Umesh Chaturvedi
इस सरदार की समझ पर तरस आता है
जैसे-जैसे गरीबी कम होती है, महंगाई बढ़ती जाती है। अर्थशास्त्र की कोई स्थापना भले ही इसे मानने से इनकार करे, लेकिन मशहूर अर्थशास्त्री और योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ऐसा ही मानते हैं। विकसित देशों के योजनाकार जिस तरह 2008 में आई भयानक मंदी के लिए तेज आर्थिक विकास को ही जिम्मेदार मानते थे, मोंटेक सिंह का बयान भी कुछ ऐसा ही है। चूंकि अहलूवालिया अर्थशास्त्री हैं, प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार रह चुके हैं, देश के वित्त सचिव रह चुके हैं, सबसे बड़ी बात यह कि वे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में भी नौकरी कर चुके हैं। जाहिर है उनके विचार को तरजीह दिया ही जाएगा, लेकिन सवाल यह है कि क्या उनका यह विचार स्वीकार के काबिल है?
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