नीरज जोशी
गैरसैंण छोड़कर देहरादून की दुहाई
उत्तराखण्ड को बने नौ साल हो गये लेकिन राज्य की राजधानी को लेकर अभी भी असमंजस बरकरार है. खबर है कि दीक्षित आयोग ने भी सुझाव दिया है कि राज्य की राजधानी का निर्धारण करते वक्त भौगोलिक परिस्थितियों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। साफ है, दीक्षित आयोग भी एक तरह से देहरादून को ही राजधानी बनाये रखने का पक्षधर है। यह हास्यास्पद हो सकता है लेकिन सच्चाई यही है कि गैरसैंण को राजधानी बनाने का विरोध करनेवाले वे लोग हैं जो अलग राज्य का ही समर्थन नहीं करते थे। गैरसैंण को राजधानी बनाने के पीछे तर्क यह था कि यह उत्तराखण्ड के गढ़वाल और कुमाऊं दोनों मण्डलों के मध्य में पड़ता है। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से गढ़वाल और कुमाऊं से समान दूरी के तर्क पर दिल्ली से नजदीकी का तर्क राजधानी बनाने के सवाल पर हावी हो गया है।
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