बालेन्दु दाधीच
हिन्दी के विकास की बाधा दौड़
जिस तरह देश के छोटे से छोटे गांव कस्बे में अंग्रेजी सिखाने वाले विद्यालय खुल रहे हैं, जिस तरह आम भारतीय के मन में अपने बच्चों को अंग्रेजी की शिक्षा देने की ललक पैदा हो रही है और जिस तरह अंग्रेजी में प्रवीण गिने-चुने लोगों के लिए रोजगार के अवसर निरंतर बेहतर होते चले जा रहे हैं उसमें एक किस्म का ट्रेंड दिखाई देता है। लेकिन हिंदी से अंग्रेजी की ओर जाने का यह ट्रेंड क्या इतना बड़ा और प्रभावी है कि वह हमारी राजभाषा के लिए खतरा बन जाए?
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