राजीव शर्मा
प्रकृति की आहें, फिर भी सूनी हैं राहें
भरतपुर लुट गया है. यह लूट यहां के विश्व प्राकृतिक धरोहर की है. हालांकि विश्व प्राकृतिक धरोहर के अपने तमगे को एक बार फिर से भले ही भरतपुर स्थित केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान ने कुछ समय के लिए बचा लिया हो लेकिन इस साल न पक्षियों ने इधर का रुख किया है और न ही उन्हें देखने आनेवाले सैलानियों ने. इससे ऐसा आभास होना वेमानी नही रह जाता कि यदि बहुत जल्दी इस दिशा में सार्थक और कारगर कदम नही उठाये गये तो पक्षियों के स्वर्ग कही जाने वाली यह विरासत केवल अपने नाम तक ही सिमट कर रह जाऐगी जिसके दुष्परिणाम पर्यटन के लिहाज से भरतपुर ही नही पूरे प्रदेश को भुगतने पडेंगे ।
कमजोर हुए गुर्जरों के कर्नल
लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा अपने 'कर्नल' की दहाड़ से एक बार फिर मामले को गरमाने और प्रदेश सरकार के सामने संकट खडा करने की पूरी तैयारी कर ली है। कांग्रेस यदि अपनी ‘शालीनता और समन्वय बनाने की नीति से इस गंभीर समस्या का समाधान नही करेगी तो लोकसभा चुनावों से पहलें आरक्षण के इस बहुचर्चित जिन्न का एक बार बाहर निकलना निश्चित है. लेकिन दुर्भाग्य से इस बार गुर्जर समाज के भीतर ही कर्नल बैंसला के नेतृत्व को लेकर एकराय नहीं है....गिद्ध लौट आये हैं
पर्यावरण के खिलाफ लगातार मिलती बुरी खबरों के बीच यह एक अच्छी खबर है कि गिद्ध लौट आये हैं. भरतपुर के इस बयाना इलाके में वे दुर्लभ गिद्ध दिखाई दे रहे हैं जो कोई दशक भर पहले यहां से गायब हो चुके थे. मानवीय अपराधों के शिकार गिद्धों के इस इलाके में दोबारा लौट आने से प्रकृति प्रेमियों ही नहीं सामान्य पशुपालकों में भी आशा की नयी उम्मीद जागी है. गिद्धों का लौट आना सबके लिए शुभ संकेत है. ...Author info
