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कितना ग्रीन है आपका कम्प्यूटर
ग्रीनपीस द्वारा जारी एक ताजा सर्वे में यह खुलासा किया गया है कि ग्रीन हाउस गैसों को कम करने के लिए कम्प्यूटर और इलेक्ट्रानिक सामान बनानेवाली कंपनियां फिसड्डी साबित हो रही हैं
मुरिया दरबार का करमा नृत्य है सलवा जुडूम
सलवा जुड़ुम ना कोई ब्राण्ड है और न ही गांधी को ब्राण्ड एम्बेसडर जैसे शब्दों से दूषित करने की जरूरत. ये दोनों शब्द बिल्कुल बाजार की उपज है....जमाखोर कौन?
पी साईंनाथ बता रहे हैं कि अनाज और भूख दोनों की जमाखोरी में इजाफा हुआ है. एक तरफ अनाज के भंडार बढ़ें हैं तो दूसरी ओर भूख की जमाखोरी भी बढ़ी है....ईसाईयत में जातिवाद
चर्च में दलित ईसाईयों से गैर-बराबरी का यह आलम है कि दलितों के लिए बैठने का अलग स्थान, पीने के लिए पानी का अलग गिलास दफन करने के लिए कब्रिस्तान भी अलग होता है....दो सरदार बनाम पूरी सरकार
परमाणु समझौते पर राजनीति चरम पर है. इस मुद्दे पर आखिर क्या कारण है कि दो सरदार एक तरफ और सारी सरकार दूसरी तरफ नजर आ रही है....खुशहाल सोनिया की बदहाल रायबरेली
राबरेली में कांग्रेस उस सर्कस के समान है जहां सोनिया के आते ही तंबू लग जाता है, कुर्सियां बिछ जाती हैं और उनके जाते ही तंबू उखड़ जाता है....ईसाईयत के अपवित्र निशान
आज भारत में धर्मपरिवर्तन धंधा बन चुका है जिसके मूल में राजीनीतिक साम्राज्यवाद और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का पैसा लगा हुआ है. ...नहीं आये बिहारी मजदूर
इस बार पंजाब में बिहारी मजदूर मौसमी खेती करने नहीं आये. पंजाब में हाहाकार मचा हुआ है. मजदूरों की कमी के कारण धान की रोपाई बुरी तरह से प्रभावित हो रही है. ...लोकतंत्र की लटों में उलझ गया नेपाल
नेपाल में तब तक कोई खास बदलाव आपको नजर नहीं आयेगा जब तक आप काठमाण्डू शहर के अंदर न पहुंच जाएं. वीरान नारायणहिति में तांक-झांक करने पर एक गार्ड दिख जाता है...सामना का संपादकीयः शर्मनाक फिसड्डी बम
सामना के जिस संपादकीय में बाल ठाकरे ने "तुल्यबल हिन्दू आतंकवाद" की बात की हैं, विस्फोट वह पूरा संपादकीय संदर्भरूप में प्रकाशित कर रहा है....सूखा सोखने की पहल
बुंदेलखण्ड में सूखे से निजात दिलाने की दिशा में पहली पहल हुई उस गांव में जहां सबसे ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की थी. बांदा के पंड़ुई गांव में में हुई आत्महत्याओं को सरकार ने जब...मार ही डालेगा यह मोबाईल
आखिरकार दूरसंचार विभाग ने भी माना है कि मोबाईल फोन मानवस्वास्थ्य के लिए खतरनाक है इसलिए बच्चों, गर्भवती महिलाओं और हृदय रोगियों को इसके इस्तेमाल से बचना चाहिए....बचपन बचाओ तो हम बचें
यह भी इस देश की एक त्रासद हकीकत है कि हर 155 वें मिनट में किसी न किसी बच्चे के साथ यौन दुराचार होता है....क्या यह विस्फोट की सफलता है?
मीडिया में यह चलन खूब है कि अगर उनके द्वारा उठाये गये किसी मुद्दे को प्रतिसाद मिलता है तो चर्चा तो करते ही हैं. लेकिन आज सुबह-सुबह दैनिक जागरण...आरूषि हत्याकाण्ड से चैनलों की चांदी
आरूषि हत्याकाण्ड में असली गुनहगार तक सीबीआई भले ही अब तक न पहुंच पायी हो लेकिन मुद्दा बनानेवाले हिन्दी अंग्रेजी चैनलों को उनका प्रसाद मिल गया है. ...कपालभांति से भूख को मारेंगे रामदेव
रामदेव ने देश के लोगों से अपील की है कि अगर खाद्यान संकट से निपटना है तो उन्हें कपालभांति प्राणायाम करना चाहिए. उनका कहना है कि इससे भूख मर जाती है...बुन्देले हर बोलो कि...
बुन्देलखण्ड के खेत-खलिहानों में पसरे सन्नाटे की जड़ें गहरी हैं. इतिहास के पन्नों में, बुजुर्गों की यादों में जहां से जो सूचनाएं मिलती हैं वे बताती हैं कि बुन्देलखण्ड आज जैसा बेबस और बदहाल पहले कभी नहीं रहा....हत्या, आत्महत्या या मौत
नोएडा में किसी लड़की की दुखदायी हत्या हो जाए तो पूरा मीडिया गुत्थी सुलझने तक परत-दर-परत उसका पीछा करता है. लेकिन बुन्देलखण्ड में आये दिन हो रही मौतों पर ...तमाशा चैनलों के नट बहुरूपिया
पतन की कोई सीमा नहीं होती. हिन्दी टीवी चैनलों के क्रियाकर्म देखें तो यह कहावत एकदम सही लगती है. फिलहाल तमाशा चैनलों का नया शगल नट बहुरूपिया है....Author info
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