संजय तिवारी
दाना, पानी, इंटरनेट और एक साल का विस्फोट
विस्फोट.कॉम को एक साल पूरे हो गये. साल भर पहले जब २५ फरवरी को पहली पोस्ट प्रकाशित की थी तब मैं प्रयोग कर रहा था. बहुत मजेदार प्रयोग. लोगों को लगता है कि संजय तिवारी नाम के किसी आदमी ने विस्फोट को जैसी शक्ल दी है वह बहुत समझदार आदमी होगा. ऐसा नहीं है. मेरी समझ तो औसत भी नहीं है. हमेशा अनिर्णय में रहता हूं. लोगों को समझ भी नहीं पाता. लोग तो बहुत चालाक होते हैं. अपना अच्छा बुरा समझते हैं और बड़ी समझदारी से अपने बारे में निर्णय लेते हैं. अपने साथ ऐसा कुछ नहीं है.
जय हो ! गरीबी और गुलामी तेरी जय हो
एक आस्कर के लिए तरसते देश में अगर आठ आस्कर एकसाथ आ जाए तो मीडिया का पगलाना नाजायज नहीं है. लेकिन यह सवाल कोई क्यों नहीं उठा रहा है कि यह आस्कर भारत को मिला है या फिर भारत पर बनी किसी फिल्म पर? यह सवाल नाजायज नहीं है. स्लमडाग को मिला पुरस्कार भारतीय फिल्म इंडस्ट्री को मिला पुरस्कार क्यों मान लें? ऐसा क्यों हुआ कि यह फिल्म भारत के सिनेमाघरों में सोई रही लेकिन विदेशों में इसने खूब चांदी कूटा है? ...डाटकाम की डगर पर राजनीति
अगर आप इंटरनेट उपभोक्ता हैं और दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल में बीजेपी टाईप करते हैं तो मुख्यपेज पर ही प्रमुख परिणामों के बगल में आपको एक सर्च रिजल्ट मिलता है जिसमें लिखा है- जानिए कैसी होगी-भाजपा-एनडीए. क्या यह सत्ता में आयेगी? प्रधानमंत्री पद के लिए आडवाणी. और इतना सब लिखे के नीचे एक वेबसाईट का लिंक दिखाई देगा. यह लिंक है- एलकेअडवानी.इन। आप भाजपा खोजने गये थे और आपको आडवाणी मिल जाते हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि यह प्रायोजित लिंक होता है जिसके लिए सर्च इंजन पैसा लेता है. यह १५ वीं लोकसभा के पूर्व का मौसम है जिसमें डाटकाम जगत भी पूरी तरह से शामिल हो गया है. भारतीय गणतंत्र के इतिहास में तकनीकि की यह दूसरी ताकतवर उपस्थिति है जो आनेवाले दिनों में न केवल मीडिया बल्कि राजनीति को भी पूरी तरह से बदल कर रख देगी....तालिबान का 'अ'न्याय
दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ए पी शाह ने १५ फरवरी २००९ को हाईकोर्ट के कामकाज पर एक रिपोर्ट जारी की. रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने अप्रैल २००७ से मार्च २००८ तक ३,३२,१४१ केसों पर सुनवाई की. मार्च २००८ तक ७४, ५९९ केसों पर सुनवाई शुरू ही नहीं हो सकी थी. कोई ६०० मुकदमें ऐसे हैं जो २० साल से अधिक समय से लंबित हैं. दिल्ली हाईकोर्ट साल में साल के ३६५ दिन में २१३ दिन काम होता है. आठ घण्टे की शिफ्ट होती है जिसमें औसत ५ घण्टे १५ मिनट ही कार्रवाई होती है. सब मिला लीजिए और एक आंकड़ा निकालिये कि दिल्ली हाईकोर्ट जिस रफ्तार से काम कर रहा है और उसके पास जितने केस हैं उन्हें निपटाना हो तो कितना समय लगना चाहिए? ४६६ साल. ...वेलेन्टाईन का भूत
हर आमचुनाव से पहले मतदाता सूची के नवीनीकरण का काम होता है. इस बार जो नवीनीकरण हुआ है उसमें १४ करोड़ नौजवान जुड़े हैं. इन १४ करोड़ नौजवानों में ८ करोड़ ऐसे हैं जो इंटरनेट का यदा-कदा प्रयोग करते हैं. जाहिर सी बात है अभी-अभी इन नौजवानों ने १८ साल की दहलीज पार की है. इससे कुछ जादा ही अगली मतदाता सूची में देश के जिम्मेदार नागरिक बगेंगे. अंदाज ऐसा लगता है कि कोई ३० से ३५ करोड़ किशोर और नौजवान ऐसे हैं जिनकी उम्र १८ के आगे-पीछे है जिनमें अधिकांश इंटरनेट की आधुनिक संचार प्रणाली से जुड़े हैं....Author info
