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साथी की शोकसभा के लिए भी संपादक के पास समय नहीं
29 अगस्त 2010. भागलपुर में एक पत्रकार के लिए शोकसभा का आयोजन. 29 जून को ट्रेन से गिरकर पत्रकार की मौत हो गयी थी. शोकसभा का आयोजन थोड़ी देर से किया गया था लेकिन किया गया. लेकिन खुद अखबार के संपादक ही शोकसभा में नहीं आये और बहाना बनाया कि वे मीटिंग में हैं. मीटिंग में तो संपादक महोदय नहीं आये, लेकिन आश्चर्य का ठिकाना तब नहीं रहा जब अगले अखबार ने अपने ही दिवंगत साथी की शोकसभा को एक कालम की खबर का भी दर्जा नहीं दिया.
स्टेनगनाय नमः, टेलीविजनाय स्वाहा! (हवन)
भारत में यज्ञ का महत्व क्या है और हम यज्ञ क्यों करते हैं इसकी विधिवत जानकारी हमें भले ही न हो लेकि यज्ञ को लेकर भारत में भ्रांतियां बहुत हैं. स्वामी श्री अड़गड़ानंद वर्तमान यज्ञ व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं. उनके सवाल तार्किक और सटीक हैं जिसके बारे में हिन्दू समाज को निश्चित रूप से गंभीरता से विचार करना होगा. यज्ञ पर स्वामी जी के लेखन को दो किश्तों में हम यहां प्रस्तुत कर रहे हैं....भगवा पर हमारा भी दावा- दिग्विजय सिंह
कांग्रेसी नेता और केन्द्रीय गृहमंत्री पी चिदम्बरम ने भगवा आतंकवाद को बढ़ने की बात क्या कही, भाजपा से अधिक घमासान कांग्रेस में शुरू हो गया. पहले कांग्रेस के प्रवक्ता जनार्दन द्विवेदी ने भगवा को आतंक से जोड़ने को खारिज किया वहीं अब दिग्विजय सिंह ने कहा है कि भगवा रंग पर हम सबका है इस पर किसी खास राजनीतिक दल का दावा नहीं हो सकता. ...क्षय रोग का क्षय करने आगे आये पत्रकार
भारत में प्रतिवर्ष २० लाख लोग टीबी के मरीज बनते हैं एक अनुमान के अनुसार प्रत्येक ३ मिनट में २ लोगो कि मौत हो जाती है ऐसी स्थिति में मीडिया का दायित्व है कि सामाजिक सरोकारों से जुड़े हुए इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सार्थक रूप से ध्यान दे। इस बीमारी के जीवाणु भारत में ४० प्रतिशत लोगो में किसी न किसी रूप में हैं जिनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम है उनमे यह सक्रिय होकर जानलेवा बन जाते हैं। अतः सरकार द्वारा पोषित डॉट्स का समुचित रूप से क्रियान्वयन आवश्यक है। उपरोक्त निष्कर्ष इंडियन मीडिया सेंटर फॉर जर्नलिस्ट्स, लखनऊ द्वारा टीबी उन्मूलन और मीडिया कि भूमिका विषयक गोष्ठी में निकला।...विकीलीक्स-विकीलीक्स खेल रहे हैं मीडिया दिग्गज
दुनिया भर को सच्चाई, ईमानदार और दायित्वबोध का पाठ पढ़ाने वाले मीडिया हाउसों की सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि अपनी बारी आने पर वे नैतिकता को बैकफुट पर रख देते हैं. नेता या अफसर ने उनके हितों को नुकसान पहुंचा दिया तो पीछे पड़ जाते हैं. वह दौर अब काफी पीछे छूट गया है जब प्रतिद्वंद्विता बैकफुट पर और नैतिकता फ्रंट फुट पर हुआ करती थी. अब तो मीडिया दिग्गज प्रतिद्वंद्वी हाउसों में चोरी करवा रहे हैं और डाके डलवा रहे हैं. जी हां, रांची में चल रहे मीडिया वार में एक दूसरे कर्मचारियों पर डाका डालना और प्रतिद्वंद्वी का अखबार न बिकने देने के लिये हॉकरों को अपने कब्जे में लेना तो आम बात है....कलमाड़ी को काला करने में 'टाइम्स ग्रुप' का हाथ
दिल्ली से प्रकाशित एक पाक्षिक पत्रिका ने दावा किया है कि टाइम्स आफ इंडिया समूह ने कामनवेल्थ गेम्स में सुरेश कलमाड़ी के कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ एक योजना के तहत अभियान चलाया. प्रथम प्रवक्ता नामक इस हिन्दी पाक्षिक ने "सौदा नहीं पटा तो अभियान" नामक कवर स्टोरी प्रकाशित की है जिसके अनुसार पिछले साल ही बाकायदा पत्र लिखकर टाइम्स समूह ने कामनवेल्थ गेम्स आर्गेनाइजिंग कमेटी से एक सौदे का प्रस्ताव किया था, जब वह सौदा नहीं पटा तो समूह ने सुरेश कलमाड़ी पर हल्ला बोल दिया. प्रथम प्रवक्ता की स्टोरी हम प्रकाशित कर रहे हैं- संपादक...परमाणु प्रतिघात विधेयक पास
लोकसभा में नागरिक परमाणु प्रतिघात विधेयक पास हो गया. पांच घण्टे चली औपचारिक बहस के बाद सरकार ने विपक्षी दलों के सुझावों को कमतर करके मानते हुए लोकसभा में सहमति की मुहर लगवा ली. सरकार ने विधेयक में कुछ कास्टमेटिक बदलाव किये हैं जो िदखावे के दांत के अलावा कभी कुछ और साबित नहीं होगें. ...रांची में पूंजी बनाम पत्रकारिता की जंग
रांची में 22 अगस्त से मीडिया वार शुरू हो चुका है. खोजी खबरें, जनसरोकार और मुद्दे की बात पर आधारित पत्रकारिता करने के लिये मशहूर अखबार समूह प्रभात खबर के इस गढ़ में हाई-लाइफ(पेज-3 पत्रकारिता), बाजारवाद और सनसनी परोसने वाला मीडिया समूह दैनिक भास्कर ने दस्तक दे दिया है....सुतनु का संपादकीय संघवी ने चुरा लिया
बिजनेस एंड इकोनॉमी के पिछले अंक(20 अगस्त-02 सितंबर) में प्लानमैन मीडिया के ग्रुप मैनेजिंग एडिटर सुतनु गुरु ने सांसदों के वेतन बढ़ाए जाने पर चल रही खींचतान पर संपादकीय लिखा.अपने लेख में सुतनु गुरु ने भारत के सांसदों और दुनिया के कई दूसरे देशों के सांसदों को मिलने वाली तनख्वाह और दूसरी सहूलियतों का एक तुलनात्मक लेखा-जोखा दिया था और यह भी लिखा कि हमारे सांसदों के लिए लोगों के मन में ऐसी राय बन गई है कि वे सांसदों की वाजिब दिक्कतों को भी तवज्जो नहीं देते....दैनिक जागरण का सर्कुलेशन गिरा, दर्जा बरकरार
इंडियन रीडरशिप सर्वें 2010 की दूसरी तिमाही के नतीजों की घोषणा हो गयी है। इस सर्वे में टॉप10 अखबारों ने अपना स्थान बरकरार रखा है। दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर और हिन्दुस्तान टॉप थ्री पर काबिज है जबकि मलयालम मनोरमा और अमर उजाला चौथे और पांचवें नंबर पर है। इस दौरान अखबारों की प्रसार संख्या में परिवर्तन होने के बावजूद इनकी रैंकिंग में कोई बदलाव नहीं हुआ।...135 किलोमीटर तक अविरल रहेगी गंगा की धारा
आखिरकार जीडी का अनशन सफल हुआ. गोमुख से उत्तरकाशी तक गंगा की धारा अब अविरल रहेगी और इस पर किसी प्रकार की बिजली परियोजना स्थापित नहीं की जा सकेगी. सरकार ने लोहारी नागपाला पनबिजली परियोजना पर काम को पूरी तरह से रोक दिया है. इसके साथ ही गोमुख से उत्तरकाशी तक 135 किलोमीटर के क्षेत्र को अति संवेदनशील घोषित किया गया है. ...कामनवेल्थ गेम्स के दौरान देश छोड़ देगे मणि
कामनवेल्थ खेलों की आलोचना करनेवाले मणिशंकर अय्यर का कहना है कि वे कामनवेल्थ खेलों के दौरान देश में ही नहीं रहेंगे. पलक्कड़ में शशि थरूर की शादी में पहुंचे मणिशंकर अय्यर ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि “खेल के दौरान वे देश में ही नहीं रहेंगे. अक्टूबर में जब खेल होंगे मैं यहां नहीं रहूंगा. मैं इस नर्क का साक्षी नहीं बनना चाहता.”...पलक्कड़ में पकड़ लिया सुनंदा का हाथ
सुनंदा पुष्कर शशि थरूर की हो गयीं. केरल के पलक्कड़ में एक छोटे से पारिवारिक आयोजन में शशि थरूर ने विधिवत मलयाली परंपरा के तहत सुनंदा पुष्कर को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया. आयोजन में केवल शशि थरूर के पारिवारिक सदस्य और मित्र ही शामिल थे. ...भारत ने कहा तिब्बत चीन का हिस्सा
भारत की चीन नीति में बड़ा बदलाव लाते हुए भारत सरकार ने कहा है कि तिब्बत चीन का अभिन्न हिस्सा है और दलाई लामा भारत में सम्मानित अतिथि हैं. विदेश मंत्री एस एम कृष्णा ने नई दिल्ली में जापानी विदेश मंत्री के साथ एक प्रेस कांफ्रेस में बयान देते हुए कहा है कि भारत तिब्बत को चीन का अभिन्न हिस्सा मानता है. ...फिर मर्द के हाथ में कपूर खानदान की कमान
बालीवुड की सुपर फैमिली कपूर खानदान की बागडोर पुनः एक मर्द के हांथो में आती दिख रही है.पिछले दो दशको से महिलाओं के भरोसे अपने अस्तित्व को बचाए इस खानदान को रणवीर कपूर के रूप में बहुत बड़ा संकट मोचन मिला है.वर्तमान में बालीवुड के सबसे उभरते सितारे के रूप में रणवीर ने जो जगह बनायीं है वह काबिले तारीफ है....जनता के सामूहिक नरसंहार की योजना में सभी दल साथ हैं
इसे उदाहरण मानिए अपने लोकतंत्र का. साठ साल के गणतंत्र का. संसद में नागरिक परमाणु सुरक्षा विधेयक प्रस्तावित है. सरकार की जिम्मेदारी है कि वह किसी भी कीमत पर इस विधेयक पर संसद की मुहर लगवाए ताकि परमाणु कंपनियां परमाणु बिजलीघर बनाने की शुरूआत कर सकें. आपको याद हो, तो याद करिए पिछली यूपीए सरकार ने परमाणु विधेयक को पारित करवाने के लिए किस तरह से अमर सिह का इस्तेमाल करके समाजवाद को पूंजीवाद का पिछलग्गू बना दिया था. लेकिन बात अटकी हुई है. ...विस्थापित हुए तो बिखर जाएंगे ख्वाब
अब खबर आई है कि अफ्रीकी चीते को बसाने के लिए मध्यप्रदेश के नौरादेही अभयारण्य से २३ गांवों को उजाड़े जाने की पूरी तैयारी हो गई है। हालांकि यह कोई पहला गांव नहीं होगा जब जंगली जानवरों को बचाने के नाम पर इंसानों का घर उजाड़ा जाएगा। सरकार और उनके अधिकारियों का यह तर्क है कि जानवरों को बचाना जरूरी है। लेकिन जब उनसे पूछा जाता है कि किसकी कीमत पर तो सामने एक लंबी खामोशी छा जाती है। ...शहनवाज के इफ्तार में मनमोहन मुलायम
भारतीय जनता पार्टी के नेता शहनवाज हुसैन ने बुधवार को दिल्ली स्थित अपने आवास पर इफ्तार का आयोजन किया था. शहनवाज की इस इफ्तार पार्टी में भाजपा से अधिक कांग्रेस के नेताओं ने शिरकत की. शिरकत करनेवालों में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी शामिल थे. ...मराठी मार्मिक में हिन्दी
बाल ठाकरे की मराठी राजनीति को महाराष्ट्र में जिस एक पत्रिका ने परचम लहराया उसका नाम है मार्मिक. मार्मिक ही वह कार्टून पत्रिका है जो बाल ठाकरे की शुरूआती राजीनीति का आधार बना. धुर महाराष्ट्रवाद को समर्पित इस मराठी पत्रिका के पचास साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि पत्रिका ने हिन्दी में आलेख प्रकाशित करके बाल ठाकरे की राजनीति को नयी दिशा में जाने का संकेत दिया है. ...हिन्दुत्व क्या है?
दस अगस्त को विस्फोट पर स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी द्वारा रचित पुस्तक ‘शंका समाधान’ से ‘गाय धर्म नहीं जानवर है’ प्रकाशित हुई थी, जिस पर विस्फोट के सुधी पाठकों ने अपना-अपना उन्मुक्त विचार व्यक्त किया है। इस लेख पर कुछ पाठकों ने स्वामी श्री अड़गड़ानन्द जी महाराज जी को तमाम तरह से लांक्षित कर उन्हें हिन्दू एवं हिन्दुत्व विरोधी करार देते हुए हिन्दुत्व पर अपने-अपने विचार व्यक्त किये हैं। स्वामी अड़गड़ानन्द जी महाराज के हिन्दुत्व की विचार धारा के प्रति तो हिन्दू एवं हिन्दुत्व के प्रति स्वामी अड़गड़ानन्द जी के विचार (अनछुये प्रश्न के माध्यम से) ‘हिन्दुत्व क्या है?’ को प्रस्तुत कर रहा हूं. प्रस्तुति- एस ए अस्थाना...हिन्दुत्व क्या है-२
शोध संस्थान वालों ने तर्क दिया है कि दक्षिण भारत के लोग अपने को आर्य नहीं मानते ‘द्रविड़’ मानते हैं, हिन्दू मानते हैं। आर्य-दर्शन का प्रचार करने से उत्तर-दक्षिण भारतीयों में घृणा पनपेगी। राष्ट्रीय-गान आपको स्मरण ही होगा। पंजाब, सिन्धु, गुजरात, मराठा, द्रविड़, उत्कल, बंग। हिमाचल..............। ये भू-भाग के नाम हैं। एक श्लोक निरन्तर पढ़ने में आता है-...कलमाड़ी की करतूत को सहारा प्रणाम
प्रिय सुब्रत राय साहब, सादर प्रणाम। आपके द्वारा समाचार पत्रों मे कामन वेल्थ गेम 2010 के लिए आम जनता के नाम की गयी मार्मिक अपील हमने पढी है। आपकी यह मार्मिक अपील उस समय समाचार पत्रों मे प्रकाशित हुई है जब चारों ओर से कामन वेल्थ गेम आयोजन समिति पर भ्र्रष्टाचार और बेइमानी के सीधे आरोप लगे है।...चर्च में जलाई जाएगी कुरान
खबर है कि फ्लोरिडा के एक चर्च में ११ सितंबर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुरान को जलाने (इंटरनेशनल बर्न ए कुरान डे) के दिवस के तौर पर मनाया जाएगा। न्यूयॉर्क के समाचार पत्रों के अनुसार ११ सिंतबर २००१ को हुए आतंकी हमले की घटना की नौवीं बरसी पर चर्च ने यह कदम उठाने का फै सला लिया है। फ्लोरिडा के 'द डोव वर्ल्ड आउटरीच सेंटर' में ९/११ की बरसी पर एक शोक सभा आयोजित की जाएगी। जिसके तहत इस्लाम को कपटी और बुरे लोगों का धर्म बताकर कुरान को जलाया जाएगा।...राष्ट्रमंडल खेलों के बहाने होगी लंपटों की नारी 'पूजा'
इन दिनों एक खबर जोरशोर से उछाली जा रही है कि राष्ट्रमण्डल खेलों के आयोजन के दौरान भारत सरकार की मंजूरी से या भारत सरकार की ओर से या सरकार की मौन सहमति से हजारों 'सुरक्षित' सेक्स वर्कर राजधानी नयी दिल्ली में आने को तैयार हैं। कहा जा रहा है, कि यह न मात्र हमारी स्वर्णिम और नारी की पूजा करने वाली संस्कृति को नष्ट कर देने वाली पश्चिमी जगत की चाल है, बल्कि इससे ऐड्स के तेजी से फैलने की भी भारी आशंका है। इससे देश का चरित्र भी नष्ट होना तय है।...जरूरी है जाति की जनगणना
जाति आधारित जनगणना आखिरी बार 1931 में हुई थी। 1941 में सरकार का पूरा ध्यान दूसरे विश्व युद्ध पर था जिसके चलते जनगणना नहीं हो पाई। आजादी के बाद जब 1951 में पहली जनगणना शुरू हुई तो जाति का मसला उठाया गया। तत्कालीन गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने कहा कि जाति आधारित जनगणना से सामाजिक ताना-बाना बिखर जाएगा। उन्होंने इसे राष्ट्रभंजक मांग बताते हुए अस्वीकार कर दिया था।...गोरक्षा सनातन धर्म है, किन्तु पशु गाय धर्म नहीं
आये दिन ‘गो-वध बन्द हो’ का नारा लगता है। धर्माचार्यों के अनशन और लाखों रूपये के चन्दे इसी के नाम पर होते हैं। इन सबका परिणाम केवल इतना निकला है कि यदि सन् 1942 में 17,000 गायें नित्य दिन कटती थीं तो आज उनकी संख्या 50,000 तक पहुंच चुकी है। विचारणीय है कि क्या गाय हमारा धर्म है ?क्या इसके समर्थन में हमारे पूर्वजों ने वेद, गीता और रामचरितमानस-जैसे आर्षग्रन्थों में कुछ कहा है ? यदि नहीं कहा तो यह एक धोखा है। इससे हम सबको सतर्क हो जाना चाहिए। ...औरत होना, घुटकर मरना.....और नहीं, अब और नहीं!
पुरुष और स्त्रियों की मानसिकता में बहुत अंतर होता है ! पुरुष अपनी भड़ास को औरतो पर चिल्ला कर निकाल लेता है! पर एक लड़की अपनी सारी भड़ास अपने अन्तःकरण में समा लेती है, और अग्नि की तरह जलती रहती है! हो सकता है सारे लोग इस विचार से इतफ़ाक रखते हो। पर यदि यह मत गलत होता तो आज के परिवेश में महिला आत्महत्या दर निरन्तर नहीं बढ़ता। आंकड़ों का सत्य कहता है महिला आत्महत्या दर पुरषों की अपेक्षा 10 गुना अधिक है।...सुविधावाद की पगडंडी के पत्रकार अंबिकानंद सहाय
आज़ाद न्यूज़ के न्यूज़ डायरेक्टर अम्बिकानंद सहाय को कुछ माह पहले लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया है। उनका नाम देखते ही पुरस्कार की चयन प्रक्रिया और उसके “मैनेज्ड” होने को लेकर मन शंकाओं से भर गया था। चेला संस्कृति और सुविधावाद के प्रतिनिधि पत्रकार अंबिकानंद सहाय को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड दिए जाने ने इस पुरस्कार की गरिमा और उसके कद को कम किया है। खेद की बात है कि मीडिया फेडरेशन ऑफ इंडिया को इतने बड़े देश में इस पुरस्कार के लिए अंबिकानंद सहाय से बेहतर नाम नहीं मिल सका।...Author info
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