संजय तिवारी
परमाणु परीक्षण पर संथानम के सवाल
डीआरडीओ से जुड़े वैज्ञानिक के संथानम ११-१३ मई १९९८ को किये गये पोखरण-२ के टेस्टिंग ग्राउण्ड इंचार्ज थे. परीक्षण के ग्यारह साल बाद उन्होंने लो यील्ड (कम प्रभाव) पैदा होने की बात कहके देश की परमाणु क्षमता पर जो सवालिया निशान खड़ा किया है क्या उस पर इस देश में बहस हो पायेगी? क्या लोगों को संथानम के आरोपों की सच्चाई का पता चल पायेगा? और क्या संथानम से पहले इस परीक्षण पर पहले किसी ने सवाल उठाया है?
भाजपा के (अ)नाथ राजनाथ
जिस दिन शिमला में भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने जसवंत सिंह को पार्टी से निकालने की सूचना दी उस दिन दूर आगरा में भाजपा के पूर्व उपाध्यक्ष और राम मंदिर आंदोलन के सह-नायक कल्याण सिंह मुलायम सिंह यादव के साथ लाल टोपी लगाये समाजवाद को सर्वव्यापक करने की रणनीति तैयार कर रहे थे. जब कल्याण सिंह ने यह खबर सुनी तो उन्होंने कहा कि भाजपा खत्म हो जाएगी. जो सार्वजनिक रूप से नहीं कहा वह यह कि इस खात्मे के लिए राजनाथ सिंह पूरा प्रयास कर रहे हैं. यह राजनाथ सिंह का ही कुशल नेतृत्व था कि किसी जमाने में भाजपा कार्यकर्ताओं के नाक की बाल रहे कल्याण सिंह बुरी तरह अपमानित होकर दो दो बार पार्टी से बाहर चले गये. ...इंटरनेट पर हिन्दीः मिथक और यथार्थ
अपने वर्तमान यूनिकोडित स्वरूप में हिन्दी का इंटरनेट पर अवतरण इंटरनेट पर हिन्दी के आगाज की कहानी शुरू करता है. यूनिकोड मानक अपनाने से पहले भी हिन्दी में वेब पन्ने बनते थे लेकिन उनका बनना न बनना एक जैसा ही होता था. जो जानकारी उपलब्ध है उसके अनुसार अक्टूबर 2002 में पहली बार हिन्दी.ब्लागस्पाट.कॉम पर विनय जैन नामक व्यक्ति ने पहली बार यूनिकोडित हिन्दी में कुछ शब्द लिखे. इसके बाद वे नियमित लिखने लगे. विनय जैन के बाद दूसरे व्यक्ति आलोक कुमार हैं जिन्होंने हिन्दी में ब्लाग लिखना शुरू किया. उनका नौ-दौ-ग्यारह नाम का ब्लाग भारत में शुरू किया गया पहला ब्लाग बन गया क्योंकि विनय जैन अमेरिका में रहते हैं. कुछ शब्दों के सहारे इंटरनेट पर अवतरित होनेवाली हिन्दी ने सात साल के भीतर क्या उत्साहजन प्रगति की है?...अब क्या बोलते हो पण्डित?
प्रभाष जोशी अभी अभी 73 के हुए हैं. 73 की उम्र में अक्सर लोग बुढ़ा जाते हैं. लेकिन उस दिन गांधी शांति प्रतिष्ठान में जिसने भी प्रभाष जोशी को देखा होगा उसे इतना तो आभास हुआ ही होगा कि वे न तो बुढ़ाये हैं और न ही सठियाये हैं. इन दोनों के उलट वे शिशुवत उत्साही हो चले हैं. उम्र के विपरीत का यह व्यवहार एक बार को मन में डर भी पैदा करता है लेकिन जो प्रभाष जोशी को जानते हैं वे यह भी जानते हैं कि जीवन के उतार-चढ़ाव में वे समग्रता की उस पायदान पर जा खड़े हुए हैं जहां पहुंचना एक ही जीवन में अक्सर लोगों के लिए नामुमकिन होता है....आडवाणी अड़े तो टूट जाएगी भाजपा
राजनीतिक गलियारों में राजनीतिक सरगर्मियां नहीं होंगी तो क्या होगा? लेकिन कभी कभी ऐसा वक्त भी आता है जब पत्रकार जानबूझकर लिखते हैं कि राजनीतिक गलियारों में सरगर्मियां तेज हो गयी हैं. आजकल एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी में ये "राजनीतिक सरगर्मियां" तेज हो गयी हैं. आज से तीन दिन के लिए शिमला में भाजपा नेता भविष्य का रोडमैप तैयार करने में जुट गये हैं. लेकिन अभी वे बैठक करने एकजुट होते नागपुर से सरसंघचालक का संदेश आ गया. संदेश भी कोई बहलाने फुसलानेवाला नहीं. नेतृत्व परिवर्तन का साफ संदेश. शिमला बैठक से ठीक एक दिन पहले मोहनराव भागवत ने यह संदेश क्यों दिया? क्या भाजपा में उथल पुथल भयावह स्तर पर है जिसे इस देश के राजनीतिक पत्रकार महसूस ही नहीं कर पा रहे हैं? ...भारतीय दृष्टि से ही निकलेगा समस्याओं का समाधान - समदौंग रिन्पोछे
यह महज संयोग ही नहीं है कि सरकार से इतर जो लोग विरोध के स्तर तक समाज कार्य में सक्रिय हैं उनमें से अधिकांश कहीं न कहीं महात्मा गांधी से प्रेरित हैं. 15 अगस्त की आधीरात जब देश आजादी का जश्न मना रहा था तो महात्मा गांघी बंगाल में बंटवारे से पैदा हुए शूल पर मरहमपट्टी कर रहे थे. आजादी के बाद भी समाज का वह शूल और नासूर कम नहीं हुआ है बल्कि और अधिक जटिल और भयावह हो गया है. इस शूल और नासूर को मिटाने के लिए जो लोग काम कर रहे हैं उनमें निर्वासित तिब्बती सरकार के प्रधानमंत्री समदौंग रिन्पोछे भी हैं. हिन्द स्वराज के लेखन के सौ साल पूरे हो गये हैं. स्वतंत्रता दिवस के इस मौके पर हमने समदौंग रिन्पोछे से बातचीत की. ...दस साल का हुआ ब्ला ब्ला ब्लाग
अंग्रेजी में जब आपको कुछ समझ में नहीं आये कि क्या क्या बोलना है और कैसे पूरी बात बतानी है तो ब्ला ब्ला ब्ला बोल दीजिए. बात पूरी हो जाती है. समझनेवाला समझ जाता है कि ऐसा ही कुछ होगा. ब्लाग शब्द इसी ब्ला ब्ला ब्ला का पूरक बनकर आया था. 1999 में पीटर मर्होल्ज ने वी ब्लाग (wee blog) नाम से अपनी निजी वेबसाईट को इसी तर्क के साथ इस्तेमाल करना शुरू किया जिसमें से जल्द ही wee शब्द हट गया और केवल ब्लाग बचा....भारतीय संसद के दो चेहरे: निशिकांत और नाथवानी
संसद का मानसून सत्र समाप्त हो गया. सरकारी काम काज के अलावा सदन में आखिरी दिनों में जो एक मुद्दा सबसे अधिक हावी रहा वह था रिलायंस के दो भाईयों का कृष्णा गोदावरी बेसिन में मिले गैस का बंटवारा. अनिल अंबानी और मुकेश अंबानी के बीच का यह झगड़ा भारतीय संसद में बहुत अनोखे तरह से दिखाई दिया. चरम तो तब हो गया जब गुरूवार को रिलायंस के बोर्ड मेम्बर परिमल नाथवानी ने स्वीकार कर लिया कि हां वे 'रिलायंस से जुड़े हुए हैं' इसलिए उन्होंने जमकर मुकेश अंबानी के पक्ष में राज्यसभा में आवाज उठायी. उन्होंने बहस में शामिल होते हुए यह साबित करने की कोशिश की कि मुकेश अंबानी अगर गैस की कीमत तय नहीं करेंगे तो इससे भारत की अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में बड़ी किरकिरी हो जाएगी. ...राखी सावंत का एक अदद स्वयंवर
इज्जत और मान मर्यादा की जिंदगी जीनेवाले एसीपी सावंत की होनहार बेटी राखी सावंत का सरेआम स्वयंवर और सगाई हुई तो पुलिस विभाग द्वारा आवंटित अपने फ्लैट में अकेले रहनेवाले वाले एसीपी सावंत पता नहीं क्या सोच रहे होंगे? वे शायद यह सोचकर खुश हों कि उनकी वह बेटी आज स्टारडम की बुलंदियों पर है जिसे उन्होंने सिर्फ इसलिए घर से निकाल दिया था कि वह आईटम गर्ल बनकर वीडियो में नाच रही थी. या फिर ऐसा भी हो सकता है कि स्टारडम की इन बुलंदियों को देखकर उनका सिर शर्म से झुक गया हो? यह तो एसीपी सावंत जानें लेकिन राखी सावंत ने साबित कर दिया है कि वह भारतीय महानगरों में पैदा हुई इस युग की ऐसी लड़की है जो कैरियर बनाना और अपनी जिंदगी के बारे में सबकुछ तय करना जानती है. ...Author info
