बजरंग मुनि
भारत न दारुल इस्लाम होगा न ही इसे हिन्दू राष्ट्र होने दें
इस्लाम किसी भी आधार पर न धर्म है न समाज व्यवस्था। इस्लाम अपने प्रारंभ से ही संगठन रहा है।सूफी सन्तों ने इस्लाम को धर्म की दिशा में प्रेरित किया किन्तु कालान्तर में वह दिशा इस्लाम के इतिहास में दफन हो गईं। अब उसके अवशेष ही बचे हैं अन्यथा इस्लाम एक संगठन के रूप में ही विस्तार पा रहा हैं, जबकि हिन्दुत्व कभी न धर्म रहा न संगठन। हिन्दुत्व या तो व्यक्ति के व्यक्तिगत आचरण से जुड़ा रहा या समाज व्यवस्था सें। इस्लाम और हिन्दुत्व में यह स्पष्ट अन्तर है कि इस्लाम ने अपने संगठन को धर्म घोषित कर दिया तथा अपने (अ) धर्म के ही नियंत्रण में राज्य को भी कर लिया जबकि हिन्दुत्व समाज व्यवस्था ने धर्म को समाज से अलग रखा। राज्य तो उसका था ही नहीं।
मर रहा है समाजवाद
विश्व साम्यवाद ने बंदूक के माध्यम से पूंजीवाद को परास्त करने की योजना बनाई थी और समाजवाद ने प्रचार को आधार बनाकर। दोनो का लक्ष्य था सत्ता प्राप्ति, टकराव का केंद्र था पूंजीवाद किन्तु टकराव के मार्ग भिन्न थे। साम्यवाद का मार्ग हिंसक था और समाजवाद का अहिंसक। किन्तु न दोनों के लक्ष्य में कोई भेद था न टकराव के केन्द्र में।...Author info
