आलोक तोमर
जॉर्ज साहब, आप रिटायर क्यों नहीं होते ?
दो दिन पहले जॉर्ज फर्नाडींज का फोन आया था। पहली बात जो ध्यान में आई वह यह कि जॉर्ज अब दोस्त या भाई कह कर नहीं, बंधु कह कर बात कर रहे हैं। जाहिर है कि उनका पर्याप्त भगवाकरण हो चुका है। जॉर्ज बहुत थकी हुई आवाज में बोल रहे थे और उन्होंने कुल मिला कर जो कहा उसका सार यह है कि शरद यादव और नीतिश कुमार उनकी उम्र का फायदा उठा कर उन्हें नष्ट करने में तुले हैं और मैं पत्रकार के नाते उनकी मदद कर रहा हूं।
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