सभा-संगत
बिल्डरों, ठेकेदारों और सरकारी अफसरों का 'हिन्दू' समागम
भाजपा नेता, सरकारी अमला, बिल्डर-ठेकेदार और रसूखदारों के समर्थन-सहयोग से भोपाल में हिन्दू संगम सम्पन्न तो हो गया, लेकिन संघ जैसा चाहता था, वैसा हिन्दू समागम तो तब भी नहीं हुआ। इन सब की भीड़ में संघ और उसके कार्यकर्ता दोनों ही कहीं गुम गये। लेकिन शायद यही नया संघ है, जहां वह दिल से नहीं दिमाग से चलता है। यह संघ अपने स्वयंसेवक और कार्यकर्ताओं से नहीं समर्थकों से चलता है। इस संघ में कार्यकर्ता कम हो गए, नेता बढ़ गए। यह संघ क्लालिटी नहीं, क्वांटिटी चाहता है। भीड़ के लिए वह कुछ भी करेगा।
अंबेडकर और गांधी : संवाद जारी है
बाबासाहब अम्बेडकर और महात्मा गांधी सिर्फ दो व्यक्ति नहीं, दो 'स्कूल' हैं, दो वैचारिक केन्द्र हैं, दो संस्थाएं हैं। दोनों आधुनिक भारत के सर्वाधिक विवादास्पद चरित्रों में हैं। चूंकि दोनों लीक से हटकर चले, इसलिए उन पर उनके समय से लेकर आज तक सवाल उठाए जाते रहे हैं। दोनों की मंजिल एक-दूसरे से जितनी मिलती थी, रास्ते उतने ही जुदा थे।
मानस और महात्मा के बीच रामकथा का सेतुबंध
पिछली सदी के महानायक और समय बीतने के साथ अवतार के रूप में स्थापित होते जा रहे महात्मा गांधी भारतीय कथा परंपरा के विषय इतनी जल्दी बन जाएंगे, इसकी कल्पना करना थोड़ा मुश्किल है. लेकिन ऐसा हो गया. महात्मा गांधी अब भारत की कथा परंपरा में शामिल हो गये हैं. इस दिशा में पहली कोशिश की महात्मा गांधी के सचिव रहे महादेव भाई देसाई के बेटे नारायणभाई देसाई ने की....भारतीय पत्रकारिता के महात्मा गांधी
किसी को महात्मा गांधी कब कहना चाहिए यह जानने से पहले हमें यह जानना चाहिए कि महात्मा गांधी होने का अर्थ क्या है? मेरी समझ में समकालीन भारतीय संदर्भ में महात्मा गांधी का अर्थ वह सागर है जिसमें सभी धाराएं आकर समाहित हो जाती हैं. इसी अर्थ में प्रभाष जोशी हिन्दी पत्रकारिता के महात्मा गांधी हैं. ...बीस बरस बाद भी हजार कोस दूर
पूरी कश्मीर घाटी में पिछले दो हफ्ते से जमात-ए-इस्लामी द्वारा गठित हिजबुल मुजाहीदीन जमकर कत्लेआम कर रहा है. राज्य सरकार और राज्य के मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला पूरी तरह से नकारा साबित हो चुके हैं. ऐसे ही वक्त में 19 जनवरी 1990 को कश्मीर में बतौर राज्यपाल जगमोहन का प्रवेश होता है. ...मानवता के हित में है तिब्बत की स्वायत्तता
तिब्बत की आजादी का संघर्ष गत पांच दशकों से जारी है। चीन द्वारा अपना प्रभुत्व स्थापित करने के लिए तिब्बती नागरिकों का दमन किए जाने के कारण वे निर्वासित होकर भारत में रहने के लिए मजबूर है। किसी भी स्वतंत्र राष्ट्र पर जबरन आधिपत्य एक गंभीर मानवीय मसला है और पड़ासी देश के नाते भारत के लिए भी यह स्थिति घातक है।
पुस्तक प्रेम पर भारी पड़ गया बुलडोजर
उधर दिल्ली छोड़कर इधर नागपुर आइये. किताबों को पड़ते पाठकों के अकाल के बीच दिल्ली और देश में भले ही पुस्तक मेलों को प्रोत्साहन दिया जाता हो लेकिन इधर नागपुर में ऐसे पुस्तक मेलों को बुलडोजर लगाकर ढहा दिया जाता है और कहा जाता है कि ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि निगम के इन नियमों का पालन नहीं किया गया.
पुण्यतिथि के बहाने आरक्षण के फसाने
26 नवंबर को जब सारा देश मुंबई में हुए हमलों को याद कर रहा था ऐसे वक्त में लोग यह भूल गये कि ऐतिहासिक रूप से यह दिन देश के पहले दलित राष्ट्रपति के आर नायारणन की पुण्यतिथि भी थी. उनके जन्मदिन के अवसर पर दिल्ली में राष्ट्रवादी अम्बेडकरवादी महासंघ ने एक सेिमनार का आयोजन किया. इस सेमिनार का विषय था- दलित हिन्दुओं के सामने चुनौतियां. सेमीनार में दलितों के सवाल पर विस्तार से चर्चा की गयी.
अब थारो कई पतियारो रे परदेशी...
यह वास्तव में शोकसभा थी. यहां कोई दो मिनट का मौन नहीं था. जाने वाले व्यक्ति के बारे में प्रशंसा के गान नहीं थे. अनुभव और यादों का वर्णन नहीं था. बोलनेवालों में होड़ नहीं लगी थी. कोई बोलने खड़ा हुआ तो गला रुंध गया, किसी ने सिर्फ यह कहा कि मेरी श्रद्धांजलि. और ऐसा कहनेवाले वे लोग जिन्हें जमाना सुनता है. वे लोग जो खूब बोलते हैं और जमकर लिखते हैं. लेकिन यहां मानों शब्द स्थिर और जड़वत हो चला था. कौन बोले? क्या बोले? और सबसे बढ़कर, क्यों बोले?
लोकतंत्र के गुणात्मक स्वरूप में गिरावट
विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत के संसद के सामाजिक सरोकार को समझने के लिए इसके सामाजिक आधार एवं संरचना को बारीकी से समझना होगा। 15वीं लोकसभा का सामाजिक आधार भारतीय सामाजिक और राजनीतिक जीवन को कितना प्रतिबिम्बित करती है और लोकसभा का विरासत से कितना मेल खाता है? जैसे कुछ प्रश्न भारत नीति प्रतिष्ठान के द्वारा आयोजित गोष्ठी में उठाया गया। यह गोष्ठी प्रतिष्ठान के शोध कार्य ``15वीं लोकसभा के सामाजिक आधार का अलोचनात्मक अध्ययन´´ के पूर्ण होने पर आयोजित की गई थी।
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नरेन्द्र मोदी को शर्म नहीं आती
फरवरी 2002 के गोधरा कांड के बाद भड़के गुजरात दंगों के दौरान अहमदाबाद की गुलबर्गा सोसासटी में हुए नरसंहार के सिलसिले में विशेष जांच दल ने पूछताछ के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को 21 मार्च को विशेष जांच दल के सामने पेश होने के लिए समन जारी किया है। भारत के इतिहास में यह पहला मामला है, जिसमें किसी सिटिंग मुख्यमंत्री को किसी आपराधिक मामले में पुलिस ने समन जारी किया है।...
नानाजी को मीडिया की ना ना जी
27 फरवरी को जनसंघ के वरिष्ठ नेता रहे नानाजी देशमुख का निधन हुआ। नानाजी भले ही दक्षिणपंथी धारा के महत्वपूर्ण स्तंभ रहे हैं, लेकिन उनका संबंध समाजवादी राजनीति के अलंबरदारों से भी गहरा रहा है। फिर भी उनके निधन को टेलीविजन की तो बात ही छोड़िए, अखबारों तक ने वह कवरेज नहीं दी, जिसके वे हकदार थे।...
देश में इतनी भगदड़ क्यों है भाई?
9 मार्च को अमेरिकन आइडल की नकल पर बने इंडियन आइडल रियलिटी शो के नोएडा ऑडीशन में इंडियन आइडल बनने की चाह रखने वालों की ऐसी भीड़ उमड़ी कि आयोजकों के सारे इंतजाम धरे के धरे रह गए। अनियंत्रित भावी इंडियन आइडल्स ने जमकर हंगामा किया, भगदड़ में रौंदे गए कई आइडल अस्पताल पहुंच गए। नोएडा की सड़कों पर घंटों के लिए जाम लग गया। ...
यास्मीन की कला में समाया कण्डोम
यास्मीन एक तो मुस्लिम औरत हैं ऊपर से बिहार जैसे परंपरागत राज्य के पिछड़े हुए गांव में रहती हैं. लेकिन यास्मीन जो काम कर रही है वह तथाकथित आधुनिक और सभ्य समाज की भी किसी महिला के लिए शायद ही संभव हो. अपने मधुबनी कला के जरिए सेक्स शिक्षा का संदेश दे रही है. उनकी ही तर्ज पर मधुबनी की कुछ और महिला कलाकार कला को नयी परिभाषा दे रही हैं. ...
200 रूपये में लीजिए राजहंस का स्वाद
मंगोलिया से हर वर्ष भारत में आने वाले दुर्लभ राजहंस (बार हेड़ेड़ गीज) को जाल बिछाकर पकड़कर उसे 200 से 300 रुपए में बेचे जाने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। चन्द्रपुर और वर्धा के पक्षी मित्रों ने अपने स्तर का स्टिंग आपरेशन करते हुए दुर्लभ प्रजाति के राजहंस को बेचते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया।...
हुसैन के इस कर्म का मर्म समझो, हिन्दुओ!
भारतीय कलाजगत के एक ढोंगी चित्रकार मकबूल फ़िदा हुसैन ने दुनिया भर में फैले भारतीय समुदाय के बूते स्वयं को स्थापित कर मोटी कमाई की है। लेकिन आखिरकार हिन्दू भावनाओं को आहत करनेवाले चित्र बनाकर हिन्दू जनमानस के साथ खिलवाड़ कर अपने जीवन की सांध्यवेला में कतर जैसे मुस्लिम देश की नागरिकता स्वीकार कर ली. ऐसा करके उसने माँ भारती की पीठ में खंजर भोंकने का काम किया है....
नंगे पांव देश नापने का नशा
लातूर के भीषण भूकंप ने उनसे उनका परिवार छीन लिया. गर्भवती स्त्री, बच्चे, माता-पिता, भाई कोई नहीं बचा. अगर कोई बचा तो वे खुद मोहनराव पाटिल. अब चालीस के हो चले पाटिल ने अपने परिवार के असमय काल के गाल में समा जाने के बाद पूरे देश को ही अपना परिवार बना लिया. कंधे पर राष्ट्रीय ध्वज और गले में लटकी संदेश की तख्ती के माध्यम से वे राष्ट्रप्रेम की अलख जगा रहे हैं. लोग भले ही उन्हें कुछ भी कहें, कुछ भी समझें, उनकी अनथक, अविरल देशप्रेम की पदयात्रा जारी है. संजय स्वदेश की रिपोर्ट-...
महिला आरक्षण: कहीं खुशी का खाना, कहीं चिंता की चाय
बलवा खत्म, तो समझो महिला बिल अटक गया। यादवी तिकड़ी के हंगामे पर फिलहाल सरकार ने सरेंडर कर दिया। अब फिर बात होगी बिल के हर पहलू पर। सभी पक्षों से बात कर ही अब लोकसभा में बिल आएगा। आखिर आम बजट पास कराने की मजबूरी में सरकार को भरोसा देना पड़ा। एक बार नहीं, तीन-तीन बार। संसदीय कार्यमंत्री तो बुधवार को ही सभी से सलाह-मशविरे का एलान कर चुके। गुरुवार को लोकसभा में लालू-शरद-मुलायम ने अपनी बात रखी तो प्रणव दा ने भरोसा दिलाया। फिर भी यादवी तिकड़ी का दिल नहीं भरा।...
रिलायंस पॉवर प्लांट में हादसा, 2 मरे दर्जनभर से अधिक घायल
सोनभद्र। रिलायंस के सासन पावर प्रोजेक्ट की चिमनी पर चढ़ाये जा रहे रिग के गिरने के कारण दो लोगों की मौत हो गयी है और लगभग 15 लोगों के घायल होने की खबर है. घायलों में कुछ की स्थिति गंभीर बताई जा रही है. दुर्घटना देर शाम हुई और मौके पर घनघोर अँधेरा होने की वजह से हताहतों की सही संख्या का अनुमान नहीं लगाना मुश्किल है. ...
नौजवानों के लिए ग्लोबल नालेज सेन्टर की स्थापना करेगा 'युवा'
नई दिल्ली। बेरोजगारी और आतंकवाद के मुद्दे पर काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन “युवा ए मुमेंट” ने एक अनोखी पहल करते हुए युवाओं के लिए एक ग्लोबल नालेज सेंटर स्थापित करने की योजना बनाई है. नालेज सेंटर की स्थापना के पहले चरण में www.yuvafoundation.co.uk नामक एक वेब साइड तैयार की गई है. इसका उदघाटन केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आज किया....
मकबूल को क्यों करें कबूल?
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का नाम लेकर कुछ हुसैन समर्थक अश्लीलता, भारतीय अस्मिता, देवी-देवताओं के प्रति आस्था और देश के प्रति सम्मान का अपमान करने वाले हुसैन और उसकी करतूतों पर पर्दा डालने और उसका बचाव करने की कोशिश कर रहे हैं। हुसैन का बचाव करनेवाले यह क्यों नहीं मानते कि अभिव्यक्ति जब सार्वजनिक होती है उसका प्रभाव व्यापक होता है और हुसैन की अभिव्यक्ति से भी करोड़ों लोग आहत होते रहे हैं। ऐसे में ये करोड़ों लोग मकबूल को कबूल क्यों करें?...
राजस्थान में गिनती के बचे हैं गिद्ध
राजस्थान में गिद्धों से जुड़ी एक रिपोर्ट आई है. रिपोर्ट में इस बात पर चिन्ता व्यक्त की गई है कि राजस्थान में गिद्धों पर संकट है. उनकी संख्या केवल 3907 शेष बची है. प्रदेश के मुख्य जीव प्रतिपालक आर एन मेहरोत्रा का मानना है कि ये गिद्ध पश्चिमी राजस्थान में ही बचे है....
बीजेपी-कांग्रेस फंस गईं एक-दूसरे के जाल में
बलात ही सही, राज्यसभा ने अपना काम निपटा दिया पर राज्यसभा से निकली महिला बिल की लपटें अब लोकसभा को झुलसा रहीं हैं। बिल विरोधियों ने बुधवार को भी लोकसभा नहीं चलने दी। जब बिल से पहले इस कदर हंगामा तो बिल आने पर क्या होगा?...
72 घंटे में 10 किसानों ने की आत्महत्या
नागपुर। जब सरकार देश की राजधानी नई दिल्ली में महिला आरक्षण, महिला उत्थान और महिला सशक्तिकरण और महिला आरक्षण विधेयक की चर्चा आदि में व्यस्त थी, तभी किसान आत्महत्या की राजधानी विदर्भ में कृषि संकट से त्रस्त 10 किसानों ने मौत को गले लगा लिया। आत्महत्या करने वाले छह किसान यवतमाल, दो अकोला, एक वाशिम और एक नागपुर जिले के हैं।...
पप्पू प्वाइंट पर अटक गई बिहार कांग्रेस की सूई
राहुल गांधी की फार्मूला कार पर बैठकर फर्श से अर्श पर पहुंचने का सपना देख रही बिहार कांग्रेस की मुसीबत यह है कि वह हर बार एक न एक ऐसी अंदरूनी मुसीबत में उलझ जाती है कि उसे बाहर ध्यान देने का वक्त ही नहीं मिल पाता। फिलहाल साधु यादव से ज्यादा बहुचर्चित बाहुबली राजनेता पप्पू यादव उसके लिए गले की फांस बने हुए हैं।...
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- अब भोजपुरी में बोलेगा बाजार
- तालिबान के देसी संस्करण
- विस्फोट पर अस्थाई कार्य विराम
सलीम जी, देश की न्याय प्रणाली पर जैसा भरोसा आपने जताया है, काश वैसा ही भरोसा मकबूल फ़िदा हुसैन ने भी जताया होता.
अगर देश ...
प्रिय आरएसएस, आपकी यह शिकायत सोलह आने सच है कि "हिंदू" शब्द का उच्चारण करते ही किसी को भी सांप्रदायिक घोषित कर दिया जाता है. ...
yah suar ka pilla shala saleem bho ho sakta hai.
nahi to koi RSS ka naam kya kharab karna chahega.
tabhi main kahu yah haraamkhor aisa kya ...
Bhai yah आर एस एस to vastav hee आर एस एस jaisa hee ujad dikhai deta hai. Jaroor yah kisi Bajrag dal ke gramin ikaai ...
भाइ Vicky G जी थोडा तर्क और कुतर्क तथा थोथे तर्क मे फर्क बताने का भी कष्ट करे.यहा तो हालत ये है कि जैसे ही ...

