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क्वात्रोच्ची को क्लीन चिट, क्या मानहानि भी देगी सरकार?
बोफोर्स भी बेताल पच्चीसी की कहानी बन चुका है। बाईस साल हो चुके, पर न दलाली की रकम वापस लौटी, न दलाल हत्थे चढ़ा। अलबत्ता 64 करोड़ की दलाली की जांच में अब तक अमूमन तीन सौ करोड़ खर्च हो चुके हैं। सीबीआई की मेहरबानी से ओतावियो क्वात्रोच्ची लंदन के खाते से रकम लेकर चंपत हो गया, पर मेहरबानी की इंतहा देखिए-क्वात्रोच्ची को क्लीन चिट मिल गई। सीबीआई ने रेड कार्नर नोटिस वापस ले लिया।
मीडिया की महामारी के बीच पत्रकारिता का जनाजा
भारत में प्रेस को संविधान का चौथा खंभा होने का दर्जा हासिल है। प्रेस हमारे यहां आजादी का एक पर्याय भी है। देश जब गुलाम था उस दौर से ही आजादी का सपना देखने वाले लोगों ने प्रेस को साथी बनाया। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को मान देने वाले इस मुल्क में प्रेस को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के माध्यम होने का गौरव हासिल है। कुछ साल पहले जब भारत मे मीडिया का फैशन शुरू नहीं हुआ था उस दौर तक प्रेस एक सम्मानजनक कर्तव्य हुआ करता था। इससे वे लोग जुड़ते थे जो सरोकारों से लबरेज होते थे। कम से कम शुरू शुरू में तो प्रेस से जुड़ने वाले लोगों के मन में अब भी यही होता है। ये बात दीगर है कि अब चमक दमक और ताकत का पर्याय भी प्रेस है, लेकिन पहले प्रेस संजीदा विषय था सरोकारों वाला पेशा था।...गणतंत्र पर हावी गनतंत्र
भारतीय चुनावी व्यवस्था तीन `सी´ यानी करप्शन (भ्रष्टाचार), क्रिमिनल (अपराधी) और कैश (धन) से प्रभावित है। यदि पिछले चुनावों के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह बात साफ हो जाती है। एक सर्वेक्षण के अनुसार 1996 में देशभर में 70 सांसद एवं 100 विधायक ऐसे थे, जिनकी पृष्ठभूमि दागी थी, जबकि 14वीं लोकसभा में 132 सांसद दागी पृष्ठभूमि के हैं, जिन पर मुकदमें चल रहे थे। इसका मतलब यह हुआ कि पिछले 10 वर्षों में इस संख्या में 89.88 प्रतिशत की वृद्धि हुई हैं...चरित्रहीनों और धनकुबेरों की पत्रकारिता
लोकतंत्र के तीन स्तंभों -विधायिका, न्यायपालिका, और कार्यपालिका के समाज व जन विरोधी क्रियाकलापों, उनके भ्रष्टाचार की बात तो हम अक्सर करते हैं, लेकिन मीडिया के भीतर के भ्रष्टाचार, यौन पिपासाओं, और मीडिया के नाम पर दलाली करने वाले कथित पत्रकारों या मीडियाकर्मियों की चर्चा शायद ही कभी होती है। इसका मतलब यह नहीं है कि मीडिया के क्षेत्र में काम करने वाले लोग पाक साफ हैं। वास्तविकता तो यह है कि अगर देश के एक सौ नेताओं ने भ्रष्टाचार के दमपर करोडों-अरबों की नाजायज संपत्ति बनायी है तो देश के एक सौ से ज्यादा पत्रकारों ने भी अपनी औकात से ज्यादा की नाजायज संपत्ति जमा की है।...असली नैनो क्या है?
टाटा नैनो की बुकिंग बद हो गयी. कंपनी को जैसी उम्मीद थी वैसी बुकिंग नहीं आयी. आम आदमी की इस कार की बुकिंग के लिए बैंकों ने वैसा ही व्यवहार किया जैसे आम आदमी के साथ करते आये हैं. फिर भी जुलाई से नैनो की डिलिवरी शुरू हो जाएगी. नैनो कार को मीडिया ने जिस तरह से हाइप दिया क्या वह सही है? क्या नैनो सचमुच वही नैनो है जिसके बारे में मीडिया हमको बता रहा है. नैनो कार परियोजना का विस्तृत जायजा ले रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार देवदत्त....पंजाब के पानी में बारूद
पांच नदियों का द्वाब पंजाब, अब बे-आब हो रहा है। आर्सेनिक के बाद पंजाब के एक बड़े इलाके के भूजल और सतही जल में यूरेनियम पाया गया है। दक्षिण पश्चिम पंजाब क्षेत्र में “सेरेब्रल पाल्सी” से पीड़ित बच्चों के बालों में यूरेनियम के अंश पाये गए है। हाल ही में जर्मनी की एक लैब ने फरीदकोट के एक मंदबुद्धि संस्थान “बाबा फ़रीद केन्द्र” के बच्चों के बालों पर शोध के बाद रिपोर्ट दी है। जर्मनी की माइक्रो ट्रेस मिनेरल लैब की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि शोध किये गए लगभग 150 बच्चों के बालों में 82 से लेकर 87 प्रतिशत तक यूरेनियम पाया गया है। इस खुलासे के बाद गुरुनानक देव विश्वविद्यालय द्वारा एक विशेष वैज्ञानिक जाँच शुरु करने का फ़ैसला किया गया है।...लोकतंत्र का गम, मतदान बहुत कम
23 अप्रैल को लोकसभा के दूसरे चरण के चुनाव संपन्न होने के बाद प्रियंका गांधी पूरी रात नहीं सो पायी। कारण था अमेठी लोकसभा क्षेत्र में कम मदतान की सूचना। प्रियंका गांधी कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी के प्रचार के लिए कई दिनों से अमेठी का ताबड़तोड़ दौरा कर रही थी। जब उन्हें अमेठी लोकसभा क्षेत्र में 40 प्रतिशत मतदान की सूचना मिली तो उनकी नींद उड़ गई। पर अगले दिन उन्हें राहत मिली। आयोग ने आधिकारिक रुप से बताया कि अमेठी में 45 प्रतिशत मतदान हुआ। प्रियंका गांधी इस सूचना के बाद काफी खुश थी। उन्होंने कहा कि अब जान में जान आयी है, वो चैन की नींद लेंगी। उन्हें खुशी इस बात की थी कि अमेठी में पिछले लोकसभा चुनाव से एक प्रतिशत ज्यादा मतदान हुआ।...मां के आंसुओं का जवाब जनता क्यों देगी वरुण ?
भाई वरुण गांधी. आपकी मां के आंसुओं का हिसाब जनता क्यों देगी? क्या ये आंसू करगिल में शहीद हुये कैप्टन सौरव कालिया की मां के हैं? या कैप्टन विक्रम बत्रा की मां रो रही हैं जिनका बेटा करगिल जीत कर शहीद हो गया। इन बहादुरों की मांताओं की आंखों से आंसूं नहीं निकलते। मुम्बई हमले के बाद एनएसजी के मेजर संदीप उन्नीकृष्णन की मां की आंखें याद हैं आपको, वो बहादुर बेटे की मां हैं। आंसू टपका कर ये अपने बेटे के शौर्य को कम नहीं करतीं। ये मांताऐं बेहद खामोशी और दृढ़ता से फिर से ऐसे ही शूरवीर बनाने में जुट जाती हैं जो फिर देश पर कुर्बान हो सकें। ये शौर्य और सहास की प्रतिमायें अपने आंसुओं का हिसाब मांगने चुनावी सभाओं में नहीं जातीं।...दो परिवारों के प्रतिष्ठा की जंग
पंजाब की 13 लोकसभा सीटों पर चुनावी जंग तेज हो गई है। दिलचस्प बात यह है कि यहां पर अन्य राज्यों की तरह जाति मुख्य चुनावी मुद्दा नहीं है। चुनाव मुख्य रुप से पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के बीच लड़ाई के रुप में सिमट गई है। जहां प्रदेश के अधिकतर लोकसभा सीटों पर कांग्रेस की तरफ से अमरिंदर सिंह के चहेते प्रत्याशी अकाली दल को टक्कर दे रहे है वहीं भटिंडा के बीच अमरिंदर सिंह बेटे रणइंदर और प्रकाश सिंह बादल की बहु हरसिमरत के बीच सीधी टक्कर हो रही है। भटिंडा की सीट पर दोनों परिवार की लड़ाई प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गई है और पूरा बादल परिवार यहां पर कैंप किए हुए है। इस बार अमरिंदर सिंह परिवार से दो टिकट मिली है जिसमे पटियाला से अमरिंदर की पत्नी प्रणीत कौर भी शामिल है।...जनता करेगी मेरे भाग्य का फैसला
सन २००५ में बिहार में दो दो विधानसभा चुनाव हुए. मैंने तन-मन से बिहार में परिवर्तन के लिए चुनाव में हिस्सेदारी की. नई सरकार बनी और हम लोगों को यह विश्वास हो गया समाजवाद के झंडे तले पनपी नई पीढ़ी सत्ता में रहकर जनता का ख्याल रखेगी. शुरुआत से ही नयी सरकार के मुखिया ने पार्टी के चिंतक कार्यकर्ता और नेतृत्व को नजरअंदाज करने की रणनीति अपनाई. दलबदलुओं को सरकार में हिस्सेदारी दी गयी. पार्टी के कर्मठ नेताओं का अपमान किया गया....कौन वापस लाए काला धन?
भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी स्विस बैंकों में जमा जिस काले धन को मुद्दा बना रहे हैं उस संबंध में वर्ष 2006 में वैश्विक वित्त पर एक अध्ययन रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। उसी रिपोर्ट में यह आंकड़ा प्रस्तुत किया गया था कि विकासशील देशों के लगभग 47 लाख करोड़ रुपए से लेकर 51 लाख करोड़ रुपए तक के काला धन स्विस बैंक में जमा है। एक अनुमान के अनुसार यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 75 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि भारत का हिस्सा इसमें सबसे ज्यादा होगा।...आम आदमी का एजेण्डा
देश के मतदाताओं की तरफ से मैं देश के नेताओं के सम्मुख केवल एक मांग रखना चाहता हूं कि ऐसे उद्योगों पर टैक्स की दर में भारी वृद्धि की जाए जिनसे आम आदमी का रोजगार प्रभावित होता हो। एक-दो उदाहरणों से बात स्पष्ट हो जाएगी।...फिर भी अंग्रेजी हैं हम
हम अंग्रेजी को ही खाते, पीते, ओढ़ते, बिछाते और छाती पर बिठाते हैं तथा उसी की सांस लेते हैं। जो अंग्रेजी न जाने, भारत में उसकी इज्जत क्या है? उसे कोई इंसान तक मानने को तैयार नहीं। क्या किसी विकसित और शक्तिशाली देश में ऐसी कल्पना भी की जा सकती है? यदि वहां ऐसा होता तो खून की नदियां बह जातीं। दुनिया का कौन सा ऐसा शक्तिशाली देश है, जहां बच्चों को किसी विदेशी भाषा के माध्यम से शिक्षा दी जाती है?...जूता मारो आंदोलन के जनक मछिन्द्रनाथ
दिल्ली के जंतर-मंतर पर अब मछिन्द्र नाथ का स्थाई बसेरा है. हालांकि वे यहां आये थे अपनी व्यथा दिल्ली को सुनाने लेकिन अब वे अपनी व्यथा से आगे निकलकर समाज की व्यथा पर व्यापक सुनवाई करने का काम भी करते हैं. मछिन्द्र नाथ जब जंतर-मंतर आये थे तो एक सामान्य गृहस्थ थे जो महाराष्ट्र के भ्रष्ट नौकरशाही से लड़ने की मंशा रखते थे. लेकिन अब वे देश के प्रधानमंत्री से लेकर गृहमंत्री तक से लड़ रहे हैं. अपने लिए संघर्ष करनेवाले मछिन्द्रनाथ अब अपने जूता मारो आंदोलन के जरिए लोगों के लिए संघर्ष कर रहे हैं. ...खेत और खुदरा कारोबार कंपनियों के हवाले
कृषि और खुदरा व्यापार दुनिया का सबसे बड़ा उद्योग है. लेकिन इधर कुछ दशकों में दुनिया की कुछ बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने बड़ी रणनीतिक सोच समझ के साथ कृषि और खुदरा दोनों पर अपना एकाधिकार स्थापित करने की कोशिश की है. पश्चिम के जिन देशों में इन कंपनियों का जन्म हुआ वहां लगभग पूरे व्यापार को अपने हाथ में लेने के बाद ये कंपनियां अब भारत में अपना पैर पसार रही हैं. ...मुटभेड़ में मारा गया बदमाश अब बसपा का उम्मीदवार है
17 अक्टूबर 1998 को पूर्वी उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर भदोही रोड पर पुलिस ने एक एनकाउण्टर किया था. पुलिस का दावा था कि उस एनकाउण्टर में उसने 50 हजार के ईनामी बदमाश धनंजय सिंह को मार गिराया है. डायरेक्टर जनरल आफ पुलिस ने पुलिस को इस काम के लिए खूब शाबाशी दी, लेकिन यह क्या 10 साल बाद वह मारा गया बदमाश लौट आया है. और केवल लौटा ही नहीं बसपा के टिकट पर जौनपुर से लोकसभा का चुनाव भी लड़ रहा है. ...माता न हो कुमाता
वरुण गांधी की गिरफ्तारी के बाद मायावती और मेनका गांधी के वाग्युद्ध के बारे में पढ़ने के बाद से ही मैथिलीशरण गुप्त के प्रबंध काव्य 'साकेत' की यह पंक्ति बार-बार याद आ रही है -- माता न कुमाता पुत्र कुपुत्र भले ही। यह पंक्ति कैकेयी ने राम को अयोध्या वापस लौट आने की मनुहार करते हुए कही थी। कैकेयी भी उन अयोध्या वासियों में थीं जो राम के वन गमन को रोकने के लिए उनके पीछे-पीछे गए थे। कैकेयी ने आत्मभत्र्सना करते हुए कहा कि 'माता न कुमाता' की मान्यता सदा से ही चली आई है, पर मेरे मामले में उलटा हो गया है।...प्रबंधन संस्थानों में लूट का प्रबंधन
भारत में 70 करोड़ लोगों की आमदनी प्रतिदिन 20 रूपये से भी कम है. लेकिन अपने देश के आईआईएम ने अपने लिए जिस सुरक्षित गढ़ बना लिए हैं उसका भरपूर फायजा उठा रहे हैं. मनमानी फीस वृद्धि और मनमानी सैलेरी का ऐसा दुष्चक्र चला रखा है कि उनका शेष देश से कोई संबंध ही नहीं रहा है. आईआईएम जिस तरह का प्रबंधन पढ़ा रहा है वह एक संगठित लूट और ठगी है. आखिर आईआईएम भारत के ही प्रबंधन संस्थान हैं या अमेरिका के? अगर भारत के हैं तो वे अमेरिका की तर्ज पर काम क्यों कर रहे हैं?...थाना रामजन्मभूमि
ग्यारह साल बाद जारी अपने घोषणापत्र में भाजपा ने राम को फिर शामिल कर लिया है. भाजपा के आडवाणी कह रहे हैं कि रामराज्य ही सर्वोत्तम शासन प्रणाली है तो घोषणापत्र चिल्ला रहा है कि राम मंदिर वहीं बनाएंगे, बस एक बार फिर सत्ता में बैठा दीजिए. भाजपा के राम की राम जाने लेकिन हम पहुंचे अयोध्या रामलला के दर्शन करने. राम की ऐसी दुर्दशा उस वक्त भी नहीं थी जब वे बाबर की बनवाई मस्जिद में बैठे थे, कम से कम उस समय उनके सिर पर एक छत तो थी. ...भविष्य की घोषणाओं पर अतीत का साया
भाजपा देश का प्रमुख राजनीतिक दल है और पहली ही नजर में विश्वास किया जाना चाहिए कि अपने चुनावी घोषणा पत्र के प्रति वह पूरी तरह गम्भीर, जिम्मेदार और ईमानदार होगी ही। किन्तु इतिहास का पन्ना बन चुका अतीत अत्यन्त निर्मम होता है और अपनी निर्ममता को धारदार बनाए रखते हुए, कभी पीछा नहीं छोड़ता। सो, भाजपा के इस चुनावी घोषणा पत्र पर उसके अतीत के आचरण की छाया मँडराएगी ही।...गल्ली के नेता दिल्ली का नेतृत्व
हाल में ही लालकृष्ण आडवाणी ने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की तर्ज पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को यह प्रस्ताव दिया कि वे देश के सामने टीवी पर सीधी बहस में शामिल हों. आडवाणी का यह प्रस्ताव उनकी इस पीड़ा से पैदा होता है जिसका समर्थक कई दक्षिणपंथी दलों सालों से करते आ रहे हैं. वे कहते हैं कि भारत में बहुदलीय शासन प्रणाली की जगह द्विदलीय शासन प्रणाली लागू होनी चाहिए. यानी भारत को भी अमेरिका की तर्ज पर संसदीय गणतंत्र की बजाय राष्ट्रपति प्रणाली कायम करनी चाहिए जहां कोई दल नहीं बल्कि नेता देश का प्रतिनिधित्व करता है. ...Author info
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