अर्जुन शर्मा
टाईम बम की टिक टिक पर टिका पंजाब
मई में रविदासी समुदाय से जुड़े संत रामानंद की हत्या के बाद पंजाब में जिस प्रकार रविदासी समाज के लोगों ने जम कर उत्पात मचाया व तीन दिन तक आगजनी और तोड़फोड़ का उग्र प्रर्दशन किया उसके चलते वे डेरे भी लामबंद होने शुरू हो गए हैं जो सिखों में नापसंदगी के कारक बन चुके हैं, चूंकि पंजाब सरकार की भूमिका भी उस उग्र प्रदर्शन के सामने घुटने टेकने वाली थी इसलिए कई डेरे सामूहिक प्रदर्शन के तिलिस्म को कैश करने की भूमिका निभाने की तैयारी में हैं। पंजाब में सिखी के समक्ष जो संकट इस समय आया दिख रहा है वो पहले की कई परीक्षाओं पर भारी पड़ता दिख रहा है जिसका खमियाजा पंजाब को ही भुगतना होगा।
“नाना, क्या तुम सचमुच एक औरतखोर हो?”
“ अपनी ही आंखों की गहराई में देख कर अपने नंगे सच पर नाराजगी हो जाती है। अपने बारे में दिखता ये नंगा सच भद्दा भी हो सकता है। ” जाने माने पत्रकार व इतिहासकार सरदार खुशवंत सिंह की चुनिंदा कृतियों के रोहिनी सिंह द्वारा किए गए पांचवें संकलन में उपर लिखी पंक्तियां खुशवंत सिंह जी ने अपनी तरफ से प्रस्तावना के रुप में लिखी हैं। और इसके बाद इस पुस्तक के पहले चैप्टर “ अपने बारे ” का पहला वाक्य खुशवंत सिंह क्या लिखते हैं, जरा पढ़िए, “ नाना, क्या तुम सचमुच एक औरतखोर हो? ” एक सुबह मेरी सोलह साल की दोहती ने पूछा, मेरी पत्नी (उसकी नानी) व मेरी बेटी (उसकी मां) वहां हाजिर थीं।...Author info
