संजय तिवारी
गे परेड जारी है
दिल्ली के जंतर-मंतर पर देश के कुछ हिस्सों से आये समलैंगिक लोगों ने परेड किया और अपने उस हक को पाने की कानूनी मांग की जिसका कोई नैतिक आधार नहीं है. वे नैतिकता की बात भी नहीं कर रहे हैं. वे एक खास कानून की बात कर रहे हैं. एक ऐसा कानून जो कानूनन अप्राकृतिक संबंध बनाने से उनको रोकता है और देश में बैठे कुछ अखबार मालिकों, व्यापारियों और नौकरशाहों को धन कमाने के रास्ते में रोड़ा बना हुआ है.
माओवादियों पर प्रतिबंध तो सज्जन जिंदल पर क्यों नहीं?
लालगढ़ की लड़ाई ने अचानक ही भारत में माओवादियों को फिर चर्चा में ला दिया है. लालगढ़ के संग्राम को आधार बनाकर आनन-फानन में सरकार ने माओवादियों पर प्रतिबंध लगा दिया और ना-नुकुर का नाटक करते हुए आखिर सीपीएम ने भी पश्चिम बंगाल में माओवादियों को प्रतिबंधित मान लिया. लालगढ़ में हिंसा पर उतारू माओवादियों पर प्रतिबंध लगाकर सरकार अपने आप को सफल मान रही है तो फिर सज्जन जिंदल पर क्यों प्रतिबंध नहीं लगना चाहिए? आखिर लालगढ़ की समस्या के मूल में तो सज्जन जिंदल ही है....आडवाणी को अकेला छोड़ देने का दुख
सुधीन्द्र कुलकर्णी भाजपा के लिए नया नाम नहीं है. भाजपा के लिए पहली बार यह नाम तब सिरदर्द बना था जब इनकी सलाह पर भाजपा के कट्टरपंथी नेता इस्लामाबाद जाने पर उदार हो गये और जिन्ना को देशभक्त बता आये थे. आडवाणी को उसका खामियाजा अपने पूरे राजनीतिक कैरियर को दांव पर लगाकर भुगतना पड़ा था. लेकिन सुधीन्द्र कुलकर्णी आडवाणी के विश्वसनीय सिपहसालार बने रहे. और इस बार आमचुनाव में उन्होंने आडवाणी के पूरे प्रचार अभियान का जिम्मा संभाला. अब इन्हीं कुलकर्णी को भयानक दुख ने घेर लिया है कि संघ ने आडवाणी का कोई सहयोग नहीं किया इसलिए वे प्रधानमंत्री नहीं बन सके. ...गोविन्दम शरणम गच्छामि
2 जून को भाजपा के बनारस कार्यालय में कलराज मिश्र प्रेस से बात कर रहे थे. अचानक वहां अफरा-तफरी मच गयी. चारो ओर कोलाहल गूंजा- गोविन्द जी आये है, गोविन्द जी आये हैं. प्रदेश कार्यालय में मौजूद सारे कार्यकर्ता उनको लेने पहुंचे. आनंद और अफरातफरी के इस माहौल में कलराज मिश्र की प्रेस कांफ्रेस पीछे छूट गयी. गोविन्द जी आये, मिठाई खाई और वापस चले गये. नौ साल बाद गोविन्दाचार्य का इस तरह बनारस भाजपा कार्यालय में प्रवेश न तो अचानक है और न ही अनायस. जो कुछ हुआ है उसके पीछे संघ के कुछ आला नेताओं की मर्जी है जो अब भाजपा के पतन को उत्थान में बदलने की मंशा रखते हैं....Author info
