सरिता अरगरे
जंगल को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी
मध्यप्रदेश में जल्दी ही जंगलों का निजीकरण होने जा रहा है। राज्य सरकार ने जनता की सम्पत्ति को निजी कम्पनियों के हवाले करने की पूरी तैयारी कर ली है। सूबे के मुखिया शिवराज सिंह चौहान का मानना है कि पर्यावरण और प्राकृतिक संतुलन कायम रखना समाज की ज़िम्मेदारी है। उनकी नज़र में धन्ना सेठों से बेहतर इस ज़िम्मेदारी को भला कौन अच्छे ढंग से अंजाम दे सकता है? लिहाज़ा सरकार ने प्रदेश के जंगलों को प्राइवेट कंपनियों के हवाले करने का मन बना लिया है। खस्ताहाल वनों की सेहत सुधारने के लिये सरकार ने पीपीपी यानी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के ज़रिये पूँजी निवेश आमंत्रित करने का फ़ैसला किया है ।
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