संजय स्वदेश
कश्मीरी आवाम से अहिंसा की उम्मीद क्यों?
कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग के रूप में शामिल वाला पूरे भारत की ओर से कश्मीर को क्या मिला है? वहां कश्मीर घाटी की हिंसा में मरने स्थानीय लोगों की खबरों हमें नहीं झकझोरती हैं। देश ने केवल यह दावा किया की कश्मीर हमारा है। लेकिन इस दावे के बाद भी पूरा कश्मीर उपेक्षित हो गया। भूख तो पशु भी बर्दाश्त कर सकते हैं, लेकिन उपेक्षा नहीं। फिर भला एक पूरी समुदाय उपेक्षित हो तो उसे अहिंसक होने की अपेक्षा कैसे की जा सकती है?
सेक्स क्षमता बढ़ाने की गलतफहमी से गधों पर संकट
'दो बैलों की कथा' प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी है। कहानी की शुरुआत में प्रेमचंद गधा पुराण से करते हुए बताते हैं कि कैसे गधा चुपचाप मेहनत करता है और मालिक की मार खाता है। सच कहें तो गधे जैसा मेहनती कोई अन्य पशु नहीं। खैर बदले दौर में गदहों की उपयोगिता कम हो गई थी। लेकिन आधुनिक जमाने में गधों के प्रति फिर से एक नया समाजिक गलतफहली फैलने से इसकी उपयोगिता बढ़ गई है।...महिलाएं बन गयी विकास की पहरुआ
कहते हैं कि राजनीति की चाबी से हर ताले खुलते हैं, परन्तु बिहार के समाज में महिलाओं को यह चाबी वर्षों से नहीं मिली थी। इक्कीसवीं सदी के पहले दशक के जाते-जाते करिश्मा हुआ। वर्ष 2001 में लोकतंत्र की सबसे निचली इकाई, ग्राम पंचायत में आरक्षण के माध्यम से महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करा दी गई।...Author info
