संजय तिवारी
जनसत्ता होने का दर्द
मौत का व्यावहारिक अर्थ है विराम, अंत या संवेदनशून्यता. शरीर से संवेदना चली जाए तो शरीर की मौत हो जाती है. शरीर में संवेदनाओं का सारा स्रोत आत्मा है तो अखबार की आत्मा होती हैं खबरें. अगर अखबार खबरशून्य हो जाएं तो समझना चाहिए कि वह अब संवेदनशून्य है. किसी जमाने में मील पत्थर गाड़नेवाला जनसत्ता आज ऐसी ही संवेदनशून्य अवस्था में है.
पाक से पहली लड़ाई में परास्त
मुंबई पर आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच पहले दौर का जो कूटनीतिक युद्ध शुरू हुआ था, उसमें भारत लगभग हार गया है. सामरिक भूमि में पाकिस्तान कहां ठहरता है यह तो बाद की बात है लेकिन आज की कूटनीतिक परिस्थितियों में पाकिस्तान अपने नौसिखिए नेताओं के भरोसे भी भारत पर हावी दिखाई देता है. यह भारत के राजनेताओं की ही नहीं बल्कि यहां के कूटनीतिज्ञों की भयावह हार है. मुंबई हमले से पहले खुफिया एजंसियों की नाकामयाबी सामने आयी थी तो हमले के बाद भारत का कूटनीतिक वर्ग पाकिस्तान के सामने बुरी तरह परास्त हो गया है....जमात-उद-दावा की भाषा बोल रहे हैं अंतुले
अब्दुल रहमान अंतुले न केवल देश के अल्पसंख्यक मंत्रालय के मंत्री हैं बल्कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री भी रह चुके है. इसलिए वे अच्छी तरह से जानते हैं कि इस तरह के बयान का क्या मतलब होता है? सदन में हेमंत करकरे की मौत पर सवालिया निशान लगाकर उन्होंने वह लाईन अख्तियार कर ली जिस पर जमात-उद-दावा मुंबई हमलों के बाद लगातार प्रचारित कर रहा है, और जमात-उद-दावा को ही नहीं पूरे पाकिस्तान को ऐसा जोरदार हथियार दे दिया है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर आतंकवाद के खिलाफ भारतीय अभियान की भद्द पिट जाएगी....क्या पढ़ा रहा है पाकिस्तान?
पाकिस्तान में इस्लामिक आतंकवाद की जड़ें क्या केवल चरमपंथी मदरसों और तंजीमी शिक्षण प्रणाली में हैं? या फिर हकीकत कुछ और है. पाकिस्तान के राष्ट्रपति "स्टेटलेस आतंकवाद" की बात कर रहे हैं लेकिन खुद स्टेट अपने बच्चों को, पाकिस्तान के भविष्य को क्या पढ़ा रहा है? पाकिस्तान में स्कूली शिक्षा के लिए पाठ्यक्रम तैयार करने का काम इस्लामिक रिपब्लिक आफ पाकिस्तान की संस्था फेडरल बोर्ड आफ इंटरमीडिएट एण्ड सेकेण्डरी एजूकेशन का है. जैसा कि पाकिस्तान की स्थापना के साथ ही "इस्लामिक रिपब्लिक" जुड़ा हुआ है इसलिए यहां स्कूली पाठ्यक्रम में इस्लामियत शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा है. ...मीडिया को मिली 'आतंकवाद' की संजीवनी
आतंकवाद और मंदी का आपस में कोई संबंध हो सकता है? चलिए इसमें एक कड़ी और जोड़ देते हैं-राजनीति. अब कोई संबंध बनता है? अभी भी पूरा संबंध नहीं बना है. इसलिए इसमें मीडिया को भी शामिल कर लेते हैं. अब पूरी कड़ी बन जाती है- मंदी के इस दौर में जब चारों ओर संकट के बादल छाये हैं ऐसे में भारत में आतंकवादी हमलों ने मीडिया और विज्ञापन एजंसियों को अपना व्यापार बनाये रखने का मौका दे दिया है. यह सब इसलिए संभव हो पाया है क्योंकि राजनीतिक दल चुनाव मैदान में थे. ...मंहगे पड़े मल्होत्रा
दिल्ली में भाजपा की दुर्गत हुई है. भाजपा के सीएम इन वेटिंग स्थाई रूप से वेटलिस्ट में रह गये. शीला दीक्षित दिल्ली की जीत को कांग्रेस की जीत कह रही हैं और लोग इसे शीला दीक्षित की जीत बता रहे हैं. ठीक वैसे ही जैसे गुजरात में नरेन्द्र मोदी ने अपनी जीत को भाजपा की जीत बताया लेकिन लोगों ने उसे नरेन्द्र मोदी की जीत करार दिया. दिल्ली में शीला उत्तर कांग्रेस प्रतिष्ठान हैं, ठीक वैसे ही जैसे गुजरात में नरेन्द्र मोदी....अ चुतिया नंदन अर्थात अच्युतानंदन
जी हां. अच्युतानंदन. केरल के 85 वर्षीय मुख्यमंत्री. अपने एक बयान से 'देशभक्तों' के कोपभाजन के शिकार बने हुए हैं. मुंबई में आतंकी हमले के बाद वे शहीद मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के घर सांत्वना देने गये थे. मेजर के दुखी पिता ने उन्हें यह कहते हुए घर में नहीं घुसने दिया कि राजनीतिक लोग कुत्ते होते हैं. यह अच्युतानंदन ने भी सुना कि उन्हें कुत्ता कहा जा रहा है. उस समय तो वे कुछ नहीं बोले. वापस लौट गये. लेकिन अगले दिन बंगलौर में ही एक टीवी पत्रकार ने उनसे बात की. उन्होंने टीवी पत्रकार से कहा- ...Author info
