प्रभाष जोशी
राजनीति के 'ट्रैजिक फिगर' का असमय अंत
धीरे धीरे वे दिल्ली के राजनीतिक, बौद्धिक और पत्रकारीय इलाकों में एक ट्रैजिक फिगर हो गये. मनमोहन सिंह के नव उदार राज के खुले खेल फर्रूखाबादी में राजनीति ऐसी बदली कि उद्योग व्यापार का ही बोलबाला हो गया. प्रमोद महाजन और अमर सिंह जैसे दलालों के हाथ में सत्ता की चाभी आ गयी. बाजार और उद्योग की किसी लाबी के साथ आप नहीं हैं तो राजनीति में टिके रहना भी मुश्किल हो गया है. पैसा इतना हावी हो गया है कि लोक राजनीति की बात करनेवाले या तो शोहदे माने गये या फिर लोगों को पटाने वाले ठग. जाति, संप्रदाय और उद्योग व्यापार को तरकीब और करामात से साधनेवाली राजनेताओं की नयी पौध पनपी. उनके बीच देवेन्द्र द्विवेदी न तो राजनीति के थे और न वकालत के.
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