संजय तिवारी
पूंजी का भारतीय दर्शन
बिग बाजार के संस्थापक किशोर बियानी ने हाल में ही एक अखबार से बातचीत करते हुए कहा था कि वे ऐसी रणनीति पर काम कर रहे हैं जिससे किसान से माल खरीदकर किसान को ही बेच दिया जाए. यह रणनीति अगले कुछ सालों में व्यापक रूप धारण कर सकता है. यानी, किशोर बियाणी उस वणिक मानसिकता को पुनः जिन्दा करना चाहते हैं जो भारतीय व्यापार की सोच में विद्यमान है. लेकिन यहां एक गड़बड़ है.
मिश्रित संस्कृति या मायाजाल?
क्या भारत सचमुच एक मिश्रित संस्कृतिवाला देश है? या फिर ऐसा किसी खास उद्येश्य के तहत स्थापित किया जा रहा है. दिल्ली में आयोजित एक सभा में जो विद्वतजन मिले उनकी बहुत सी बातें सोचने पर मजबूर करती हैं. किसी को शक नहीं कि भारत एक खास प्रकार की जीवनशैली जीनेवाले लोगों का देश है जो रूढ़ होकर आज अधिकांश हिन्दू के रूप में पहचाना जाता है. जिस प्रकार के प्रतिक्रियावादी हिन्दुत्व को भारतीय जीवनदर्शन के रूप में प्रचारित किया जा रहा है उसे जस के तस स्वीकार करने में बहुत पेंच है. ...सहज सरल जीवन का दर्शन
मध्यस्थ दर्शन का मूल सिद्धांत सह-अस्तित्ववाद है. खुद आचार्य नागराज कहते हैं "आज के भौतिकवाद का असर हम धरती पर देख रहे हैं कि क्या हुआ है. धरती बीमार हो गयी है. इस बीमार धरती को ठीक करने में हमारा आदर्शवाद भी नाकाम रहा है." यहां आदर्शवाद के नाम पर आचार्य नागराज उस वैदिक परंपरा की ओर संकेत कर रहे हैं जिसमें जाकर भारतीय मानस अपनी समस्याओं का हल खोजता रहा है. बाबा का यह सवाल तब ज्यादा ध्यानाकर्षण करता है जब हम खुद अपने चारों ओर परिस्थितियों को बद से बदतर होते हुए देखते हैं. फिर सह-अस्तित्ववाद अथवा मध्यस्थ दर्शन में क्या नया है?...चांदनी चौक से चकारसी
चकारसी कुल जमा चार घरों का पुरवा है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गजरौला से कोई २५ किलोमीटर दूर चकारसी आना अनायास नहीं है. यहां जीवन विद्या का सालाना सम्मेलन चल रहा है. चार दिनों तक जीवन विद्या से जुड़े लोग अपने अनुभव बताएंगे और आगे की योजनाओं के बारे में निर्णय करेंगे. उस पर बाद में आते हैं, पहले चकारसी तो पहुंच जाएं....रतन टाटा की नैनो राजनीति
नैनो अब इस देश के राजनीति का हिस्सा हो गयी है. इस राजनीति के मुख्य पात्र खुद रतन टाटा बन गये हैं. पश्चिम बंगाल से अपना तंबू उखाड़कर गुजरात पहुंचे रतन टाटा ने आज शाम प्रेस कांफ्रेस के दौरान जिस दो प्रकार के 'एम' की चर्चा की उससे साफ हो गया कि वे गुजरात वाले 'एम' के पास अकारण नहीं गये हैं. यह बंगाल वाले 'एम' को एक संदेश है कि आपके राज्य में जगह नहीं है तो गुजरात हमारे लिए बहुत बेहतर है. ...कंधमाल में क्या हुआ?
वह २३ अगस्त की शाम थी. स्वामी लक्ष्मणानंद अपने आश्रम के स्टोर रूम में थे. बगल वाले कमरे उन्हीं के वनवासी कन्या छात्रावास की छात्रा लक्ष्मी (बदला हुआ नाम) कुछ दैनिक कामों को निपटा रही थी. इतने में चार नकाबपोश लोग अंदर दाखिल होते हैं. चारों के सामने पहले लक्ष्मी आती है. चारों उसे चुप रहने का इशारा करते हुए वहां से जाने के लिए कहते हैं. कदमों की आहट और सन्नाटे से स्वामी लक्ष्मणानंद भी थोड़े चौकन्ने हो जाते हैं. लगता है उन्हें इस बात का अहसास हो गया था कि कुछ लोग अंदर आये हैं जिनके इरादे नेक नहीं हैं. ...हमारी तुलना सिमी से मत करिए
बजरंग दल एक बार फिर चर्चा में है. विभिन्न राजनीतिक दल यह मांग कर रहे हैं कि सिमी पर प्रतिबंध है तो बजरंग दल पर क्यों नहीं होना चाहिए? इस सवाल के जवाब में बजरंग दल के संयोजक प्रकाश शर्मा का कहना है कि सिमी से उनके संगठन बजरंग दल की तुलना करना गलत है. उनका कहना है कि आप एक देशद्रोही संस्था की एक देशभक्त संस्था से तुलना नहीं कर सकते. ऐसे और भी सम-सामयिक सवालों पर बजरंगदल प्रमुख प्रकाश शर्मा से खास बातचीत....मण्डप में कन्डोम गान
टीवी का विज्ञापन सबने देखा होगा जिसमें शादी के मण्डप में एक मोबाईल पर वह शाश्वत तराना गूंजता है जो आज के इस भोगवादी युग में प्राणरक्षा का एकमात्र उपाय बन गया है. तरह-तरह की मुरकी और फिरकी मारते हुए रूपर्ट फर्नांडीज की धुन पर गायक विजय प्रकाश बार-बार कण्डोम शब्द को आपकी रगों में उतार देने की कोशिश करते हैं. ...Author info
