राजीव शर्मा
भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।
भई मत खाओ मावा मिठाई, फिर भी दीवाली की बधाई!
मैं नरेश सिंघल बोल रहा हूँ। आप हमारे यहाँ कब आ रहे है। आपकी दिवाली की मिठाई तैयार रखी है। किसी दुकान को चैक करने से पहले मुझसे मिल लेना। मैं खाध व्यापार संघ का अध्यक्ष बोल रहा हूँ।.....हाँ ठीक है में आ रहा हूँ। अबकी बार हजारों में चाहिये,पता है सरकार ने शुद्ध के लिए युद्ध चला रखा है।.. ये संवाद है एक फूड इंस्पेक्टर और दुकानदार का। अब आपकी मर्जी है आप दिवाली पर मावा मिठाई खाऐं या न खाऐं। ...मानवीय मूल्यों की अमानवीय कार्यशाला पर मीडिया की मुहर
इस खबर को लिखने की कोई इच्छा नहीं थी.कारण भी साफ था. उदघाटन और समापन की औपचारिकताओं के अलावा इसमें कुछ दिखा नहीं.. कुछ समूह चर्चा भी हुई थी जिसे समापन की जल्दबाजी में शीघ्रता से समाप्त कर दिया गया। दूसरे दिन के अखबारों में खबर भी छपी. लेकिन तीसरे दिन जब बाकायदा समापन का सचित्र समाचार पढा तो मन हुआ कि अब तो खबर लिखनी ही पडेगी। दो दिन की ‘राष्ट्रीय गोष्ठी’ जो एक दिन में ही समाप्त हो गई, को दो दिन की बताकर मानवीय मूल्यों की चर्चा में मीडिया ने वास्तव में अमानवीय कार्य किया है....शैतान हो गये मरीजों के भगवान!
राजस्थान का यों तो हडतालों से चोली दामन का साथ है। ऐसे में अगर कांग्रेस की सरकार हो तो कहना ही क्या। जरा सी कोई बात हुई नहीं कि सरकारी मुलाजिम हड़ताल पर उतारू हो जाते है लेकिन इस बार तो सरकारी डॉक्टरों ने हद ही कर दी। जान बचाने का दावा करनेवाले डाक्टरों ने ऐसी हड़ताल की कि 75 लोगों की जान चली गईं। डॉक्टर थे कि अपनी जरा सी बात को लेकर हड़ताल कर बैठे। जिन लोगों के घरों में इस बीच डॉक्टर न मिलने से मातम छाया हुआ है आज उनकी नजर में डॉक्टर भगवान की बजाय शैतान हो चुका है। उनकी माने तो ये डाक्टर हैवानियत के मारे शैतान हैं।...पाँचना से फोन पर पानी पहुँचा घना
घना पक्षी विहार को इस बर्ष पानी मिल गया है। करौली जिले के पाँचना बाँध से छोडा गया पानी अब भरतपुर की सीमा में पहुँच गया है। इस पानी के बाद संभावना है घने का ताज बच जाये। पानी से रिक्शा चालकों से लेकर होटल मालिक सब प्रसन्न है, लेकिन इस पानी पहुँचने के कारणों में भरतपुर सांसद का करौली कलक्टर को फोन करना चर्चा का विषय बना हुआ है।...स्वागत से शुरू हुई सुगबुगाहट
राजस्थान में इस बार 5 वर्षो के बाद छात्रसंघों के चुनाव होने जा रहे हैं। चुनावों को लेकर विधार्थियों से लेकर राजनैतिक दलों में सरगर्मियाँ तेज हो गई है। नवागुंतकों का जोर से स्वागत किया जा रहा है तो तमाम तरह की माँगे भी सरकार के सामने रखी जा रही है। राजनीति की पहली पाठशाला के हो रहे चुनावों की एक रिपोर्ट। ...अरावली में अवैध खनन का गोरखधन्धा
राजस्थान की पहचान वैसे तो रेगिस्तान से है। लेकिन अरावली की श्रृखलाऐं भी उसके बहुत बडे हिस्से में फैली हुई है। अभी तक अरावली की इन श्रृखलाओं को हरा भरा करने के नाम पर देश और विदेशी मदद के पैसे को अकेला वन विभाग हडप करता रहा। अब इन श्रृखलाओं से पत्थर और लकडी का दोहन सरकार के दर्जनों विभाग और उनकी आड़ में खुद सरकारें कर रही है। राजस्थान के भरतपुर जिले में अवैध खनन के गोरखधंधे की पडताल करती एक रिपोर्ट। ...संकट में है सुजान गंगा
राजस्थान के भरतपुर जिले में एक सुजान गंगा है. ऐतिहासिक महत्व की ये नहर अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष के साथ लोगों के लिए मुसीबत बन गई है. अब एक बार फिर न्यायालय ने सुजान गंगा के उद्धार के लिए हस्तक्षेप किया है. देखना ये है कि कोर्ट की फटकार के बाद सरकारी अमला कुछ करता है या फिर वो ही ढाक के तीन पात वाली बात होकर रह जायेगी....सोनाली शुभम की सफल प्रेम कहानी
झारखंड की निरूपमा भले ही प्रेम में हार गई हो लेकिन बिहार की सोनाली शुभम अपने इम्तिहान में पास हो गयी . इन दोनों ने प्रेम किया था . लेकिन दोनों के परिणाम अलग अलग रहे. निरूपमा का प्रेम देश की राजधानी का प्रेम था. सोनाली की प्रेम कहानी राजस्थान की शैक्षणिक नगरी कोटा में परवान चढी. दोनों को देखा जाये तो सोनाली ने जो राह चुनी उसमें कांटे कहीं अधिक थे और आगे भी रहेगें . सोनाली की सफलता में उसके प्रेम की पवित्रता को सफल माने या फिर उसकी दृढता को. निरूपमा ने जो किया उसमें गलत क्या है? ये विश्लेषण का विषय हो सकता है. ...पीलूपुरा की पटरियों पर फिर आ सकते है गुर्जर
बर्ष 2007 के मई माह में गुर्जरों ने पाटौली में चक्का जाम किया. फिर 2008 के मई माह में पीलूपुरा में रेल की पटरियों को उखाड फेंका. एक बार फिर 2010 के चालू मई माह में गुर्जर पीलूपुरा में रेल की पटरियों पर जम कर बैठ सकते है. सोमवार 3 मई को पीलपुरा के पास महरावर में विशाल महापंचायत रखी है. उसके बाद उत्पन्न हालातों पर ही आगे की कार्यवाही करने की बात गुर्जर कह रहे है. ...Author info
