अनिल रघुराज
चाओ माओ के बाद बामा ओबामा
सच यही है कि सारी दुनिया के लोग अंदर ही अंदर बराक को अपना नेता मानने लगे हैं। कहने का मौका मिले तो वे कह भी सकते हैं कि अमेरिका का राष्ट्रपति हमारा राष्ट्रपति है। इसी बात पर मुझे साठ के दशक के आखिरी सालों की सुनी-सुनाई बात याद आ गई, जब देश के लाखों तो नहीं, लेकिन हज़ारों नौजवानों ने नारा दिया था – चीन के चेयरमैन हमारे चेयरमैन। लेकिन सत्तर और अस्सी का दशक आते-आते यह नारा उलाहना और हिकारत का साधन बन गया। हिंदू राष्ट्रवाद के चोंगे में सतरंगी राष्ट्र की कंबल परेड करनेवाले स्वयं-सेवक जवाब मांगने लगे – चाओ माओ कहते तो भारत में क्यों रहते हो। लेकिन वही लोग आज ओबामा को अपना नेता माननेवालों से हिकारत की इस जुबान में बात नहीं कर सकते।
शेयर बाजार के नक्शे से मिट रहे हैं छोटे शहर
देश के शेयर बाजार के नक्शे से छोटे शहर लगातार गायब हो रहे हैं। पूंजी बाजार नियंत्रक संस्था सेबी की ताजा बुलेटिन के मुताबिक अभी तक निवेश करनेवाले देश के प्रमुख 20 शहरों में से चार को छोड़कर बाकी शहरों में बीएसई और एनएसई में सूचीबद्ध शेयरों के कैश सेगमेंट में नाममात्र के सौदे हो रहे हैं।...Author info
