राजीव शर्मा
औजार का असर उसके इस्तेमाल पर निर्भर
सूचना का अधिकार कानून न कोई देवता है और न ऐसा जिन्न जो पलक झपकते ही सब कुछ कर दे। इसे हथियार,अश्त्र शस्त्र कहना भी ठीक प्रतीत नहीं होता है। यह लोकतंत्र में जनता को मिला साफ सुथरा एक सभ्य साधन है जिसे काम में लेकर समाज में सच्चाई और भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था को बढावा दिया जा सकता है। आरटीआई कानून को पूजिये मत, न ही इससे किसी को अनावश्यक डराइये। इससे शासन ,समाज और लोकतंत्र में अपना और लोगों का विश्वास बहाल कीजिये।
पंचायती राज के पचास साल पूरे होने पर नागौर में होगा भव्य आयोजन
देश में पंचायतीराज की स्थापना को पचास वर्ष पूरे होने जा रहें हैं । 2 अक्टूबर 1959 को राजस्थान के नागौर में पंचायतीराज की स्थापना हुई। देश के प्रथम प्रधानमंत्री जबाहर लाल नेहरू ने इस दिन लोकतांत्रिक प्रणाली में जनता की सहभागिता और जिम्मेदारी बढ़ाने के इस अहम कार्य का शुभारम्भ किया था। नेहरू के ही समान कांग्रेस में दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने का गौरब पाने वाले डा मनमोहन सिंह इस स्वर्ण जयंती समारोह में शिरकत करेगें। कांग्रेस अघ्यक्ष और यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गाँधी भी इस गौरवशाली समारोह में उपस्थित रहेगीं।...मीना और महादेव की मेहर
भरतपुर जिले के गाँव नगला सिरसिया की पहचान आज देश की सीमाओं से भी आगे निकल गई है। इस गाँव में रहने वाले धाकड़ जाति के महिला ,पुरूषों ने अपने स्वरोजगार के काम से उजडते गाँव को एक बार फिर से मानों आबाद कर दिया है,जो इस बात का जीवंत प्रमाण है कि गाँव से शहरों की ओर होने वाला पलायन किसी समस्या का समाधान न होकर उसे बढाता ही है। ...रामनाम संकीर्तन भी चढ़ा टीआरपी की भेंट
रामधुन से शुरू हुआ भगवान के गुणानवाद का एक रूप कीर्तन भी आजकल टीआरपी की भेंट चढ चुका है। भले ही वो अधिकांश कम पढे लिखे लोगों के एक समूह का अपना लोकरंजक, मंनोरंजनपूर्ण कार्य है लेकिन अब उन्हें भी लगता है कि दर्शकों के बिना उनका भी काम नहीं चलने वाला है। ऐसे में प्रभू नाम स्मरण के रामधुनी कीर्तन दंगलों में आजकल नाटक और फिल्मों के द्विअर्थी संवादों की भरमार होती जा रही है। इतना ही नहीं नारी ने भी ऐसे दंगलों में अपनी उपस्थिति की खनक से मामले को और अधिक रोचक बना दिया है।...क्या हकदार को मिल पायेगा सवर्ण आरक्षण का लाभ
आजादी मिलने के बाद एक और आजादी के लिए संविधान में आरक्षण का प्रावधान किया गया था। आरक्षण का प्रावधान समाज के पिछडे तबकों को सामाजिक रूप से बराबरी का दर्जा देने के लिए किया गया। मगर आज असली गरीब और गरीब दिखाई देता है। इन समाजों के जागरूक और दबंग लोगों ने उसका राजनैतिक,नौकरियों के क्षेत्र में और अन्य सरकारी योजनाओं के रूप में जमकर फायदा उठाया है। इस बात के गवाह आज के वो हालात है जो इन समाजों की शैक्षिक और भौतिक दशा को दर्शाते है।...बीत गया एक और हैप्पी टीचर्स डे
शिक्षक और समाज का जो संबंध दिखाई पडता है वह ऐसा दिखता है मानो शिक्षक समाज पर हावी है । जबकि ये मात्र एक भ्रम है वस्तुस्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। अब तक समाज शिक्षक पर हावी रहा है और वह शिक्षक से यह काम लेता रहा है कि वह पुरानी सामाजिक मान्यताऐं, पुराने विचार चाहे वे ठीक हो या फिर नहीं आने वाली पीढियों के मन में शिक्षक उनका प्रवेश करा दे। जैसे ही वह कुछ विरोध की स्थिति में आता है आलोचना का शिकार बना लिया जाता है । शिक्षक दिवस को लेकर एक आंकलन।...Author info
