आरएल फ्रांसिस
कंधमाल: सांप्रदायिक धुव्रीकरण नई चुनौती
कंधमाल की आग उड़ीसा से अधिक अब राजधानी दिल्ली में धधक रही है. पिछले महीने 22 से 24 अगस्त के बीच दिल्ली में चर्च संगठनों द्वारा एक जनसुनवाई करके यह साबित करने की कोशिश की गयी कि कंधमाल में दंगा पीड़ितों का पुनर्वास नहीं हो रहा है. इस जन-सुनवाई के संयाजकों में जॉन दयालॅ, कटक-भुवनेश्वर के बिशप रिफेल चैनथ एवं वामपंथी विचाराधरा सहमत की माला हाशमी प्रमुख थी.
हिन्दुओं के विरोध में मुसलमानों पर मेहरबान चर्च
विगत चार जुलाई को इस्लामी जेहादी संगठन ‘पापुलर फ्रंट आफ इंडिया’ के कार्यकर्ताओं ने मुव्तातुपुझा के चर्च से लौटते समय उनका दाया हाथ शरीर से अलग कर दिया था यह सब इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने बी. कॉम परीक्षा में एक प्रश्नपत्र में ‘मोहम्मद’ शब्द का उल्लेख किया था। चरमपंथी मुस्लिमों का आरोप था कि जोजफ ने जानबूझकर अपमानजनक तरीके से इस शब्द का उल्लेख किया है इसी कारण उन्मादी जेहादियों ने उन्हें ‘ईशनिंदा’ का दोषी मान लिया था। और अपने तरीके से सजा दी। छोटे-छोटे मामलों पर हिंदू संगठनों को धकियाने वाले चर्च नेताओं को मानों सांप सूघ गया। उनके गले से आवाज तक नही निकली। दो वर्ष पहले तक ‘लव जेहाद’ के विरुद्ध मोर्चा खोलने वाला राज्य का कैथोलिक चर्च कट्टरपंथी मुसलमानों के सामने मिमयाता नजर आ रहा है।...कुरान जले पर भारत को पता न चले
इस्लाम को मानवता विरोधी बताते हुए अमेरिकी चर्च के एक हिस्से ने 9/11 को अमेरिका पर हुए अलकायदा के हमले की वर्षगांठ पर पवित्र कुरान को जलाने की घोषणा करके दुनिया भर के मुस्लिम समाज में बैचानी पैदा कर दी है। लेकिन इस घटनाक्रम को भी वेटिकन अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहा है. चर्च संगठनों की कोशिश है कि इन घटनाओं को भारत में ज्यादा प्रचार न मिले ताकि भारत में मुस्लिम-ईसाई एकता पर फर्क न पड़े. अगर ऐसा होता है तो ईसाई संगठनों के बड़े दुश्मन "हिन्दुओं" को इसका फायदा मिल सकता है और हिन्दू-मुसलमानों के बीच दूरियां कम हो सकती है जिसका सीधा नुकसान मिशनरियों को होगा. ...कृष्णं वन्दे जगतगुरुम्
भारत भूमि में जन्मा कौन ऐसा व्यक्ति होगा जिसने श्रीकृष्ण का नाम न सुना हो? श्रीकृष्ण को वन्दे जगदगुरु भी कहा जाता है। श्रीरामचन्द्र के समान श्रीकृश्ण भी करोड़ों भारतवासियों की श्रद्वा और भक्ति के पात्र रहे है। वास्तव में श्रीकृष्ण की सम्पूर्ण जीवन लीला, उनका दुष्टों से लड़ना और सज्जनों की रक्षा करना, उनकी राजनीतिक क्षमता और सबसे अधिक उनका गीता के द्वारा दिया हुआ कर्मयोग का संदेश भारतीय संस्कृति की अमूल्य निधि है।...Author info
