उमाशंकर मिश्र
आरटीआई का अपना-अपना इस्तेमाल
सूचना अधिकार कानून के चार साल पूरे होने पर दोनों तरह की समीक्षा सामने आ रही है. कुछ लोग इसे नागरिक को सांसद का दर्जा देनेवाला कानून बता रहे हैं तो कुछ मानते हैं कि इस अधिकार को नाकाम करने के लिए नौकरशाही ने ढाल विकसित कर ली है. दोनों ही बातों में सच्चाई है. आरटीआई का उपयोग कुछ लोग निहित स्वार्थ पूर्ति के लिए जरूर कर रहे हैं लेकिन नागरिक समाज के एक बड़े हिस्से को इसका व्यापक लाभ भी मिल रहा है.
पारंपरिक समाज से जनसंवाद की अनूठी पहल
राष्ट्रीय स्तर के आयोजन महज शहरों तक ही सीमित क्यों हैं, ग्रामीणों, वंचितों एवं दूरदराज के युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने की बातें आखिर कब तक एयरकंडिशंड कमरों में होती रहेगी? क्या जमीनी स्तर पर सीधे जनसंवाद के माध्यम से विकास की राह तैयार नहीं की जानी चाहिए? दरभंगा के दूरदराज के गंवई परिवेश में आयोजित राष्ट्रीय युवा समागम इन्हीं सवालों का सशक्त जवाब है।...Author info
