अर्जुन शर्मा
भारत तो आजाद है हम आजाद कब कहलाएंगे?
यह 15 अगस्त हमें आजादी के 63वें वर्ष के द्वार पर ले आयी है। आजादी के उपरांत इतने लंबे वर्षों के सफर के बाद निसंदेह भारत की तस्वीर बदली है। पिछले दस साल से तो विकास की गति का भी अहसास किया जा रहा है व तरक्की की चमक दिखने भी लगी है। इसके साथ हमने बहुत कुछ खोया भी है। समाज का विभाजन। जाति-धर्म में बंटा हुआ भारतीय समाज। पिछड़ो व दलितों के उत्थान के लिए बने कानून व नियम निसंदेह बहुत पूजनीय हैं जिनके माध्यम से समाज के दबे हुए वर्गों को बराबरी का हक दिलवाने का माद्दा भी है पर क्या उनका ज्यादातर इस्तेमाल दलितों व पिछड़ों के नाम पर राजनीति करने वालों द्वारा हाईजैक नहीं हो गया? ऐसा दिखता तो है।
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