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एनएसजीः सर्वत्र सर्वोत्तम सुरक्षा
मुंबई में हुए आतंकी हमलों पर सीधी कार्रवाई करके उसे विफल कर देने का श्रेय एनएसजी के कमाण्डो को जाता है. एनएसजी के कमाण्डो ने सेना, मेरीन, एटीएस और स्थानीय पुलिस की मदद से इस पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया. ९८-९९ में एनएसजी के महानिदेशक रहे टी आर कक्कड़ का कहना है कि एनएसजी के इतिहास में यह उसके लिए आज तक का सबसे बड़ा आपरेशन था. एनएसजी जिन्हें आमतौर पर ब्लैक कैट कमाण्डों के रूप में जाना जाता है उसने अभी हाल में ही १६ अक्टूबर को अपना चौबीसवां स्थापना दिवस मनाया है.
मंडल आयोग और वीपी सिंह
जब तक सामाजिक विषमता रहेगी सामाजिक न्याय की आवश्यकता बनी रहेगी. यह कथन इस दशक के प्रारंभ में प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह का नहीं बल्कि दशक के अंत में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का है. मंडल ने जिस तरह राजनीतिक व्याकरण को बदला है वैसा पहले कभी नहीं हुआ है. ...वी पी सिंह की सात कविताएं
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री वी पी सिंह अब हमारे बीच नहीं है. अपने आधे तन लेकिन पूरे मन से वे आखिरी सांस तक आम आदमी के लिए लड़ते रहे. राजनेता के साथ-साथ वे एक उम्दा चित्रकार भी थे. बीमारी के बावजूद वे अपने चित्रों की प्रदर्शनी लगाते थे और विधिवत उन चित्रों के मर्म को लोगों को समझाते थे. वे बहुत संवेदनशील कवि भी थे. उनकी आत्मा को श्रद्धांजलि देते हुए हम यहां उनकी ग्यारह कविताएं प्रकाशित कर रहे हैं जो उस वी पी सिंह से हमारा परिचय करवाती है जिसे हम शायद नहीं जानते....हम युद्धभूमि में हैं
मुंबई में चौबीस घण्टे से हमारे जाबांज जवान आतंकवादियों से लोहा ले रहे हैं. यह मुटभेड़ अगले कुछ घण्टों तक और जारी रहेगी. अब तक तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों सहित १४ पुलिस के जवान और १०० से अधिक नागरिक अपनी जान गवां चुके है. जी न्यूज ने खुलासा किया है कि आतंकी १९-२० दिसंबर को मुंबई का दौरा करके जा चुके थे. सितंबर में ही एक विदेशी खुफिया एजंसी ने चेताया था मुंबई पर बड़ा हमला हो सकता है. ...अभिनव भारत पर आरोप निराधार-हिमानी सावरकर
हिमानी सावरकर उस संस्था अभिनव भारत की अध्यक्ष हैं जिसके ऊपर मालेगांव विस्फोट की योजना बनाने का आरोप लग रहा है. वे वीर सावरकर के छोटे भाई नारायण दामोदर सावरकर की पुत्रबधू और नाथूराम गोड्से के छोटे भाई गोपाल गोड्से की पुत्री हैं. अभिनव भारत के साथ-साथ वे हिन्दू महासभा की अध्यक्ष भी हैं. वे दिल्ली आयीं थी, इसी यात्रा के दौरान हमने उनसे मिलकर मालेगांव विस्फोट के सिलसिले में लंबी बातचीत की. प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश-...मैं, साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर
मैं साध्वी प्रज्ञा चंद्रपाल सिंह ठाकुर, उम्र-38 साल, पेशा-कुछ नहीं, 7 गंगा सागर अपार्टमेन्ट, कटोदरा, सूरत,गुजरात राज्य की निवासी हूं जबकि मैं मूलतः मध्य प्रदेश की निवासिनी हूं. कुछ साल पहले हमारे अभिभावक सूरत आकर बस गये. पिछले कुछ सालों से मैं अनुभव कर रही हूं कि भौतिक जगत से मेरा कटाव होता जा रहा है. आध्यात्मिक जगत लगातार मुझे अपनी ओर आकर्षित कर रहा था. इसके कारण मैंने भौतिक जगत को अलविदा करने का निश्चय कर लिया और 30-01-2007 को संन्यासिन हो गयी....कितना पाक है संघ परिवार?
मालेगांव विस्फोट पर आडवाणी को सफाई देने के प्रधानमंत्री के प्रयास को एक किनारे रख दें तो क्या आडवाणी के सवाल जायज़ हैं? लगभग सौ वर्ष पहले सावरकर ने अभिनव भारत की स्थापना की थी। लेफ्टीनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित उसी अभिनव भारत का संस्थापक सदस्य है जिसकी सक्रिय सदस्य प्रज्ञा है। यह समरूपता क्या महज एक संयोग है? ...क्या यह दुख सबको मिटाकर मिटेगा?
पिछले तीन-चार महीनों में मंदिर-मस्जिद और गिरजाघरों के भक्त आपस में लड़े हैं और इससे जो आग लगी है, उससे फिर कई लोग झुलसे हैं। कश्मीर, उड़ीसा और कर्नाटक में धर्मों की बुनियाद-सहिष्णुता को जलाकर यह आग तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में भी फैली है। गांधीजी ने सनातन धर्म को सबसे सहिष्णु धर्म बताया था। उन्होंने बहुत भारी मन से पूछा था कि क्या यह दुख सबको मिटाकर मिटेगा?...जेहाद से न खुलेंगे जन्नत के द्वार
सिर्फ यह कहकर छुटकारा नहीं पाया जा सकता कि आतंकवादी हिंसा सिर्फ कुछ सिरफिरे या बहके हुए लोगों का काम है। पूरी दुनिया में इस्लाम के नाम पर हो रही आतंकवादी गतिविधियां इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि इस्लाम की पूरी विचारधारा में कहीं ऐसा कुछ जरूर है जिसे इस तरह की हिंसा के लिए आसानी से आधार बनाया जा सकता है....अबूझमाड़ में लोकतंत्र जिन्दा है
"वोट डालने के कारण हमारे गांव में कई लोग मारे जा चुके हैं. नक्सली उन्हें उठाकर बाहर ले जाते हैं और गोली मार देते हैं. नक्सलियों ने कई लोगों की अंगुलियां काट दी. हम फिर भी छुप-छुपकर वोट डालने जाते हैं." छत्तीसगढ़ के दक्षिण में नारायणपुर जिले ताडनार गांव के ४० वर्षीय आईतु राम की बात ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया....मेरी बेटी प्रज्ञा
मेरा परिवार उत्तर प्रदेश के जालौन जिले से है. हम लोग क्षत्रिय हिन्दू हैं. मेरी शादी के ११ साल बाद मेरी बेटी प्रज्ञा का जन्म हुआ. मेरी चार बेटियां और एक बेटा है. हम लोग धर्म में विश्वास करनेवाले लोग हैं. हमारे परिवार में पैसे से ज्यादा महत्व हमेशा संस्कार को दिया गया. हमारे परिवार में धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष का सामंजस्य बिठाकर रखा गया है. यही संस्कार हमने अपने बच्चों को दिया है. ...यह जेहाद अमेरिका की देन है
बार-बार हो रहे आतंकी हमलों ने जिन जुमलों को जनता की जुबान पर चढ़ा दिया है उनमें से एक है जेहाद. कुरआन में यह शब्द कहीं नहीं है। इसे गढ़ने का श्रेय अमरीकी प्रशासन को है। डब्ल्यूटीसी टावर्स पर हमले, जिसमें तीन हजार से ज्यादा बेकसूरों ने अपनी जान गंवाई थी, के बाद इस शब्द का मीडिया में जमकर इस्तेमाल शुरू हो गया। जिहाद और काफिर शब्दों को मीडिया ने नए अर्थ दे दिए। ...हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की गिरफ्तारी के बाद "हिन्दू आतंकवाद" शब्द चर्चा में है. मैं कई अखबारों के लिए कालम लिखता हूं तो मुझे कहा गया कि आप इस बारे में कुछ लिखिए. लोग जानते हैं कि मैं आजन्म कैथोलिक ईसाई हूं, लेकिन २५ सालों तक दक्षिण एशियाई देशों में रहकर फ्रांस के अखबारों के लिए काम किया है इसलिए मैं इस भू-भाग मैं फैली हिन्दू संस्कृति को नजदीक से जानता समझता हूं....टाटा-मोदी समझौता हुआ सार्वजनिक
टाटा और मोदी के बीच हुआ नैनो समझौता सार्वजनिक हो गया है. इससे जो तथ्य निकलक सामने आये हैं उससे गुजरात के प्रशसनिक हलके में तहलका मचा हुआ है. लाख कोशिशों के बावजूद गुजरात के मुख्यमंत्री रतन टाटा के साथ हुए नैनो कार समझौते को सार्वजनिक नहीं करना चाहते थे. यहां तक कि जब सूचना के अधिकार के तहत इस बाबत जानकारी मांगी गयी तो उसे भी प्रशासन ने खारिज कर दिया था. लेकिन अब प्रशासन के ही कुछ लोगों ने समझौते की बातें लीक कर दी है. ...बहुत कुछ हासिल किया है छ्त्तीसगढ़ ने
छत्तीसगढ के पहले निर्वाचित सरकार के पांच वर्ष पूर्ण करने के बाद प्रदेश के विकास का कारवां अनेक अवरोधो-विरोधों को झेलते हुए भी अपने लक्ष्य की ओर चल पडा है। पूर्वजों ने जैसा छत्तीसगढ बनाना चाहा था, उस सपने को साकार किया गया है। आज प्रदेश से बाहर छत्तीसगढ की पहचान अवसरों के, संभावनाओं के और आशाओं के प्रदेश के रूप में की जा रही है। हर छत्तीसगढ बंधु, गौरव से सीना तानकर अपने को उस प्रदेश का बताते हैं, जो भरपूर आत्मविश्वास के साथ विकास की राह पर सरपट दौड पड़ा है। ...विदेशी धन और धर्मांतरण
अभी हाल में ही मैं अपने गृहराज्य कर्नाटक गया था. मैंने अनुभव किया कि इस इलाके में इधर के वर्षों में ईसाईयों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है. जब थोड़ी जानकारी इकट्ठा की तो पता चला कि धर्मांतरण में यह तेजी वर्ल्ड विजन के सक्रिय होने के बाद आयी है. यह वर्ल्ड विजन वही दानदाता संस्था है जो भारत के एक पवित्रम स्थान माजुली में धर्मांतरण के कामों को मदद कर रहा है. माजुली द्वीप समूह वैष्णव संप्रदाय के महान समाज सुधारक शंकर देव की कर्मस्थली है. वर्ल्ड विजन इन द्वीप समूहों पर ईसा का पवित्र संदेश पहुंचाना चाहता है. इसके लिए वह भारी रकम भी खर्च कर रहा है. ...कुछ इस तरह टूटा सिंगूर का सपना
कहानी शुरू हुई थी वाम मोर्चा द्वारा लगातार सातवीं बार भारी बहुमत से सत्ता में आने के साथ. १८ मई २००६ को हुए वामपंथी राज्य सरकार के शपथ ग्रहण समारोह ने माकपा के इतिहास में एक और युगान्तकारी अध्याय जोड़ दिया था. २००० में ही परिपक्व वामपंथी नेता ज्योति बसु ने उदारवादी और गतिशील मार्क्सवादी बुद्धदेव भट्टाचार्य को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त कर दिया था. इसलिए २००६ में जब वामपंथी सरकार ने भारी बहुमत हासिल किया तो बुद्धदेव को लगा कि अब वे राज्य का संचालन अपनी नीतियों के अनुसार कर सकते हैं....कमरतोड़ शिक्षा की भिक्षा
एक हाथ में पानी की बोतल और दूसरे में लंच बॉक्स और कंधे पर भारी-भरकम बस्ते का बोझ लिए झुके-झुके से चलते देश के भविष्य को देखना एक प्रताडना से गुजरना है। दस वर्ष से भी कम आयु के बच्चे अपने वजन के जितना बोझ उठा रहे हैं. यह सवाल उठना वाजिब है कि हम बच्चों को सुसंस्कृत नागरिक बनने की शिक्षा दे रहे हैं या कुशल भारवाहक बनने का प्रशिक्षण?...संवाद का एक बड़ा आंदोलन चलाओ, आतंकवाद खत्म हो जाएगा
हिंसा की आंधी हर स्तर पर चारों ओर उठ रही है जो मनुष्य के अंदर जितनी तरह की कमजोरियां हैं, उसको उभारने में लगी हैं. सिर्फ किसी को मारने-पीटने भर का सवाल नहीं है, इस हिंसा का दायरा बहुत बड़ा है. एक तरह से पूरे समाज का पाशवीकरण करने की कोशिश हो रही है ताकि समाज में कोई मूल्य ऐसा बचे नहीं जिसपर पांव टिकाकर समाज खड़ा हो सके. इस तरह की एक फिसलन वाली जमीन तैयार करने की कोशिश की जा रही है कि आदमी कहीं अपना पांव टिका ही न सके. ...सांप्रदायिकता का जहर
गांधीवादी विचारक और लेखक कुमार प्रशांत जेपी की छांव में पले-बढ़े. शांति सेना के साथ जुड़कर लंबे समय तक काम किया. वर्तमान संदर्भ में हमारे सामने जो चुनौतियां हैं उनके मुख्यरूप से तीन प्रकार हैं. पहली चुनौती है सांप्रदायिकता, दूसरी चुनौती है पूंजी का जहर और तीसरी चुनौती है हिंसा का फैलता दायरा. गांधी शांति प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित संगोष्ठी में बोलते हुए इन तीनों विषयों पर कुमार प्रशांत ने विस्तार से प्रकाश डाला है. हम क्रमशः यहां प्रकाशित कर रहे हैं- संपादक....इतिहास से आये ओबामा
'कोई अश्वेत भी अमेरिका का राष्ट्रपति हो सकता है यह चालीस साल पहले तो क्या चार साल पहले भी नहीं सोचा जा सकता था. पर, इस बार होगा.' चुनाव प्रचार के दौरान अपने समर्थकों को भेजे ईमेल में खुद बराक ओबामा ने यह बात लिखी थी. डेनेवर में डेमोक्रेटिक पार्टी के अधिवेशन में भी उन्होंने यही घोषणा की थी. उनकी वह बात सही साबित हुई. जो चार साल पहले नहीं सोचा जा सकता था वह आज अमेरिका की सच्चाई है. ...Author info
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