देवेन्द् शर्मा
सूख गये संघर्ष के आंसू
नर्मदा पर बांधों की श्रृंखला की शुरुआत को 25 साल बीत गए हैं। इसके कारण 1.5 लाख से अधिक विस्थापित (जिनमें अधिसंख्य आदिवासी हैं) अब भी पुनर्वास का इंतजार कर रहे हैं। अब तक की तमाम सरकारों ने इन लोगों के साथ जानवरों से भी बदतर व्यवहार किया है। दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एपी शाह की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय स्वतंत्र पीपुल्स ट्रिब्युनल के सदस्य के तौर पर जब मैंने मध्य प्रदेश के निमद क्षेत्र का दौरा किया तो इन गरीब और असहाय लोगों को देखकर सिर घूम गया था। 25 साल से वे अहिंसक संघर्ष कर रहे हैं और फिर भी उन्हें न्याय नहीं मिल पाया है।
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