प्रेम शुक्ल
भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया.
इस्लामी रणनीति है हिन्दू आतंकवाद का हौव्वा
क्या देश में हिन्दू आतंकवाद पूरी तरह पैर पसार चुका है जो उतना ही खतरनाक है जितना कि अरब के पैसे से पलनेवाला बहावी आतंकवाद? भारत में कुछ छुटपुट ऐसी घटनाएं हुई हैं जिन्हें न केवल आतंकी घटनाओं के समान बनाकर पेश किया गया बल्कि उनका हिन्दू कनेक्शन भी साबित करने की कोशिश की गयी. प्रेम शुक्ल की पड़ताल है कि भारत में हिन्दू आतंकवाद का हौव्वा भी इस्लामिक चमपंथी विचारकों और रणनीतिकारों की "फेश सेविंग एक्सरसाइज" है िजसमें उन्हें मुस्लिम वोट की लालची सरकार का संरक्षण मिला हुआ है. ...बुर्के को बैन करो
चार पांच दिन पहले मुंबई के वीएन देसाई अस्पताल में एक बच्चा चोरी हुआ जिसके संदर्भ में सामना ने अपने संपादकीय में सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा के लिहाज से बुर्के को प्रतिबंधित करने की मांग क्या की, तथाकथित सेकुलरवादियों और मुल्ला मौलवियों ने स्यापा शुरू कर दिया है. बुर्का प्रतिबंधित करने की मांग सुनते ही इस्लाम एक बार फिर खतरे में आ गया है. इस इस्लाम का और बुर्के का असल में कोई लेना देना नहीं है. मुल्ला मौलवियों ने महिलाओं को माल-ए-गनीमत समझकर उसे गुलामी के बंधनों में बांधने का जरिया बुर्के को बना रखा है....दशहरा रैली का दम
शिवाजी पार्क शिवसेना और शिवसेनाप्रमुख के बीच दशकों पुराना अटूट संबंध है. शिवेसना की पहली जनसभा 19 जून 1966 को इसी शिवाजी पार्क में हुई थी. तत्कालीन राजनीतिक विश्लेषकों का मत था कि 1960 और 1966 के बीच व्यंगचित्र साप्ताहिक मार्मिक के माध्यम से ठाकरे परिवार ने स्थानीय लोकाधिकार के लिए जो अलख जगाया था, उससे उपजे राजनीतिक विचार से जन्मी शिवेसना की पहली जनसभा में अधिकतम दस हजार स्रोता जमा होंगे....राजनीति के समंदर में धनतंत्र के धुरंधर
ग्राम से सेवाग्राम यात्रा के लिए आयोजित पत्रकार सम्मेलन में महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष माणिकराव ठाकरे और प्रदेश के पूर्व मंत्री सतीश चतुर्वेदी के बीच रैली के लिए धन उगाही की प्रक्रिया पर चर्चा जिस अंदाज में स्टार माझा पर प्रसारित हुई उसने भले ही महाराष्ट्र कांग्रेस की राजनीति में भूकंप नहीं लाया हो लेकिन राजनीतिक दलों के संचालन में धनतंत्र की भूमिका को जरूर बेनकाब किया है. गौरतलब है कि स्टार माझा समेत तमाम चैनलों पर कांग्रेस की बखिया उधेड़ने के कार्यक्रम के बावजूद कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्षा सोनिया गांधी ने मुख्यमंत्री अशोक चह्वाण और प्रदेश अध्यक्ष माणिकराव ठाकरे की पीठ को थपथपाने का काम करके इस बवंडर को खत्म करने की चतुराई दिखाई है. ...मुसलमान ही बताएं वे इस देश में कैसे रहेंगे?
बाबरी ढाँचे-राम जन्मभूमि मुकद्दमे के फैसले और कश्मीर में समस्या के समाधान की दिशा में सक्रियता दिखाने की बजाय हिन्दुस्तान में कश्मीर के विलय के सन्दर्भ में अनाप-शनाप बयान जारी करने की ओमर अब्दुल्ला की शेखचिल्ली वृत्ति के चलते एक बार फिर इस देश में पिछले ७ दशकों से जारी हिन्दू-मुस्लिम विभाजन कारी वृत्ति को हवा मिली है. सनद रहे कि इस उपमहाद्वीप को पिछले कई दशकों को धर्म के आधार पर बुरी तरह से विभाजित किया गया है....सेकुलर बिरादरी के सिर पर न्याय का हथौड़ा
अयोध्या में रामजन्मभूमि पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद कल तक जो न्यायालय के फैसले को मानने का उपदेश दे रहे थे अब वे ही न्यायपालिका के फैसले पर छिद्रान्वेषण करने निकल पड़े हैं. इस देश का सबसे बड़ा संकट है कि इसके बुद्धिजीवी उसी को ज्यादा कसौटी पर कसते हैं जिसकी सहिष्णुता को लेकर उन्हें पूरा विश्वास होता है. हिन्दू समाज दुनिया का सबसे सहिष्णु समाज है सो जिसे देखो वही उसके खिलाफ इल्जामों की सूची लिए खडा है. क्या किसी अन्य धर्मावलम्बी से उसकी आस्था के किसी प्रतीक चिह्न के मामले में इस तरह सबूत मांगे जा सकते हैं? जिसे देखो वही पूछ ले रहा है कि कैसे यह साबित किया जा सकता है कि राम अयोध्या में ही जन्मे थे और उसी स्थान पर जिस पर बाबरी ढांचा कभी मौजूद होता था?...अयोध्या से कश्मीर तक सत्ता का षण्यंत्र
अयोध्या और कश्मीर दोनों ही मुद्दे पूरी तरह से कांग्रेसी सत्ता के षण्यंत्र की उपज हैं. इन दोनों मुद्दों का निस्तारण चुटकी बजाकर भी किया जा सकता था लेकिन अल्पसंख्यक तुष्टीकरण और स्वयं सत्ता भोगने के साथ अपने चहेतों के हितों को तुष्ट करने की घृणित राजनीति ने इन दोनों मुद्दों को इस कदर उलझा दिया है कि शांतिप्रिय और स्वभाव से ही सेकुलर भारत सांप्रदायिकता के आरोप से घिर गया है. पहले जो राजनीति कांग्रेस तक सीमित थी, उसका संसर्गजन्य रूप अब विशुद्ध गैर कांग्रेसी विपक्ष की अलंबरदार भारतीय जनता पार्टी को भी लग गया है. पिछले साठ वर्षों में कांग्रेस ने राष्ट्रहित की बजाय गांधी नेहरू परिवार के हितों को वरीयता दी है. अब भाजपा में बैठे लोग चंद हाथों में सत्ता को समाये रखने के लिए राष्ट्र के बंटाधार की कीमत पर भी वही कर्म कर रहे हैं. प्रेम शुक्ल का विश्लेषण-...सुलझी हुई समस्या को उलझाने पर आमादा
आज जो लोग भी कश्मीर की समस्या निपटाने निकले हैं सवाल पैदा होता है क्या उन्हें कश्मीर की समस्या का ओर-छोर भी पता है? क्या राहुल गांधी और ओमर अब्दुल्ला की नयी पीढी १९४७ से २०१० के बीच कश्मीर में क्या हुआ है उसकी प्रामाणिक जानकारी से लैस भी है? यदि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार कश्मीर की स्थिति को ठीक से समझ ही रही होती तो क्या पिछले ६ वर्षों के शासनकाल में उसने एक सुलझ चुकी समस्या को उलझा लेने की मूर्खता की होती?...ईसाईयत बनाम इस्लाम की मजहबी जंग
९/११ की नौंवीं वर्षगाँठ के निमित्त आतंकवाद के नाम पर पूरी दुनिया में तरह-तरह की चर्चा छिड़ी. फ्लोरिडा के कोई एक पादरी टेरी जोन्स ने आतंकवाद का स्रोत इस्लामपंथियों की परमपवित्र पुस्तक कुरआन शरीफ को करार देकर उसे जलाने की घोषणा कर सुर्ख़ियों में रहे. उनकी इस घोषणा से पूरी दुनिया चिंतित हुई. अमेरिकी विदेश मंत्री हिलारी क्लिंटन से लेकर भारतीय गृहमंत्री पी.चिदंबरम तक हर किसी को इस चिंता ने सताया कि फ्लोरिडा के पादरी की इस हरकत से पूरी इस्लामी दुनिया में उत्पात मच जाएगा....Author info
