संतोष कुमार
जब हाथों में हो जाम, तो निधन पर शोक कैसा?
कांग्रेस का किस्सा सुनिए। रामनिवास मिर्धा का शुक्रवार को निधन हो गया। गहलोत सरकार ने एक दिन का राजकीय शोक रखा। दिल्ली में सोनिया-मनमोहन ने श्रद्धांजलि दी। पर अपने राजस्थान से ही राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी की कॉकटेल पार्टी में खूब जाम छलके।
ईको फ्रेंडली तो ठीक, पर वोटर फ्रेंडली कब?
भले बीजेपी आपस में लड़ती-भिड़ती रहे। पर पर्यावरण से दोस्ताना करेगी। नितिन गडकरी नित नए नुस्खे निकाल रहे। अभी अध्यक्ष पद पर न औपचारिक चुनाव हुआ, न राष्ट्रीय परिषद से अनुमोदन। पर इंदौर में बीजेपी कॉउंसिल की तैयारी ऐसे हो रही। मानो, अश्वमेघ यज्ञ का आयोजन हो। और आहुति के बाद यज्ञ का घोड़ा देश की राजनीति पर भगवा झंडा लहराएगा।...सठियाई व्यवस्था के बीच साठ का हुआ लोकतंत्र
गणतंत्र के सालाना जश्र को राजपथ सज गया। हर बार की तरह कदम से कदम मिलाते अपने जवान दिखेंगे। रंग-बिरंगी झांकियां होंगी। कुल मिलाकर भारत की अद्भुत क्षमता का प्रदर्शन होगा। पर आम आदमी को झलकियां पहले ही दिख गईं। जब कांग्रेस और शरद पवार ने महंगाई-महंगाई खेलने की ठानी। पिछले हफ्ते दस दिन बीत गए। पर चीनी हो या बाकी जरूरत के सामान। कीमतें कम होनी तो दूर, अलबत्ता बढ़ गईं।...राष्ट्रीय दल क्षेत्रीय मजबूरियां
कहते हैं, तोल-मोल के बोल। पर राजनीति में फार्मूला उल्टा। पहले बोल, फिर तोल-मोल। सो कांग्रेस हो या बीजेपी, अपने ही जाल में उलझ गईं। मकर संक्रांति के दिन जब यहीं पर राजनीति की खिचड़ी लिखी। तो ऑस्ट्रेलिया में भारतीयों पर नस्ली हमले की तुलना ठाकरे बंधुओं के कारनामों से की।...आओ आम आदमी को मूर्ख बनाएं
'राही मनवा दुख की चिंता क्यों सताती है। दुख तो अपना साथी है। सुख है एक छांव ढलती, आती है, जाती है...।' आम आदमी के लिए अपनी सरकार का यही संदेश। मंगलवार को टली केबिनेट कमेटी ऑन प्राइस (सीसीपी) की मीटिंग बुधवार को हो गई। पर नतीजा दोस्ती फिल्म के गीत जैसा ही।...मैंने सबको एक गाना सुनाया और झगड़ा खत्म
कल्चर के मामले में तो बीजेपी की सानी ही नहीं। अब नितिन गडकरी के हाथ कमान। सो गडकरी रोज नए फंडे गढ़ रहे। अब मंगलवार को रीजनल मीडिया के कुछ पत्रकारों से मिले। तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। यानी बिना फंड के फंडे चाहिए। तो गडकरी से मिलिए। महाराष्ट्र की राजनीति से मिले अनुभव के बेस पर ही बीजेपी जैसी राष्ट्रीय पार्टी चलाने की सोच रहे।...दंतहीन, विषहीन, सत्ताविहीन देवगौड़ा
तो आज की शुरुआत सवाल से। क्या अपनी राजनीति की जुबान ही भद्दी हो चुकी या सिर्फ जुबान की राजनीति हो रही है? माना, एचडी देवगौड़ा दंतहीन, विषहीन यानी सत्ताविहीन हो चुके। तो क्या बौखलाहट में किसी को भी डंक मारते रहेंगे। देवगौड़ा देश के पीएम रह चुके। पर कभी 'राष्ट्रीय' न हुए, न शायद होंगे।...भारतीय जनता पार्टी की चौथी कुर्सी
बदली आबोहवा में बीजेपी नए सफर को निकल पड़ी। गढ़ के रक्षक गडकरी ने गुरुवार को पदाधिकारियों की पहली मीटिंग ली तो मंच पर तिकड़ी नहीं, चौकड़ी बैठी। बीजेपी की सभी अहम मीटिंगों में पहले अध्यक्ष और दोनों सदनों के नेता बैठा करते थे।...तेलंगाना पर तिल तिल फंस रही है कांग्रेस
तेलंगाना मुद्दे ने सरकार का तेल निकाल दिया है. मंगलवार को तेलंगाना के सवाल पर दिल्ली में चिदम्बरम की मान्यताप्राप्त आठ राजनीतिक दलों के साथ बैठक हुई. पर आग बुझने का नाम नहीं ले रही. अलबत्ता तेलंगाना पर कांग्रेस और सरकार तिल-तिल फंसती जा रही है....मैडल वापसी काफी नहीं, 'राठौरों' से मुक्ति कब?
सोचो, मीडिया आवाज न उठाता। रुचिका केस में अदालती फैसले को दिन का घटनाक्रम मान आगे बढ़ जाता। तो क्या बात इतनी दूर तलक जाती? क्या 19 साल से कुंभकर्णी नींद सोई सरकार जागती? अब रुचिका के गुनहगार एसपीएस राठौर पर मुकदमों का बोझ। होम मिनिस्ट्री भी मैडल छीनने का फैसला कर चुकी तो यह अपनी मीडिया की वाहवाही नहीं।...कांग्रेस मार रही खर्राटे, बीजेपी करेगी पहरेदारी
नया साल आया, तो नई शुरुआत भी होगी। सो बीजेपी ने संकल्प लिया। अब संकल्प नया या पुराना, आगे बात करेंगे। पर बीजेपी वॉचडॉग की भूमिका निभाएगी। यों आडवाणी मनमोहन की दूसरी पारी में अपने सांसदों की सक्रियता पर खूब पीठ ठोक चुके। सो अबकी भूमिका में नया अंदाज क्या होगा, मालूम नहीं। पर बीजेपी दस का दम दिखाएगी।...Author info
