निर्मल रानी
शासन, प्रशासन को चुनौती देती प्रलयंकारी बाढ़
हरियाणा व पंजाब में गत् दिनों मॉनसून की शुरुआत में ही आई भारी बारिश तथा इसके बाद उत्पन्न हुई बाढ़ जैसी स्थिति के लिए एक बार फिर यही बताया गया कि घग्गर व टांगरी जैसी पहाड़ी नदियों तथा एस वाई एल नहर पर बने बांध में पड़ी दरार ने बारिश के पानी के साथ मिलकर बाढ़ जैसी स्थिति बना दी। जिसके कारण अंबाला, कुरुक्षेत्र तथा पटियाला जिलों का काफी बड़ा भाग जल प्रलय जैसे माहौल का सामना करने के लिए मजबूर हो गया। सवाल यह है कि इन नदियों के बांध आखिर प्राय: क्योंकर टूट जाते हैं?
'इमोशनल अत्याचार' के फिर शिकार हुए अमर सिंह
अमर सिंह का अपना जनाधार हो या न हो, राजनैतिक कौशल भी चाहे कुछ न रहा हो परंतु इसके बावजूद मीडिया की नज़रें उन पर बराबर बनी देखी जा सकती हैं। इसे महज़ अमर सिंह का मीडिया मैनेजमेंट ही माना जा सकता है। निश्चित रूप से वे अपने को राष्ट्रीय स्तर पर 'हाईलाईट' करने तथा अपनी मार्केटिंग स्वयं करने में 'मास्टर' रहे हैं। ...मेडिकल एजूकेशन का माफिया डॉन
सीबीआई के शिकंजे में आया केतन देसाई शिक्षा में फैलते माफियागीरी का जीता जागता उदाहरण है. इस माफियागीरी से उसने कितना पैसा कमाया इसका अंदाजा इसी से लग सकता है कि उसके पास दर्जनों के हिसाब से आलीशान भवन, क्विटल के हिसाब से सोना तथा सैकड़ों करोड़ रुपयों के हिसाब से नगदी की बरामदगी हो रही है।...गडकरी विद ए डिफरेंस
भाजपा के अध्यक्ष और संघ प्रमुख मोहनराव भागवत के दुलारे लिटिल गडकरी ने वह कमाल कर ही दिया जिसकी उनसे उम्मीद की जा रही थी. देश के दो शीर्ष राजनीतिज्ञों को कुत्ता कहकर अब वे कह रहे हैं कि उनकी जबान फिसल गयी और उन्हें हिन्दी के उस मुहावरे का अर्थ ही नहीं पता था जिसका उन्होंने उपयोग किया. निर्मल रानी मानती हैं कि असल में यही भाजपा का ढोंगी और जहरीला राष्ट्रवाद है जो नितिन गडकरी ने प्रकट कर दिया है. ...कुंभ पर फूटा पाप का घड़ा
यह कैसा अजब संयोग है कि जिस वक्त देश में पवित्र महाकुंभ चल रहा था उसी वक्त एक एक करके संतों के पाप का घड़ा भी फूट रहा था. तीन महीने तक हरिद्वार में चले पवित्र महाकुंभ के मौके पर "अपवित्र संन्यासियों" के पाप का घड़ा भी फूटता रहा. साधु संतों के पाप के इन फूटते घड़ों ने न केवल धर्म की मर्यादा को भंग किया बल्कि उस पावन महाकुंभ को भी कलंकित व शर्मसार कर दिया जिसका भक्तगण 12 वर्षों तक बेसब्री से इंतज़ार करते हें। ...जुर्म से भी संगीन न्याय
हरियाणा सहित उत्तर भारत के कई इलाकों में खाप पंचायतों का आज भी बोलबाला है. उनके फैसले मानने के लिए समाज का एक बड़ा वर्ग बाध्य दिखाई देता है. लेकिन क्या ये खाप पंचायतें नये तरह के विकसित होते समाज में किसी भी तरह से प्रासंगिक रह गयी हैं. लेकिन करनाल की एक अदालत के इस फैसले पर कि इन खाप पंचायतों पर हमेशा के लिए रोक लगनी चाहिए, निर्मल रानी का कहना है कि इन खाप पंचायतों में जुर्म से भी संगीन न्याय किया जाता है. ...बाल ठाकरे एण्ड एसोसिएट्स की जागीर नहीं है मुंबई
देश की आर्थिक राजधानी के रूप में अपनी पहचान रखने वाली मुंबई ने एक बार फिर देश की राजनीति को गर्म कर दिया है। स्वयं को मुंबई के 'केयरटेकर' अथवा स्वयंभू 'सी ई ओ' समझने वाले ठाकरे परिवार ने एक बार फिर 'मुंबई केवल हमारी है' का दावा सार्वजनिक रूप से ठोंक दिया है ।...Author info
