राजीव शर्मा
लांगुरिया बलबीर की जय-जयकार
पूर्वी राजस्थान के करौली जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर कैला देवी का शक्तिपीठ उत्तर भारत का प्रमुख शक्ति पीठ है. हर साल दोनों नवरात्र में यहां औसतन कोई 25 लाख श्रद्धालु आते हैं. यहां आनेवाले श्रद्धालु कोसों से पैदल यात्रा करके यहां पहुंचते हैं नवरात्र के पावन अवसर पर मां का आशिर्वाद लेते हैं. आईये हम भी जानते हैं कि कैला देवी का इतना महत्व क्यों है और इस तीर्थ का इतिहास क्या है. राजीव शर्मा की रिपोर्ट-
मीणा न हुए मुसीबत हो गये
पन्द्रहवी लोकसभा के लिए हो रहे आम चुनावों में राजस्थान में वैसे केन्द्र के किसी गठबंधन का सीधा प्रभाव भले ही न हो लेकिन दोनों ही प्रमुख दलों को स्थानीय जातिगत समीकरणों ने बहुत परेशान कर रखा है। राजस्थान की राजनीति में जाति का बहुत महत्व पहले से नहीं रहा है लेकिन गुर्जरों के द्वारा एस टी में खुद को शामिल करने की मॉग और उसके मीणा समाज के द्वारा किये गये खुलेआम विरोध ने जातिगत राजनीति के बारूद को चिंगारी दिखा दी, और जातिगत राजनीति के लिए जमीन तैयार कर दी है।...मीणा को मिल गया पंचायत चलाने का जॉब
"मैं गोलमा देवी बोल रही हूं।" राजस्थान में वर्तमान कांग्रेस सरकार के मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण समारोह में गूंजी इस आवाज ने देश भर में बुद्विजीवियों के साथ आम लोगों का ध्यान इस बात की ओर खीचां था कि मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद के लिए क्या कोई योग्यता और अनुभव होना चाहिऐ या नहीं उसी प्रदेश से एक आई ए एस अधिकारी ने लोकतंत्र और खुद को उसका रक्षक मानने वाले मतदाताओं जन प्रतिनिधियों और उनके दलों के सामने 15 वीं लोकसभा के चुनावों में पार्टी प्रत्याशियों के चयन की मशक्कतों के बीच एक संदेश भर देने की कोशिश की है जिसमें सभी तरफ से लोकतंत्र की जीत दिखाई देती हैं।...मार्च में प्रवेश मई में परीक्षा और हो गये अध्यापक
शिक्षक बनाने के प्रशिक्षण और उनके अधीन चल रही व्यवस्थाओं की तस्वीर साफ करती हैं कि राजस्थान में शिक्षकों के प्रशिक्षण की व्यवस्था कितनी लचर और दयनीय है, जैसा प्रशिक्षण और संस्कार हमारी व्यवस्था उन्हें उपलब्ध कर रही है वैसा ही परिणाम निकल रहा हैं। किसी तरह काम चल रहा है और कोई विरोध का स्वर भी सुनाई नहीं दे रहा है इसलिए सरकार परवाह भी किसकी करे? किन्तु इसका ये भी मतलब नहीं है कि इस बदहाली को दूर करने की जिम्मेदारी सरकार की नहीं है। सरकारें यदि चाहती हैं कि शिक्षा को पूरी तरह से निजी क्षेत्र को दे दिया जाएं तो उसे ऐसी कठिन आचार सहिंता बनानी होगी जिससे निजी निवेशकों को खुली लूट करने की छूट न मिले और वो मानवीय संसाधनों का अपने तरीके से शोषण और अनादर न कर सके....Author info
