संजय तिवारी
एक लोहियाइट का घोषणापत्र
लंबे समय बाद मुलायम सिंह के किसी काम पर अमर सिंह का असर दिखाई नहीं देता. शनिवार को लखनऊ में अपनी पार्टी का घोषणापत्र जारी करते हुए मुलायम सिंह यादव ने जो कुछ कहा उससे देश के दोनों शीर्ष राजनीतिक दल तिलमिला गये हैं. समाजवादी पार्टी के घोषणापत्र को दोनों ही बुरा भला कह रहे हैं. कांग्रेस कह रही है मिनट भर से पहले इसे खारिज कर दो भाजपा कह रही है कि समाजवादी पार्टी देश को अठारहवीं सदी में ले जाना चाहती है.
यह जरनैल सिंह 'भिण्डरावाले' नहीं है, लेकिन...
वह भी एक जरनैल सिंह ही थे जिनके कारण 84 के सिख विरोधी दंगों की पृष्ठभूमि बनी तो दूसरे जरनैल सिंह ने कांग्रेस के माथे पर दंगों का दाग फिर से ताजा कर दिया है. लेकिन यह जरनैल सिंह भिण्डरावाले नहीं, जूतावाले हैं. कांग्रेस मुख्यालय में घुसकर जरनैल सिंह ने जो कुछ किया वह न तो इत्तेफाक था और न ही अचानक आया गुस्सा. परिस्थितियों को देखें तो साफ होता है कि जरनैल सिंह जानबूझकर सोची समझी रणनीति के तहत कांग्रेस मुख्यालय गये थे और भिण्डरावाले की तरह उनके हाथ में बम भले ही न रहा हो लेकिन बूट तो था ही जिसे उन्होंने चलाकर पूरे देश में कोहराम मचा दिया....कितना आम है यह आमचुनाव ?
एक महीना पहले सेन्टर फार मीडिया स्टडीज (सीएमएस) की रिपोर्ट आयी थी कि पंद्रहवीं लोकसभा के लिए होनेवाले आमचुनाव में एक हजार करोड़ रूपये खर्च होंगे. सीएमएस का आंकलन यह भी है कि कोई ढाई सौ करोड़ इसमें ऐसी रकम होगी जो अवैध तरीके से खर्च की जाएगी. इन अवैध तरीकों में शराब बांटने से लेकर बंदूक खरीदने तक सब कुछ शामिल होगा. जाहिर है यह भ्रष्टाचार है और इन कर्मों से लोकतंत्र की पवित्रता भंग होती है. लेकिन शेष साढ़े सात सौ करोड़ कहां खर्च होंगे? कौन लोग हैं जो इस आमचुनाव में खर्च होनेवाली बड़ी पूंजी पर हाथ साफ कर लेंगे? ...नर्क का द्वार नहीं है नया मीडिया
पिछले हफ्ते इसी दिन रविवार को हिन्दुस्तान की संपादक मृणाल पाण्डेय ने नये मीडिया के नाम पर एक लेख लिखा था. अपने लेखनुमा संपादकीय में उन्होंने और बातों के अलावा समापन किया था कि नया मीडिया घटिया और गैर-जिम्मेदार है. बाकी सारे लेख में वे जो कुछ कह रही हों पर इस एक वाक्य पर ऐतराज जताने का हक बनता है. नया मीडिया क्या है यह जानने से पहले यह जान लें कि मृणाल पाण्डेय की नये मीडिया के बारे में यह धारणा बनी क्यों?...Author info
