शिरीष खरे
लड़ाई-पढ़ाई साथ-साथ
सरदार सरोवर बांध से नफा और नुकसान। पिछले दो दशकों से जारी इस बहस ने हमारे दिलो-दिमाग पर दो चित्र उभारे हैं। पहला चित्र बिजली, पानी और विकास की गंगा के रूप में तो दूसरा हजारों लागों के विस्थापन का दर्द लिए खड़ा है। नर्मदा घाटी के बाहर इस आंदोलन को जानने की उत्सुकता बनी रहती है। आंदोलन की दो रेखाएं सामानान्तर चल रही हैं। एक अहिंसा पर आधारित लड़ाई को जारी रखती है तो दूसरी रचनात्मकता का रास्ता दिखाती है।
टाईगर रिजर्व में जनजातियों का शिकार
मेलघाट सतपुड़ा पर्वतमाला की पश्चिमी पहाड़ी है जो महाराष्ट्र के जिला अमरावती की दो तहसील से जुड़कर बनी है. इस 2 लाख 19 हजार हेक्टेयर यानी मुंबई से 4 गुना बड़ी जगह पर कुल 319 गांव मिलते हैं. यहां करीब 3 लाख आबादी में से 80 फीसदी कोरकू जनजाति है. समुद्र तल से 1118 मीटर की ऊंचाई पर बसा यह हरा-भरा भाग `मेलघाट टाइगर रिजर्व´ कहलाता है. 1974 को `एम टी आर´ के नाम से मशहूर इस प्रोजेक्ट से तब 62 गांव प्रभावित हुए. आज भी 27 गांव के करीब 16 हजार लोगों को विस्थापित किया जा रहा है....चीनी की मिठास में घुलता बचपन
मराठवाड़ा से मुंबई लौटते वक्त, छुकछुक करती ट्रेन के साथ बचपन की कविता भी चल रही है- ``शिकारी आता है/ जाल फैलाता है/ दाने का लोभ दिखाता है/ लेकिन हमें जाल में नहीं फसना चाहिए.´´ लेकिन मराठवाड़ा में शोषण का जाल केवल फैला ही नहीं है, काफी कसा हुआ है इसलिए चिड़िया नहीं जानती कि वो जाल के अंदर है या बाहर. सभी शिकारियों ने हाथ मिला लिया है इसलिए उनका शिकार खुद-व-खुद खेतों तक आ जाता है. सरकारी आकड़ों के हिसाब से यहां गन्ना अधिक होता है. लेकिन ऐसा है नहीं, उससे कहीं अधिक यहां के खेतों में शोषण होता है लेकिन इसकी पैदावार का आकड़ा किसी के पास नहीं मिलता. ...Author info
