आशीष कुमार
सिकरिया की 'शांति' यात्रा
आज सिकरिया में कोई अपने अतीत को याद नहीं करना चाहता। नक्सल हिंसा वहां के लिए बीते समय की बात हो चुकी है। `लाल मिट्टी´ जो कभी जहानाबाद वालों के लिए आतंक का पर्याय था, जिसकी गिनती लोग-बाग बाथे, सेनारी, मियांपुर, बढ़ैता, कंसारा, दोहिया, पारसबीघा, पेरियारी, चौरम, झुनाठी (करपी थाना), बारा, शंकरबीघा जैसे नरसंहार पीड़ित इलाकों में ही करते थे। पर आज `लाल मिट्टी´ का अर्थ पूरी तरह बदल गया है, अब यह नाम लोगों को आतंकित नहीं करता, बल्कि प्रगति के लिए प्रेरित करता है।
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