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शहीदे आजम भगत सिंह की 'जयंती'
इसी 23 मार्च की शाम मुझे एक असहज अनुभव हुआ। शहीद-ए-आजम भगत सिंह के बलिदान दिवस पर आयोजित एक छोटे से समारोह में शामिल होने का अवसर मिला। श्रोताओं की अधिकतम संख्या एक सौ रही होगी। इनमें भी बूढ़े अधिक थे, युवा कम। बूढ़े लोग खुद से तथा अपने अतीत से मोहग्रस्त और आत्म-मुग्ध थे तो युवा लगभग निस्पृह या कि तटस्थ मुख-मुद्रा में।
नया मीडियाः गैर जिम्मेदार और घटिया
हिन्दुस्तान अखबार पिछले कुछ दिनों से ब्लाग और वेबसाईटों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. एक मीडिया वेबसाईट के खिलाफ मानहानि का मुकदमा करने के बाद हिन्दुस्तान की कार्यशैली पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं. आज हिन्दुस्तान की संपादक मृणाल पाण्डेय ने अपने संपादकीय में उन सवालों के जवाब दिये हैं जो हिन्दुस्तान के बारे में किसी के भी मन में आ सकते हैं. आश्चर्यजनक रूप से वे नयी मीडिया को "गैर-जिम्मेदार और घटिया मीडिया" की संज्ञा देते हुए उससे निपटने के लिए "जिम्मेदार मीडिया" के एकजुट होने का आह्वान किया है. आप भी पढ़िये- ...मुसलमानों का हक
केंद्र की कांग्रेस अगुआई वाली संप्रग सरकार ने पांच साल पूरे कर लिए और 15वीं लोकसभा चुनाव के लिए मतदाताओं के सामने जाने के लिए तैयार है. पार्टी कार्यकर्ताओं के जरिए विकास की बात फैलायी जा रही है, तो दूसरे तरफ विज्ञापनों द्वारा भी सरकार अपने कामों का गुणगान करने में लगी है। विभिन्न मंत्रालयों की रिपोर्ट को विज्ञापन द्वारा प्रस्तुत किया जा रहा है। लेकिन क्या यह रिपोर्ट उसके द्वारा तय किए गए लक्ष्य को पूरा कर रही है, इस पर मौन धारण किया गया है। ...पेड़ भी करते हैं पिण्डदान
परिवार की परिभाषा के अनुसार अपने जनक को मुखाग्नि देने का अधिकार पुत्र का है। पुत्र ही तर्पण करता है। शास्त्रों ने इस मोक्षगामी तर्पण हेतु `तरूपत्रक´ का विधान दिया है और कहा है कि `पेड़ भी कर सकते हैं तर्पण'। पदम पुराण (सृष्टि खण्ड) में लिखा है कि वृक्ष, पुत्रहीन पुरुष को पुत्रवान होने का फल देते हैं, इतना ही नहीं वे अधिदेवता रूप में तीर्थों में जाकर वृक्ष लगाने वालों को पिण्डदान भी देते हैं।...अलका सक्सेना हैं टीवी की सर्वश्रेष्ठ महिला न्यूज एंकर
टीवी न्यूज इंडस्ट्री में एपीयरेंस भले ही सबसे बड़ी मांग और चैनल के ब्राण्ड इमेज को बढ़ाने के लिए जरूरी हो लेकिन सर्वश्रेष्ठ महिला न्यूज एंकर की बात आयी तो बाजी अलका सक्सेना के हाथ ही लगी है. अलका सक्सेना ने आज तक से न्यूज एंकरिंग शुरू की थी और इस वक्त वे जी न्यूज में बतौर सलाहकार संपादक कार्यरत हैं. एक स्वतंत्र मीडिया सर्वे द्वारा यह बात सामने आयी है कि अलका सक्सेना ही सर्वश्रेष्ठ महिला न्यूज एंकर हैं. यह सर्वे मीडियाखबर डाटकाम ने किया है....यह "लाल सलाम" पाश के नाम
आज पंजाब में पैदा हुए उस भगत सिंह को याद करने का दिन है जिनके चिंगारी की तपिश हम अभी भी महसूस करते हैं. लेकिन आज का दिन (२३ मार्च) पंजाब में पैदा हुई एक और शख्सियत को याद करने का दिन है. इस शख्सियत ने भगत सिंह के बारे में लिखा था- भगत सिंह ने पहली बार पंजाब को जंगलीपन, पहलवानी व जहालत से बुद्धिवाद की तरफ मोड़ा था. उसी पाश का आज जन्मदिन है. पाश और उनकी कविताओं को याद कर रहे हैं आदित्य चौधरी....गैरकांग्रेसी सेकुलर सरकार एकमात्र एजंण्डा- प्रकाश कारत
भाकपा महासचिव प्रकाश कारत कहते हैं कि इस चुनाव में परिणाम बहुत चौंकानेवाले हो सकते हैं. इसलिए तीसरे मोर्चे की सरकार के बारे में अभी से कुछ कहना जल्दबाजी होगी. हालांकि वे मानते हैं कि चुनाव बाद किसी भी गैर कांग्रेसी सेकुलर सरकार की कल्पना वामपंथी सहयोग के बिना संभव नहीं है. ...इस गांधी से हमें प्यार हो गया
यदि संजय गांधी जीवित होते तो क्या कांग्रेस पार्टी धर्मान्ध मुस्लिमों के मामले में इतनी बदचलन होती? वरूण गांधी की टिप्पणी से यह प्रमाणित होता है कि प्रश्न का जवाब निश्चित तौर पर नकारात्मक रहता। आजकल चुनावी आचार संहिता नामक एक बंधन हम सब पर लाद दिया गया है। सो संभलकर बोलो, संभलकर करो और संभलकर लिखो। ये सारे नियम-कानून केवल हिन्दुओं के लिए। जबकि धर्मान्ध मुसलमान हो जो चाहें सो करें। चुनावी आचार संहित को लेकर जिए तरह की जिद पाली जाती है, काश! जनसंख्या के मामले में भी किसी प्रकार की आचार संहिता होती तो इस देश का कल्याण हो जाता। ...विधिगत शिक्षा में विधिवत लूट
उत्तर प्रदेश शिक्षा माफियाओं का स्वर्ग बनता जा रहा है. प्रदेश में जिसके पास भी पैसा है और शिक्षा के व्यापार में हाथ आजमाना चाहता है तो वह विधि कालेज खोलता है. यह प्रदेश का सबसे फलता-फूलता कारोबार है. इस कारोबार के विरोध में अगर कोई आवाज उठाता है तो पूरा प्रशासन मिलकर उसकी रक्षा करता है. लखनऊ विश्वविद्यालय से जुड़े विधि कालेजों से जुड़ी लड़कियों की जिस तरह से पिटाई की गयी उससे साफ हो गया कि मायावती इन शिक्षा माफियाओं के साथ खड़ी है. ...दामोदर का पानी मटमैला क्यों है?
रानीगंज कोलफील्ड पश्चिम बंगाल और झारखण्ड में फैले कोयलांचल का ही एक हिस्सा है. रानीगंज कोलफील्ड बर्दवान जिले के दो अनुमंडलों आसनसोल और दुर्गापुर में फैला है. इस इलाके में ९० कोईलरी और अन्य खदान परियोजनाएं चल रही हैं. कोयलांचल का ही प्रभाव है कि है इस इलाके में तीन बड़े इस्पात संयत्र काम करते हैं, चितरंजन लोकोमोटिव वर्क्स, डीपीएल और डीटीपीएस के थर्मल पावर प्लांट के अलावा १८ से अधिक स्पंज आयरन, जूट, अल्युमिनियम, सीमेन्ट जैसी उत्पादक ईकाईयां हैं. कोईलरी को छोड़ दें तो उद्योग का विकास पिछले तीन दशक में ही हुआ है. तीन दशक के इस विकास ने आज इलाके के तीस लाख लोगों के जीवन को संकट में डाल दिया है. ...अथ श्री शनि शिंगणापुर कथा
जिस दिन हम शिरडी पहुंचे वह शनिवार था। तय हुआ कि शनि शिंगणापुर के शनिदेव का दर्शन आज ही कर लिया जाए। शनिवार के दिन शनिदेव के दर्शन। शिरडी में टैक्सी वाले चिल्ला रहे थे - शनि शिंगणापुर शिंगणापुर। हर टैक्सी का किराया अलग। 85 रूपए से लेकर 150 रूपए तक। जो ग्राहक जितने में फंस जाए। यह आने-जाने का किराया था। खैर 85 रूपए सवारी पर बात तय हुई।...मुख्तार के खिलाफ खुलकर मैदान में मुन्ना बजरंगी
माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी ने पूर्वांचल के माफिया लीडर मुख्तार अंसारी से बगावत कर दी है. मुन्ना बजरंगी इस आमचुनाव में सीधे मैदान में तो नहीं उतर रहा है लेकिन वह गाजीपुर लोकसभा सीट से अफजाल अंसारी को हराने के लिए सक्रिय हो गया है. अफजार मुख्तार अंसारी का भाई है और वर्तमान समय में गाजीपुर लोकसभा सीट से सांसद. समझा जाता है कि भाजपा विधायक कृष्णानंद राय हत्याकाण्ड के बाद दोनों अपराधियों में तनातनी बढ़ गयी और अब दोनों ही एक दूसरे के खिलाफ हैं. मुन्ना बजरंगी कहता है कि मुख्तार ने सिर्फ उसका इस्तेमाल किया....मधुमास का सरस उत्सव
होली का त्यौहार मनाने के लिए वसंत ऋतु को चुना गया, तो इसके ठोस कारण हैं। ये कारण मुख्यत: बाहर से आते हैं। लेकिन वे प्रभावी तभी होते हैं जब भीतर संचित कोई अद्भुत चीज अंगड़ाई ले कर जाग उठती है। कामना, विचार, हर्ष. विषाद सब कुछ हमारे भीतर ही है। लेकिन जागते वे तब हैं जब बाहर से उन्हें उद्दीपन और आलंबन मिलता है। बाहर और भीतर का विभाजन वास्तविक से ज्यादा कृत्रिम है। तभी तो यह विभाजन अकसर चिटख जाता है। श्वसुर साल भर श्वसुर रहता है, पर होली के दिन वह देवर बन जाता है। (फागुन में ससुर जी देवर लगेंं) इसका मतलब यही है कि उसमें देवरपन हमेशा मौजूद था, पर वह उभरता तब है जब उसे आवश्यक उद्दीपन मिलता है। यह उद्दीपन बहू देती है। इसका मतलब यह भी है कि बहू में भी सनातन नारी साल भर जीवित रहती है, पर बाहर आने के लिए वह उचित मौसम का इंतजार करती है। यह मौसम फागुन के अलावा और क्या हो सकता है?...आखिरकार शराब से हार गये गांधी
आजादी के आंदोलन में गांधी जी को दानस्वरूप घड़िया, कपड़ा, गहना सबकुछ मिलता था. अब गांधी इन सामानों को लेकर क्या करते? वे इन सामानों की नीलामी करते थे. ऐसी ही एक नीलामी गांधी ने दिल्ली में लगाई थी. उस नीलामी में प्रत्यक्षदर्शी लक्ष्मीचंद जैन कहते हैं "गांधी जी वहां नीलामी कर रहे थे. गांधी जी खड़े हुए. घड़ी की बोली लगी १० रूपये. लेकिन बोली छूटी १५ रूपये पर. मैं तो उस समय बच्चा था. कुछ समझ में नहीं आता था. पर आज भी वह दृश्य मेरी आंखों में मौजूद है कि कैसे एक जलसे में गांधी ने अपना बाजार पैदा कर लिया था."...बूढ़े लोगों का बड़ा लोकतंत्र
अगर किसी लोकतंत्र को चलाने के लिए उम्र और अनुभव जरूरी है तो भारत को वास्तव में संसार का सबसे ताकतवर लोकतंत्र होना चाहिए था। लेकिन आप और हम सभी जानते हैं कि अमेरिका आकार में छोटा होने के बावजूद हमारे लोकतांत्रिक मसीहाओं को किस कदर हड़काता रहता है। जिस बराक ओबामा का जन्म होते वक्त मनमोहन सिंह विश्व बैंक में नौकरी कर रहे थे, वह मनमोहन सिंह को समझाता है कि भारत को बांग्लादेश के मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। भारत में युवा नेतृत्व के नाम पर जो पीढ़ी विकसित हुई है उसका स्वागत है लेकिन मिलिंद देवड़ा, जतिन प्रसाद, ज्योतिरादित्य सिंधिया, सचिन पायलट, प्रिया दत्त और सुप्रिया सुले के अलावा दर्जनों नाम हैं जिन्हे फिलहाल युवा कहा जा सकता है लेकिन इन्होंने अपना राजनीति की मुख्य धारा में होना अर्जित नहीं किया हैं। इन्हें लाल कालीन विरासत में मिले हैं और लाल बत्तियां मुआवजे में।...कांग्रेस को १४९ और भाजपा को मिलेगी १३५ सीटें
अरूण नेहरू ऐसे राजनीतिक विश्लेषक रहे हैं जो पूर्वाग्रह से मुक्त होकर राजनीतिक आंकलन करते हैं. अरूण नेहरू का मानना है कि इस आम चुनाव में विभिन्न हिन्दीभाषी राज्यों में पिछड़ने के बाद भी कांग्रेस ही सबसा बड़ा दल होकर उभरेगा जबकि भाजपा दूसरे नंबर की पार्टी बनी रहेगी. जाहिर सी बात है ऐसी परिस्थिति में एक बार फिर राजनीतिक बिसात पर छोटे दलों की गोटियां अहम हो जाएंगी. कौन सा स्थानीय छत्रप किस बड़े दल के साथ जाकर मिलता है आनेवाले लोकसभा और सरकार की शक्ल बहुत कुछ इसी से निर्धारित होगी....एक विफल राष्ट्र की अनर्थकारी दास्तान
पिछले कुछ अर्से से हमारे पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को `विफल राष्ट्र´ या `फेल्ड स्टेट´ कहा जा रहा है। आतंकवादी तत्वों का सरकार, राष्ट्र और समाज पर हावी होना विफल पाकिस्तानी राष्ट्र का लक्षण एवं परिणाम है। पाकिस्तान को विफल राष्ट्र घोषित करने का प्रथम कारण एवं लक्षण उसकी अर्थव्यवस्था की व्यवहार्यता समाप्त होना था।...क्रिकेट पर हमले का लिट्टे कनेक्शन
पाकिस्तान में श्रीलंका के क्रिकेट खिलाड़ियों पर आतंकी हमला क्यों हुआ? मीडिया अब तक दो थ्योरी चला रहा है. एक, कट्टरपंथियों का काम है जो कि शायद क्रिकेट (जो कि मीडिया का वास्तविक प्रेम है) को खत्म करना चाहते हैं और खेल भावना को मारना चाहते हैं. दो, जरदारी सरकार को कमजोर करने के लिए आतंकियों ने विदेशी खिलाड़ियों को निशाना बनाया ताकि अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में जरदारी सरकार की स्थिति कमजोर हो. दोनों ही तर्कों में कोई दम नहीं है. फिर श्रीलंकाई क्रिकेट खिलाड़ियों यह हमला किसने किया और क्यों?...बदहाल और कंगाल पश्चिम बंगाल
औद्योगिक विकास में फिसड्डी, काम का मौका उपलब्ध करवाने में नाकाम, कुल खेती का ४९ प्रतिशत अभी भी केवल भगवान भरोसे, राज्य के लोगों की आय राष्ट्रीय आय के मुकाबले नकारात्मक, स्कूलों से भाग जाने वाले छात्रों का प्रतिशत ७८.३, यहां की राजधानी कोलकाता की हालत पटना, रांची और भुवनेश्वर से भी दयनीय लेकिन हत्या, अपहरण और बलात्कार में देश के औसत से दो-गुना, तीन गुना बढ़ोत्तरी. यह नया बंगाल है जो ३० साल के जनवादी शासन के परिणामस्वरूप अपनी दशा को दुर्दशा में बदला देखकर भी कुछ नहीं कर पा रहा है. ...Author info
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