उमाशंकर मिश्र
भयावह भोपाल का २५ वां साल
तीन दिसंबर 1984 से लेकर अब तक भोपाल गैस त्रासदी को गुजरे हुए 24 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन आज भी इस इलाके में जाने पर लगता है मानों कल की ही बात हो. २४ साल बाद भी हर सुबह दुर्घटनावाले दिन की अगली सुबह ही नजर आती है. यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से ज़हरीले गैस रिसाव और रसायनिक कचरे के कहर का प्रभाव आज भी बना हुआ है। बच्चे अपंग होते रहे, मां के दूध में ज़हरीले रसायन पाये जाने की बात भी सामने आई, चर्म रोग, दमा, कैंसर और न जाने कितनी बीमारियां धीमा ज़हर बनकर आज भी गैस प्रभावितों को अपनी चपेट में ले रही हैं। भोपाल से लौटकर उमाशंकर मिश्र की रिपोर्ट-
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