प्रभाष जोशी
भारतीय परंपरा से दूर होती पत्रकारिता
आज के इस विश्वग्राम में सभी छोटे हैं, बड़ी है तो केवल टेक्नोलाजी। जिस विज्ञान ने यह कहा कि दुनिया एक विश्वग्राम बनती जा रही है वह विश्व तो जानता था लेकिन उसे गांव के बारे में पता नहीं था. क्योंकि एक गांव एक छोटी बस्ती नहीं है बल्कि गांव एक जैविक समाज है। हम जिस टेक्नोलाजी को बढ़ा रहे हैं वह सब चीजों को छोटी करके जैविक समाज को नष्ट करने वालि टेक्नोलाजी है। यानि आदमी छोटा है उसकी मशीन उससे बड़ी है।
स्वर्ग की सीढियां टूट गयीं
अमेरिका के एक नवउदार पूंजीवादी विचारक ने कहा था कि मैं चाहता हूं कि राज्य छोटा से छोटा और निर्बल से निर्बल होता चला जाए. एक दिन वह इतना छोटा हो जाए कि नहाने के टब में लेटने लायक हो जाए ताकि उसको उसी टब में डुबो-डुबो कर मारा जा सके. ये विचारक अब भी वहीं हैं और बुश सरकार के सात सौ अरब डालर के जमानत पैकेज पर तालियां बजा रहे होंगे. ...Author info
