अनुपम मिश्र
मरूभूमि का भाग्यवान समाज
समाज कैसे चलता है, वह अपने सारे सदस्यों को कैसे संगठित करता है, कैसे उनका शिक्षण प्रशिक्षण करता है, उन सबका प्रयोग वह कैसी कुशलता से करता है, उस समाज के एक सदस्य के रूप में मैं भी पिछले तीस साल से देख समझ रहा हूं. वह कितनी लंबी योजना बनाकर काम करता है उसे भी देखने समझने का मौका मिला है. समाज का भूतकाल, वर्तमान और भविष्य पीढ़ी-दर-पीढ़ी जुड़ता रहे, सधता रहे, संभला रहे और छीजने के बदले संवरता रहे इस सब का विराट दर्शन मुझे विशाल पसरे रेगिस्तान में, मरूप्रदेश में मिला और आज भी मिलता चला जा रहा है.
Author info
