प्रेम शुक्ल
अंतुले जिन्ना हैं या दाऊद?
बैरिस्टर अतुंले विशुद्ध सेकुलर नेता रहे है। राष्ट्रवादी व्यक्ति रहे है। फिर क्या मजबूरी थी कि भवानी तलवार और कोहिनूर हीरा लंदन से वापस लाने का अभियान चलाने वाले अतुंले अचानक जमात-उद-दाव के सुर में सुर मिलाने लगे? इसके लिए अतुंले जिस संप्रदाय से आते हैं पहले उसकी सेकुलर संस्कृति पर एक नजर दौड़ाते हैं। खुद अतुंले के सियासी कैरियर की पृष्ठभूमि में झांकते हैं। तभी हमें समझ में आएगा कि किस तरह बैरिस्टर अतुंले सियासी दाऊद इब्राहिम के रूप में अवतरित हो रहे हैं.
आईएसआई, अरब और पाकिस्तान का परमाणु बम
अरब देश पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और आईएसआई द्वारा समर्थित लोगों की मदद क्यों करते हैं? आईएसआई के संरक्षणवाला दाऊद इब्राहिम अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट की सूची में चढ़ जाता है, इसके बावजूद सऊदी अरब का प्रशासन दाऊद को उमरा और हज करने की व्यावस्था प्रदान करता है। ट्रेजरी डिपार्टमेंट दाऊद को तालिबान और अल-कायदा का मददगार ठहराता है फिर भी उसकी बेटी के दावते वलीमा का आयोजन संयुक्त अरब अमीरात में करने की अनुमति प्रदान की जाती है। अमेरिकी की हर चाहत को मानेवाला सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात आईएसआई की चाहतों का इतना वजन क्यों मानता है? इस्लामी देशों की राजनीति की समझ रखनेवाले मानते हैं कि इस्लामी देशों में अरब देशों का वर्चस्व स्थापित करने में पाकिस्तान में भी आईएसआई की अंत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रही है।...वह पाकिस्तान का 'खुदा' है
पाकिस्तान में जो कोई भी सत्ता में आता है दाऊद उसे उपहारों से लाद देता है. सेना, आईएसआई और सरकार में उच्चस्तरीय अफसरों को मोटी रकम विदेशों में उपलब्ध कराना दाऊद के नेटवर्क के लिए मामूली काम है. बदले में दाऊद जब चाहे जिस नाम से चाहे पाकिस्तानी पासपोर्ट और सुरक्षा मुहैया करायी जाती है. दाऊद हर साल एक से अधिक बार उमरा करने और हज करने मक्का जाता है. मक्का तक की सुरक्षित यात्रा की जिम्मेदारी आईएसआई की होती है....नशे से जुड़ा नफरत का कारोबार
पाकिस्तानी खुफिया एजंसी आईएसआई और माफिया डान दाऊद इब्राहिम कासकर के अटूट बंधन का राज क्या है? आखिर क्या कारण है कि पाकिस्तान में हुक्मरान बदलते रहे, तानाशाही और लोकतंत्र आते-जाते रहे लेकिन दाऊद के साम्राज्य पर कभी कोई असर नहीं पड़ा? तो सुनिये. इस अटूट दोस्ती का राज है ४०० अरब डालर का नारकोटिक्स का व्यापार जिसका ८० फीसदी अफगानिस्तान और पाकिस्तान से होता है. यह ४०० बिलियन डालर दुनिया के कुल औद्योगिक उत्पादन का ८ फीसदी है....'वे' सफल क्यों हुए?
मुंबई, लक्षद्वीप, पोरबंदर और कोंकण के तटों पर पिछले दो दशकों से सिर्फ और सिर्फ डी कंपनी का कब्जा है. 1993 में दुनिया में पहली बार श्रृंखलाबद्ध विस्फोट मुंबई में हुए थे. इन विस्फोटो में दाऊद की क्या भूमिका थी? आरडीएक्स पाकिस्तानी सेना ने दिया था, ट्रेनिंग पाकिस्तानी सेना ने दिया था. डी कंपनी ने लाजिस्टिक का सपोर्ट दिया था. प्रशिक्षण के लिए टिकट और वीजा उपलब्ध कराना तथा आरडीएक्स और एक-56 जैसी राईफलें को मुंबई तक लाने का काम भी डी कंपनी ने किया था....सबको पता था कि हमला होगा
मुंबई में आतंकी हमले की पूर्व आशंका नहीं बल्कि जानकारी थी. हम यहां ऐसे कुछ बयान दे रहे हैं जो हमारे देश के महत्वपूर्ण मंत्रालयों का जिम्मा संभालने वाले मंत्रियों ने समय-समय पर दिये थे. इन बयानों से साफ है कि मुंबई पर बड़े आतंकी हमले की जानकारी सबको थी. इतनी सटीक जानकारी होने के बावजूद हमारे प्रशासन ने कार्यवाही क्यों नहीं की?...आतंकी हमला हुआ कैसे?
अगर आप मुंबई पर हुए आतंकी हमले की तह में जाएं तो सरकारी एजंसियों द्वारा की गयी अंतहीन मनमानियां और लापरवाही सामने दिखाई देगी. मसलन, मार्च २००६ में अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश की यात्रा के बाद अल-कायदा के प्रमुख ओसामा बिन लादेन का एक आडियो संदेश जारी हुआ था जिसमें लादेन ने यहूदियों, ईसाईयों और हिन्दुओं को निशाना बनाने की बात कही थी. इसके बाद ही पाकिस्तान और बांग्लादेश के दर्जनों आतंकी संगठन जो अलकायदा के तहत काम करते हैं उन्होंने भारत को निशाना बनाना शुरू कर दिया. लादेन की उस चेतावनी के बाद भारत सरकार को भी आतंक के खिलाफ राष्ट्रीय रणनीति पर काम शुरू करना चाहिए था....Author info
