संजय तिवारी
बड़ा घराना, छोटा काम
देश का मारवाड़ी समुदाय न होता तो आज शायद हिन्दी की दुर्दशा ज्यादा दर्दनाक होती. ज्ञान को पूंजी का आधार ही नहीं बल्कि पूंजी का सम्मान भी चाहिए. मारवाड़ी समाज ने अपनी भाषा को पूंजी का यह सम्मान दिया. देवनागरी लिपी को ऐसा मानद सम्मान देनेवालों में स्वर्गीय के के बिड़ला भी शामिल थे. उनके प्रकाशन समूह हिन्दुस्तान टाईम्स मीडिया ने बाजार की विपरीत आंधी के बीच हिन्दुस्तान का हिन्दी स्वरूप बनाये रखा. अगर दिल्ली की बात करें तो उसके प्रतिद्वंदी (अब शायद नहीं) टाईम्स प्रकाशन ने हिन्दी को हिन्गलिस बनाने की जैसी "साहसिक" पहल की है हिन्दुस्तान लिपी और शब्दों के स्तर पर अपने स्तर को नीचे नहीं उतारा. बिड़ला जी शायद जानते थे तेवर भाषा के कलेवर में ही छिपा होता है, इसलिए इसकी पवित्रता बनाये रखना बहुत जरूरी है.
उमा का समर्पण आडवाणी के नाम
उमा भारती आडवाणी को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहती है. उन्होंने दो दिन पहले आडवाणी को एक पत्र लिखकर कहा है कि 'आप आदर्श और प्रधानमंत्री पद के लिए सर्वथा योग्य हैं. इसलिए हम बिना शर्त आपका समर्थन करते हैं.' लोग कुछ और मतलब न निकालने लगें इसलिए साथ में यह पुछल्ला भी जोड़ दिया कि हमारी पार्टी का न तो भाजपा में विलय होगा और न ही वे भाजपा में वापिस होने के बारे में सोच रही है. ...अंधा मोची भागीरथ
भगीरथ की कहानी उस भारत की कहानी है जो भारत की सामाजिक क्रांतियों की जड़ में बैठे तलछट को एकदम सामने लाकर रख देता है. उसका जीवट यह तो हो सकता है कि आजन्म अंधा होने के बावजूद ५८ साल की उम्र में जूतों को सिलता है लेकिन उसका यह कर्म इतना स्वाभाविक चयन भी नहीं है. ...जमकर होली मनाईये और पांच बार नहाईये
दैनिक भास्कर समूह को पानी की बड़ी चिंता है. होनी भी चाहिए. अगर आप एक कारपोरेट मीडिया हाउस हैं तो आपकी कोई सोशल रिस्पांसबिलिटी होनी ही चाहिए. दैनिक भास्कर की यह कारपोरेट चिंता व्यक्त हो रही है. वे कह रहे हैं कि होली खेलने पर पानी बर्बाद होता है. इसलिए आप तिलक होली खेलिए. तिलक लगाईये और होली मना लीजिए. क्यों पानी की ऐसी बर्बादी करते हैं? यह सवाल अकेले भास्कर समूह नहीं कर रहा है. दर्जनों एनजीओ होली के आस-पास ऐसे सवाल उठाते हैं. आपके अंदर बार-बार यह अपराध बोध पैदा करने की कोशिश करते हैं कि त्यौहार और उत्सव मनाकर आप बहुत बड़ा अपराध कर रहे हैं....Author info
