. वेदों का सार उपनिषद है और उपनिषदों का परिणाम वेदांत में कहा गया है. वेदांत में ही एक शब्द कहा गया है- ब्रह्म सत्य है, जगत मिथ्या है. यह बात मेरी समझ में नहीं आयी. सत्य से मिथ्या की उत्पत्ति कैसे हो सकती है? इस एक बात ने मुझे प्रेरित किया कि मुझे सत्य की खोज करनी चाहिए. फिर मैंने परंपरा में ऋषियों-मुनियों द्वारा कहे गये इस बात की ओर ध्यान दिया कि समाधि में ही सब समाधान है. इसके बाद मैं अमरकंटक आ गया. वहां २५ साल साधना की. साधना के परिणामस्वरूप जो कुछ प्राप्त हुआ वह मैं आपके सामने लेकर प्रस्तुत हूं....
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अंग्रेजों के इस कानून को मत हटाइये
समलैंगिकता का समर्थन करने वालों के लिए यह एक बड़ी एवं सुखद घटना है कि भारत की न्याययिक व्यवस्था ने अप्राकृतिक यौन संबधों पर कानून की मोहर लगा दी है। अब शायद भारत सरकार को भी इसके आड़े आने वाली कानूनी अड़चनों को दूर करने में कुछ राहत मिल सकती है। अंग्रेजी शासन के दौरान 1860 में धारा 377 को लागू कर ऐसे किसी भी संबध को अनैतिक एवं गैर कानूनी घोषित कर दिया था। आश्चर्य देखिए कि अंग्रेजों के बनाये बहुत सारे कानूनों से हम आज भी पीछा नहीं छुड़ाना चाहते लेकिन जिस एक कानून की वजह से भारत में यौन भ्रष्टाचार पर कानूनी रोक लगी हुई थी उसे दबाव डालकर खत्म करवाने की कोशिश हो रही है....
प.बंगाल नगरपालिका चुनावों में वाम मोर्चे का पत्ता साफ
पश्चिम बंगाल में घोषित 16 नगरपालिकाओं चुनाव नतीजों में मात्र 03 पर वाममोर्चे को सफलता मिली है, शेष 13 स्थानों पर पर तृणमूल-कांग्रेस गठबंधन को जीत मिली है. लोकसभा चुनावों के बाद वामवोर्चो को प्रदेश में यह दूसरा बड़ा झटका लगा है....
दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले का देशभर में विरोध
समलैंगिक संबंधों पर दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले का देशभर में विरोध हो रहा है. सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं सहित धार्मिक संगठनों के लोग भी दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बता रहे हैं....
असाढ़, अशोक और अकाल की आशंका
राजस्थान सरकार बिजली पानी के संकट से जूझते प्रदेश को अभी तक कोई राहत नहीं दे पाई है वही आम किसान को एक बार फिर से आशंकाओं ने घेर लिया है। उसकी चिंता ये है कि कहीं एक बार फिर से पॉच साल पुराना इतिहास न सामने आ जाऐ।वो ऐसे में अकाल की स्थिति का अनुमान प्रदेश के मुखिया अशोक गहलौत से जोड रहा है और उसकी आशंका निर्मूल भी नजर नहीं आ रही है।राजस्थान में जून माह में सामान्तया 72 मिमी बारिश होती है जो इस बार 39 मिमी ही हुई है। बर्षा की कुछ क्षेत्रों में पडी फुहारों ने कुछ राहत अवश्य दी हैं।...
जनरैल को नौकरी से निकालने पर पंजाब में तीखी प्रतिक्रिया
सिख सियासत के बाबा बोहड़ माने जाते एसजीपीसी के दो दशक तक सचिव रहे जत्थेदार मनजीत सिंह कलकत्ता ने जरनैल सिंह को बर्खास्त करने की कार्रवाई को दुभाग्यपूर्ण करार दिया है. ...
जनरैल सिंह को जागरण ने नौकरी से निकाला
गृहमंत्री पी चिदम्बरम पर जूता फेंककर अपना विरोध दर्ज करानेवाले पत्रकार जनरैल सिंह को दैनिक जागरण ने नौकरी से निकाल दिया है. उनका निष्कासन 1 जुलाई से प्रभावी माना गया है....
अप्राकृतिक संबंधों पर अनैतिक फैसला
राज समाज चलाने के लिए कानूनों की परिधि में जीना जरूरी होता है. लेकिन नैतिक जीवन और कानून सम्मत जीवन में अगर किसी एक का चुनाव करना हो तो मनुष्य नैतिक जीवन का ही चुनाव करता है. यही समाज और व्यक्ति दोनों के हित में होता है. लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट के एक फैसले ने साबित कर दिया है कि देश की राज व्यवस्था पर ही नहीं कानून व्यवस्था पर भी अब कोई अंकुश नहीं रह गया है और हमारे देश के कानूनी संस्थान भी कुछ निहित स्वार्थी तत्वों के हाथ के खिलौने बनकर रह गये हैं. ...
अप्राकृतिक संबंधों को कानूनी मान्यता
दिल्ली हाईकोर्ट में गे संबंधों पर लंबित मामले पर सुनवाई करते हुए फैसला दिया है कि अगर कोई भी स्त्री या पुरुष 18 साल से ऊपर है और आपसी सहमति से अप्राकृतिक संबंध बनाता है तो उसे गैरकानूनी नहीं ठहराया जा सकता. ...
मानसून की मार से याद आयी परंपरागत खेती
मानसून में देरी से हिली सरकार ने तमाम तरह के राहत इंतजामात का ऐलान किया है। लेकिन हकीकत ये है कि ये इंतजाम ना सिर्फ फौरी हैं, बल्कि लोकलुभावन ज्यादा हैं। किसी का ध्यान अपनी पारंपरिक और सतत विकास वाली खेती की ओर नहीं है। ...
लिब्राहन की रिपोर्ट पर कांग्रेस और मुसलमान आमने-सामने
लिब्राहन आयोग की रिपोर्ट पर कांग्रेस और इस्लामिक जमातें आमने-सामने खड़ी नजर आने लगी हैं. एक ओर जहां इस्लामिक जमातों का कहना है कि मानसून सत्र में ही रिपोर्ट सदन पटल पर रखी जानी चाहिए तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस इससे बचना चाह रही है....
मायावती की नयी योजनाः स्टैचू टूरिज्म
लखनऊ के विभिन्न चौराहों और पार्कों में लगनेवाली दलित नेताओं की मूर्तियों पर उठे विवाद पर अब मायावती की सफाई है कि इन मूर्तियों पर फीस लगाकर वे राजस्व की कमाई करेंगी. इस लिहाज से मायावती की मूर्तियां स्टैचू टूरिज्म को बढ़ावा देंगी....
हजार हाथियों का बोझ दलितों के सिर
लखनऊ के अंबेडकर पार्क में दलितों की बेटी ने स्वाभिमान का नया अध्याय लिखा है. हजार-हजार हाथियों के बुत दलितों को बिना कुछ बोले समझा रहे हैं कि उनका स्वाभिमान अब लखनऊ की सरजमीं पर बुलंदी से आ खड़ा हुआ है. लेकिन दलित और पददलित इसे कैसे स्वीकार कर लें? मैले-कुचैले नीले कपड़ों पर हाथी को लहराते हुए बहनजी के लिए वोटों की बारिश करवाने वाले दलित देख रहे हैं कि हाथी का उनका निशान और स्वाभिमान दोनों ही प्राडो और पजेरो की बोनटों पर जा सवार हुआ है. जो हाथी का निशान उन्हें सदियों की गुलामी से निर्भार करता था वही उनके लिए भार बनता जा रहा है....
खत्म होना चाहिए अंको का खेल
हमारी शिक्षा प्रणाली पूरी तरह से अंकों के इर्द-गिर्द घूम कर रह गई है. प्रतिभा निखारने और उनमें आत्म विश्वास पैदा करने का काम हमारी शिक्षा व्यवस्था से दूर होता जा रहा है. बावजूद इसके, अगर आप में अपने मंजिल तक पहुंचने की दृढ़ इच्छा शक्ति और दृढ़ निश्चय है तो अंक कभी भी आप के कैरियर में रुकावट नहीं बन सकते.
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रासायनिक खादों के कारण कम हो रही है पैदावार- ग्रीनपीस
ग्रीनपीस इंडिया ने रासायनिक खाद उद्योग पर एक रिपोर्ट तैयार की है. रिपोर्ट बताती है कि अगर सरकार रासायनिक खादों को देनेवाली सब्सिडी रोक दे तो खेती और पर्यावरण की कई सारी समस्याओं का समाधान हो सकता है.क्योंकि रासायनिक खाद के ही कारण न केवल जमीन बर्बाद हो रही है बल्कि बल्कि आदमी का स्वास्थ्य और पर्यावरण भी खराब हो रहा है. सरकार जितना पैसा रासायनिक खाद उद्योग को किसानों के नाम पर सब्सिडी के बतौर देती है अगर वही पैसा पर्यावरण के अनुकूल खेती पर खर्च करेगी तो इसका तिहरा फायदा होगा. जनता का पैसा बचेगा, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन पर रोक लगेगी और पर्यावरण में हो रहे बदलावों को कम करने में मदद मिलेगी....
लालगढ़ के मुद्दे पर मुखर हुई तृणमूल
लालगढ़ के मुद्दे पर अब तृणमूल कांग्रेस मुखर हो गयी है. सोमवार को तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और रेलमंत्री ममता बनर्जी ने बयान दिया था कि लालगढ़ में चल रही कार्रवाई को सरकार तुरंत रोक लगाए. इसके बाद मंगलवार को पश्चिम बंगाल में लालगढ़ के मुद्दे पर विधानसभा का बहिष्कार किया....
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- अब भोजपुरी में बोलेगा बाजार
- तालिबान के देसी संस्करण
- विस्फोट पर अस्थाई कार्य विराम
- 10 रूपये के शपथपत्र पर पत्रकारिता गिरवी
Aapne bilkool sahi aur sateek likhaa. Lekin kyaa kare...It's happen only in India!
aaj ke sab bade patrakar chhote patrakaro ka shoshan kar rahe hai ..we maliko se mile hue hai ..apne to sale moti sailery uthate hai ...
ऐसा लगता है अवधेश जी राजस्थान की राजधानी या फिर किसी दूसरे बडे शहर में रहते है जहॉ इन्हें बिजली कि किल्लत का सामना शायद ...
चंद्रिका जी, आप सही कहती हैं। वैसे लालगढ़ की घटना के पीछे पश्चिम बंगाल में वाम दलों के एकछत्र शासन के दौरान पिछड़े इलाकों की ...
यह तो बहुत अच्छा हो गया. काश मैं इसे दो दिन पहले ही प्रकाशित कर देता?
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संजय द्विवेदी
1995 में दैनिक भास्कर से पत्रकारिता शुरू करनेवाले संजय द्विवेदी रायपुर स्वदेश में 1997 में कार्यकारी संपादक बन गये, फिर मुंबई नवभारत में तीन साल रहे उशके बाद छत्तीसगढ़ लौट आये. 2001 में भास्कर -बिलासपुर में समाचार संपादक बनकर उसके तीन साल हरिभूमि रायपुर के स्थानीय संपादक रहे फिर जी 24 घंटे छत्तीसगढ़ में एडीटर इनपुट तथा मुख्य एंकर रहे। वर्तमान में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्री पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में रीडर के बतौर कार्यरत. 123dwivedi@gmail.com
