Home | बात करामात | एंडरसन से बडे अपराधी हैं मोती सिंह

एंडरसन से बडे अपराधी हैं मोती सिंह

image

भोपाल गैस कांड के फैसले के बाद अब राजनैतिक फिजां में एक बार फिर गर्माहट महसूस की जाने लगी है। साल दर साल चुप्पी साधने के बाद अब सेवानिवृत लोगों की जुबानों के ताले टूटने लगे हैं। इसी क्रम में इस हादसे के वक्त भोपाल के तत्कालीन जिला दण्डाधिकारी ने खुलासा किया है कि उन्होंने यूनियन कार्बाईड के तत्कालीन प्रमुख वारेन एण्डरसन को तत्कालीन मुख्य सचिव के कहने पर भोपाल से बाहर भेजा था, उसकी जमानत का इंतजाम भी मोती सिंह के प्रयासों से ही हुआ था।

सवाल यह उठता है कि क्या ऊपरी दबाव में मोती सिंह ने जिला दण्डाधिकारी के पद की सारी वर्जनाएं तोड दी थीं। अगर उन्होंने एसा किया था तो क्या उन्होंने कागजों पर कहीं ‘‘ऊपरी दबाव‘‘ का जिकर किया था। जाहिर है नहीं किया होगा, वरना वह भी अब सामने आ चुका होता। जिला दण्डाधिकारी रहते मोती सिंह ने जो अपराध किया था, वह अक्षम्य अपराध की श्रेणी में है। केंद्र और राज्य सरकार को चाहिए कि वह मोती सिंह के इस बयान के आधार पर ही भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी मोती सिंह के खिलाफ आपराधिक षण्यंत्र का ताना बाना बुनने का मुकदमा दायर करे। जैसे ही मोती सिंह को आरोपी बनाया जाएगा, वैसे ही इस षण्यंत्र के हिस्से रहे लोग कीडों की तरह बिलबिलाते सामने आ जाएंगे। हालात देखकर यह लगता है कि सारी हकीकत सामने आने के बाद भी कांग्रेस नीत केंद्र और भाजपा की राज्य सरकार इस मामले में महज रस्मअदायगी के कुछ नहीं कर रही है।

नेहरू गांधी परिवार को आडे हाथों लिया गडकरी ने
सवा सौ साल पुरानी और देश पर आधी सदी से ज्यादा राज करने वाली कांग्रेस पर भाजपाध्यक्ष नितिन गडकरी ने जमकर बोछार की है। कांग्रेस अध्यक्ष पद को परिवार विशेष की संपत्ति बताते हुए उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह जैसे सीनियर लीडर चाहकर भी कांग्रेस के अध्यक्ष पद को नहीं पा सकते हैं, क्योंकि यह एक खास परिवार के सदस्यों के लिए रिजर्व है। अपना खुद का उदहारण देते हुए गडकरी ने कहा कि वे दिल्ली के लोगों, यहां की सडकों को भी नहीं जानते हैं, और उनके जैसे सामान्य कार्यकर्ता को पार्टी के अध्यक्ष जैसा ताज पहनाया गया है, जिससे साफ हो जाता है कि भारतीय जनता पार्टी आज भी अपने उसूलों पर चल रही है, और यहां प्रजातंत्र जिन्दा है। वैसे गडकरी की बात मंे दम प्रतीत होता है, आजादी के उपरांत कांग्रेस के शासन में प्रधानमंत्री और पार्टी के अध्यक्ष पद पर बिरले ही नेता होंगे जो वहां तक पहुंच पाए हों। सोनिया गांधी अगर सक्रिय राजनीति से सन्यास लेना चाहें तो उनके स्थान पर राहुल गांधी की ताजपोशी करने में कांग्रेस देर नहीं करने वाली।

शीला के मुंह लगना नहीं चाहते शिवराज
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई पर अब तक के सबसे बडे आतंकी हमले के बाद गृह मंत्री का पद खोने वाले पंजाब के राज्यपाल शिवराज पाटिल की मुश्किलें दिल्ली की निजाम शीला दीक्षित ने खासी बढा दी हैं। एक निजी टीवी चेनल पर अफजल के मामले में चर्चा के दौरान शीला ने कहा था कि हो सकता है, आप जो सोच रहे हों वह सही हो, ममला केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा अफजल को बचाने से संबंधित था। गृह मंत्रालय के 16 स्मरण पत्रों के उपरांत दिल्ली सरकार ने अफजल से संबंधित फाईल को एलजी यानी दिल्ली के राज्यपाल के पास भेजी है। शीला के द्वारा इशारों ही इशारों मेें जब तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल पर निशाना साधा गया है। इस मामले में बीते दिनों जब पंजाब के लाट साहेब शिवराज पाटिल से जब प्रतिक्रिया जाननी चाही गई तो उन्होंने दू टूक शब्दों में यह कहकर अपना पल्ला झाड लिया कि वे किसी के साथ ‘‘तू-तू, मैं-मैं‘‘ में नहीं पडना चाहते। पाटिल जानते हैं कि अगर उन्होंने कुछ भी कहा तो शीला दीक्षित के तेवर और भी तल्ख हो सकते हैं, जो आने वाले समय में पाटिल के लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं।limty.jpg

साथियों से उलझना जयराम की फितरत
पहले कमल नाथ के साथ तलवारें भांज चुके केद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री इन दिनों कोयला राज्य मंत्री श्रीप्रकाश जायस्वाल के साथ जोर अजमाईश में व्यस्त हैं। जयराम रमेश ने कोयला खदानों को ‘‘गो एरिया‘‘ और ‘‘नो गो एरिया‘‘ में बांट दिया है। जायस्वाल चाहते हैं कि नो गो एरिया में उत्खनन के बदले वे कंपनसेटरी फारेस्ट लगाकर इसकी भरपाई कर देंगे, किन्तु जयराम रमेश हैं कि मानते ही नहीं। हारकर जायस्वाल ने पूरे प्रकरण का विस्त्रत नोट बनाकर प्रधानमंत्री को प्रेषित कर दिया है। पीएमओ के सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री ने जयराम रमेश को इसकी समीक्षा करने को कहा, तो जयराम रमेश ने समीझा के पहले ही अपनी नीति के पक्ष में ठोस तथ्य पेश कर प्रधानमंत्री को संतुष्ट कर दिया। सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि अब प्रधानमंत्री दोनों ही मंत्रियों को साथ बिठाकर बात करने वाले हैं। नो गो एरिया में 48 फीसदी खदानें आती हैं जिसमें 619 मिलियन टन कोयले का उत्पादन होता है। इससे केंद्र को 20 हजार करोड रूपए का नुकसान और एक लाख से अधिक मजदूरों का रोजगार छिनने की उम्मीद है। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के नियम कायदों को समझकर जयराम रमेश ने अन्य सभी मंत्रालयों पर काबिज मंत्रियों के होश उडाकर रख दिए हैं।

शेषाद्रि के निशाने पर गडकरी
भाजपा के नए निजाम अपनी छःमाही भी नहीं पूरी कर पाए कि उनके खिलाफ असंतोष के स्वर प्रस्फुटित होने लगे हैं। राज्यसभा में टिकिट का बंटवारा गडकरी के लिए गले की फांस बनता जा रहा है। संघ के मुखपत्र आर्गेनाईजर के संपादक रह चुके शेषाद्रिचारी ने मुखर होकर गडकरी पर निशाना साधा है। यह पहला मौका है, जब पार्टी के अध्यक्ष के खिलाफ किसी ने सार्वजनिक तौर पर मोर्चा खोला हो। शेषाद्रिचारी का मानना है कि गडकरी के अध्यक्ष बनने के बाद जमीनी कार्यकर्ता उपेक्षित और मायूस है, पार्टी की छवि वैसी नहीं बन पा रही है, जैसी होना चाहिए। तरूण विजय को टिकिट देने का खुला विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि दो चार पत्र पत्रिकाओं में लेख लिखने वाले को टिकिट देने का वे विरोध करते हैं। गडकरी के करीबी सूत्र भले ही यह कह रहे हों कि शेषाद्रिचारी को राज्यसभा का टिकिट न मिल पाने से खफा होकर अर्नगल प्रलाप कर रहे हों, पर शेषाद्रिचारी ने मुखर विरोध कर पुरानी कहवात यहां चरितार्थ करने के मार्ग प्रशस्त कर दिए हैं, ‘‘बुढिया के मरने का गम नहीं, गम तो इस बात का है कि मौत ने घर देख लिया।‘‘

भरपूर चिकित्सक फिर भी सरकार लाचार
देश में चिकित्सक उत्पादन का खासा माहौल है। जहां तहां निजी और सरकारी आयुर्विज्ञान, आर्युवेदिक, होम्योपैथिक, यूनानी पद्यति वाले कालेज हर साल न जाने कितने चिकित्सक उगल रहे हैं, फिर भी सरकार के पास चिकित्सकों का टोटा साफ दिखाई दे रहा है। इसका कारण सरकार की गलत और अदूरदर्शी नीतियां ही हैं। सरकारी आंकडों पर अगर नजर दौडाएं तो पता चलता है कि देश में कुल साढे पांच लाख चिकित्सक हैं जिसमें साढे छः लाख चिकित्सकों की कमी है। देश में 34 हजार एमबीबीएस, 19 हजार एमडी या एमएस की सीट हैं। देखा जाए तो तीन हजार की आबादी पर एक चिकित्सक मौजूद है। चिकित्सकों की कमी को देखते हुए केद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों के समक्ष प्रस्ताव रखा है कि चिकित्सकों की सेवानिवृति की आयु को बढाकर 65 साल कर दिया जाए। अरे आजाद साहेब को कौन समझाए कि इससे कुछ नहीं होने वाला, चिकित्सा शिक्षा पूरी होने के उपरांत चिकित्सकांे का पंजीयन तब किया जाए जब वे एक साल तक गांव में अपनी सेवाएं दे दें। अगर एसा होगा तो हर साल लगभग चोंतीस हजार चिकित्सक देश के गांव में मरीजों के लिए उपलब्ध रहेंगे।

देश भर में चल रहे हैं चिडिया कौआ
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने खजूर के झाडों के बीच में उगते सूरज के स्टीकर लगाकर चलने वाली गाडियों को पकडकर रहस्योद्याटन किया है कि एक गिरोह दिल्ली यातायात पुलिस की मदद से भारी व्यवसायिक वाहनों से वसूली में रत था। देखा जाए तो देश भर में इस तरह का कारोबार फल फूल रहा है। हर एक ट्रक या बस चालक के पास छोटी सी डायरी अवश्य होती है, जिसमें उसके रूट में पडने वाले थानों के कर्मचारी, यातायात पुलिस और परिवहन विभाग के मातहत अपने अपने तरीके से हर माह की अलग अलग निशानी के स्टीकर या फिर एसे हस्ताक्षर कर देते हैं मानो चिडिया कौआ उड रहे हों। देश में बिना वैध परमिट, अनुज्ञा, कर चोरी के साथ ही साथ ओव्हर लोडिंग का कारोबार इसी आधार पर जमकर हो रहा है। एसा नहीं कि देश और सूबों के शासकों विशेषकर परिवहन मंत्रियों को इस बात की जानकारी न हो, बावजूद इसके इस तरह की लाबी जबरिया वसूल पर लगी हुई है। सूबों की परिवहन जांच चौकियां दलालों के हवाले हैं। इन चौकियों में अपनी कद काठी से उंचा लट्ठ रखकर गुण्डों की फौज खडी दिखाई दे जाती है। मजे की बात तो यह है कि देश भर की जांच चौकियों से बाकायदा ‘‘चौथ‘‘ की राशि नेता, जनसेवक, प्रशासन, पुलिस के साथ ही साथ प्रजातंत्र के चौथे स्तंभ ‘‘मीडिया‘‘ को भी निर्बाध रूप से पहुंचती है, यही कारण है कि इनका धंधा फल फूल रहा है।

कुछ क्लिंटन ने दिया कुछ ओबामा देंगे

दुनिया के चौधरी अमेरिका के प्रेजीडेंट बराक ओबामा जल्द ही भारत की यात्रा पर आ सकते हैं। भारत सरकार इस बात के लिए अंदर ही अंदर खुश हो रही है कि उसका सौभाग्य है कि दुनिया का चौधरी अमेरिका का पहला नागरिक ‘‘अंकल सेम‘‘ उसका आथित्य स्वीकार कर उसे कृतार्थ करने वाला है। गौरतलब है कि इसके पूर्व जब तत्कालीन अमेरिकी प्रेजीडेंट बिल क्लिंटन भारत दौरे पर आए थे, तब उनके सुरक्षा तंत्र को लेकर भारत में खासा बवाल कटा था। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि पर क्लिंटन के जाने के पूर्व उनके सुरक्षा दस्ते के श्वानों ने तलाशी ली थी। कुत्ता तो कुत्ता ही होता है, भले ही वह महामहिम की सुरक्षा व्यवस्था में क्यों न काम कर रहा हो। हो सकता है कि समाधि में सूंघते सूंघते उसने कहीं टांग ही उठा दी हो। क्लिंटन के उस भारत दौरे के बाद हिन्दुस्तान को कुछ खास हासिल नहीं हो सका था, अब देखना यह है कि बराक ओबामा हिन्दुस्तान की यात्रा पर आने के बाद क्या सौगात दे पाते हैं।

अब एलजेपी की अग्निपरीक्षा

17 जून को होने वाले राज्यसभा के चुनावों में एलजेपी और उसके सर्वेसर्वा राम विलास पासवान दोनों ही की प्रतिष्ठा दांव पर लग गई है। बिहार में पांच सीटों के लिए चुनाव होना है, छः उम्मीदवार मैदान में हैं। 243 सदस्यीय विधान सभा में जडीयू के 82, आरजेडी के 56, भाजपा के 54, एलजेपी के 12, कांग्रेस के 10, सीपीआई माले और बीएसपी के पांच पांच, सीपीआ्र के तीन और सीपीएम और एनसीपी के एक एक सदस्यो के साथ ही साथ निर्दलीय विधायकों की संख्या 12 है। इसके साथ ही जो परिदृश्य सामने आ रहा है, उसके अनुसार जेडीयू और भाजपा के तीन, आरजेडी के एक का जीतना तय है। मामला पांचवी सीट का फंसा है, जिसके लिए राम विलास पासवान और कर्नाटक के व्यवसाई बी.जी.उदय मैदान में हैं। पासवान के पास 12 वोट हैं पर उन्हें आवश्यक्ता है 41 की। उदय निर्दलीय के तौर पर चुनाव मैदान में हैं। माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव हार चुके पूर्व केंद्रीय मंत्री पासवान को औकात दिखाने के चलते अनेक राजनैतिक धुरंधरों ने उदय को बेक करना आरंभ कर दिया है। बिहार में कांग्रेस अकेले ही विधानसभा रण में उतरना चाह रही है, इसीलिए पासवान का समर्थन न करने के अनेक कारण भी आलाकमान को गिना दिए गए हैं।

पता नहीं चलेगा कि पीएम ने थरूर को लताडा या नहीं
प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह ने अपने बडबोले मंत्री शशि थरूर के त्यागपत्र के एन पहले हुई मुलाकात में उनसे क्या बातचीत की, उन्हें लताडा, पुचकारा या क्या कहा इस बात के बारे में देशवासी कुछ भी नहंी जान सकेंगे। दरअसल सूचना के अधिकार के तहत अभिषेक शुक्ला नामक युवक ने प्रधानमंत्री कार्यालय से 17 से 19 अप्रेल के बीच प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर के बीच हुई चर्चा का ब्योरा मांगा था। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस मुलाकात के ब्योरे को देने अथवा सार्वजनिक करने से इंकार कर दिया है। पीएमओ के अनुसार जिन भेंटवार्ताओं मंे देश की संप्रभुता, अखण्डता, सुरक्षा, रणनीतिक, वैज्ञानिक और आर्थिक हितांे और दूसरे देशों के साथ बातचीत की जाती है, उनका ब्योरा सूचना के अधिकार के तहत नहीं दिया जा सकता है। अब यह बात तो प्रधानमंत्री ही जाने या थरूर के दोनों के बीच किस लाभ हानि की शर्त पर थरूर ने अपना त्यागपत्र दिया था।

पुच्छल तारा
मध्य प्रदेश में लोग बिजली की घोषित और अघोषित कटौती से बुरी तरह परेशान हैं। होशंगाबाद जिले के इटारसी से विपिन सिंह राजपूत ने ईमेल भेजकर देश के हृदय प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर कटाक्ष किया है। विपिन लिखते हैं -‘‘मध्य प्रदेश की एक सच्ची कहानी सुनिए। एक लडकी और एक लडका आपस में बहुत प्रेम करते थे। जैसे ही इस बात का पता लकडी के पिता को चला, उसने लडके को पकडकर बुलवाया। लडका जैसे ही आया, लडकी के पिता ने उसे लिटाकर बिजली से चलने वाली आरी उसके गले पर रख दी। चलती आरी जैसे ही लडके के गले के करीब पहुंची लडके के प्रांण गले में अटक गए। मगर यह क्या, तभी लाईट चली गई। लडके ने जोर से नारा लगाया -‘‘शिवराज सिंह चौहान, जिन्दाबाद।‘'

Subscribe to comments feed Comments (10 posted):

avatar
पुच्छल तारा भी गज़ब रहा
उम्दा रिपोर्टिंग के लिये बधाईयां
Thumbs Up Thumbs Down
0
Sushil Gangwar on 14 June, 2010 11:24;51
avatar
बापू तू कहा चला गया-------- -सुशील गंगवार ----
मेरी आखो में आसू है बापू कहा चला गया । मेरी अम्मा धोती के पल्लू में दुबक दुबक कर रोती है , वह कहती है बापू तू कहा चला गया । मैंने अम्मा से पूछा , अम्मा बापू तो मर चुका है , अम्मा ने तपाक से मेरे गाल पर थप्पड़ रसीद कर दिया , चिल्लाकर बोली बापू मरा नहीं शहीद हुआ है । मुझे याद है बाबू जी के मरने पर अम्मा इतना नहीं रोई थी जितना वह आज रो रही है । वह रोती क्यों नहीं , उसने भोपाल गैस कांड अपनी बरबस आखो से देखा था। उसका सगा भाई , मेरा मामा रात को अम्मा के पास सोया था । बोला दीदी कल मै मेला देखने जाउगा तू मेरे संग चलना । अम्मा ने बहलाते हुये अपने पल्लू से १ रुपया खोलकर मामा के हाथ पर रख दिया , बोली कल मै रामपुर जा रही हू ।
तू अपने जीजा के साथ ठीक से रहना, अभी मेला तो १५ दिन चलेगा मै चार दिन में बापस आ जाउगी । अम्मा ने बिलख बिलख कर बाबूजी और मामा को जगाया । मै अम्मा के साथ साथ रो रहा था । भोपाल गैस की त्रासदी ने हजारों लाखो को घर से बेघर कर दिया ।
अम्मा आज २५ साल बाद फूट फूट कर रोई है । मेरे बापू जिन्दा होते तो विदेशी कुत्ता एंडरसन भाग कर नहीं जाता । बापू अपनी लाठी से मार मार कर उसकी कमर तोड़ देते । भला हो देश के नीच नेताओ का जो एंडरसन के तलवे चाट चाट कर अबतलक जिन्दा है । मैंने अम्मा को समझाया, कि समय बदल चुका है। अब हमारे देश में नीच और घोटाले बाज नेता है जो देश बारे में कम अपने बारे जायदा सोचते है। हजारों की संख्या में बेकसूर लोगों को मौत की नींद सुलाने वाले हवाई जहाज से उड़ गये। हमारी आखो में अधूरे सपने छोड़ गए है । अम्मा टकटकी लगाकर देख रही थी । बोली - बेटा कही फिर से विदेशी कुत्ता गैस छोड़कर नहीं भागेगा ।
मैंने टीवी पर देखा था , टीवी बाले कह रहे थे कि एंडरसन को भागने के बदले पैसा लिया था। उसे मंत्री जी और डी म ने अपनी रहम दिली दिखाकर प्राइवेट हवाई जहाज से डेल्ही छोड़ा था। फिर चुन्नी को पोलिसे ने पकड़ कर ठाणे में बलात्कार करके क्यों मार दिया । चुन्नी को किसी ने क्यों नहीं छुडवाया । उसके पास पैसा नहीं था । अम्मा बार बार बापू का नाम ले रही थी । क्या बापू फिर से नहीं आएगा । अम्मा भूल चुकी थी यह कलयूग है । कलयुग में बापू और राम कभी पैदा नहीं होते है ।
www.sakshatkar.com
www.sakshatkar-tv.blogspot.com
Thumbs Up Thumbs Down
0
सुरेश चिपलूनकर on 14 June, 2010 13:59;55
avatar
मोती सिंह दोषी हैं, अर्जुन सिंह दोषी हैं, तत्कालीन एसपी दोषी हैं, ये दोषी है, वो दोषी है, सब दोषी हैं…
सिवाय मासूम राजीव गाँधी के…

"त्यागी", "बलिदानी" परिवार पर कोई आँच न आने पाये…। लगे रहो भैया, लगे रहो…
Thumbs Up Thumbs Down
1
on 14 June, 2010 17:31;35
avatar
@ सुरेश चिपलूनकर

वेदांता मामले में मासूम रमन सिंह को लेकर आपके क्या ख्यालात हैं ?

:) लगे रहो संघी साँपों....
Thumbs Up Thumbs Down
-1
Chinmay on 16 June, 2010 09:36;15
avatar
बेनामी साहब , हम संघी साँप हैं तो आप जैसे बुज़दिल किसी चूहे छछूंदर से कम हैं? शैतानी कर के बिल में घुस जाना आपकी पुरानी फ़ितरत है. तभी बेनामी पोस्ट किए जा रहे हैं. आजकल एनडेंजर्ड स्पीशीस में साँप है , चूहा , छछूंदर नहीं . यह बुज़दिल चूहे , छछूंदर किसी राष्ट्र का चरित्र नही बन सकते यह तो अंदर ही अंदर राष्ट्र को कुतर जाते हैं ,यह राष्ट्र के लिए घातक हैं, तब हम जैसे 'साँपों' को इनकी बढ़ती आबादी को 'चेक' करना पड़ता है ,तो सेकुलर मेंढक टर्राटे हैं, बहुत बड़ी ज़्यादती है भई.
Thumbs Up Thumbs Down
1
on 16 June, 2010 12:08;38
avatar
@ Chinmay आप वाकई संघी साँप ही हैं, जो यही तय नहीं कर पा रहा है कि सामने वाला चूहा है या छछूंदर, उससे कम है या ज्यादा है- एक कोई होगा न ? मगर आपकी हालात संघी साँप जैसी हो गई है, जो बीन बजाते सपेरे के सामने खाली नाच दिखा रहा है, और यही तय नहीं कर पा रहा है कि आगे किया क्या जाए ?

हे साँप कहो तुम इतना विष कहाँ से लाये ?

कौन भुजंग सावरकर ने तुम जैसे को देश की आने वाली पीढ़ी को डसने के लिए छोड़ दिया है.
Thumbs Up Thumbs Down
-1
saleem akhter siddiqui on 16 June, 2010 19:31;15
avatar
उफ़ बेचारे संघी इनका तो भगवन ही मालिक है. हर वक़्त परेशां रहते हैं.
Thumbs Up Thumbs Down
-1
Chinmay on 16 June, 2010 21:47;01
avatar
बेनामी साहब आप तो अपनी पुँगी बजाते रहिए , जहाँ तक जहर की बात है तो सेकुलरों और जिहादियों के आगे मांबा - कोबरा का जहर कम पड़ जाए , हम संघी तो फिर भी इंसान हैं. आप कांग्रेसियों का खानदान ही चूहों का है , इसलिए ऐसी गलिज़ मौत मरते हैं और लोगों की हमदर्दी लूट कर सत्ता में आते हैं , जिन्ना नाम के मकड़े को कांग्रेसी चूहे किसी ज़माने में अपना भाई बताते थे और साहब आप जैसे चूहे रेबीस और प्लेग के कॅरियर होते हैं , साँप के काटने से आज तक इतने लोग नही मारे जीतने की प्लेग से. तो साहब जहर आपकी रगों में भरा
Thumbs Up Thumbs Down
1
on 17 June, 2010 11:41;00
avatar
एक तरफ़ आप कह रहे हैं- "संघी तो फिर भी इंसान हैं." दूसरी तरफ़ आप स्वीकार कर रहे हैं- "साँप के काटने से आज तक इतने लोग नही मारे." अजीब विरोधाभाष है. एक इशारा भर है, जो मूर्ख संघियों के ऊपर से गुजरता है- जिन्ना के जिन में अडवानी और हां आपका यह आकड़ा झूठा है कि साँप के काटने से आज तक इतने लोग नही मारे जीतने की प्लेग से. सूरत का प्लेग और गुजरात का दंगे के आकड़े अगर जोड़ेंगे तो साँप का जहर ही ज्य़ादा चढ़ेगा. और हां सावरकर जैसा अजगर आजतक दुनिया में पैदा नहीं हुआ है. मोदी के साथ अगर उसे किसी संग्रालय में लगाओगे तो आने वाली पीढ़ी जान सकेगी कि समय समय पर कैसे जहरीले साँप भारत देश में पाए जाते रहे हैं.
Thumbs Up Thumbs Down
-1
Chinmay on 19 June, 2010 11:48;34
avatar
विरोधाभास का मतलब समझते हैं आप? अगर हाँ तो इस तरह का बेवकूफाना उदाहरण देने से पहले १००० बार सोचते लेकिन चूँकि जिहाद समर्थक अक्ल से पैदल होते हैं लिहाज़ा आपसे ऐसी उमीद करना बेकार है , बहरहाल बेनामी साहब जब गुजरात की बात करते हो तो कश्मीर , चेचन्या , इरान , इंडो चीन और अमेरिकी महाद्वीपों में जिहादियों , क्रुसेडर्स ने किस बिना पर अपना मजहब फैलाया यह देख लो , और इन क्षेत्रों में जो गैर मुस्लमान गैर च्रिस्तियन लोग मारे गए उनकी कुल आबादी गुजरात में मरे गए लोगों से कहीं ज्यादा थी . गुजरात में जो casualities हुईं उनमे बेशक मुसलमानों के साथ साथ हिन्दू भी शामिल थे , लेकिन तुम जैसे बददिमाग लोग असल facts को जानबूझ कर तोड़ मरोड़ कर झूठ फैलाते हो . गोबेल्स के चेले हो , तो सचाई की आस फुजूल है . सवार्लर के नाम पर छींटे उड़ाते हो तुमने खुद अपनी जिंदगी में मुल्क के लिए क्या किया है ? जरुर काले कारनामे किये होंगे इसलिए 'बेनामी' कमेन्ट देते हो.
Thumbs Up Thumbs Down
1
total: 10 | displaying: 1 - 10

Post your comment comment

Type in Hindi (हिन्दी में कमेन्ट करने के लिए यहां रोमन में लिखिए यह अपने आप हिन्दी में बदल देगा.)

Title :
Body
Powered by Vivvo CMS v4.1.2
Share |
  • email Email to a friend
  • print Print version

ईमेल से विस्फोटः अपना ईमेल यहां भरें और सब्सक्राइब करें:

Delivered by FeedBurner

Author info
image लिमटी खरे लिमटी खरे की खबरें देश के कई अखबारों में छपती हैं. दिल्ली में रहकर स्वतंत्र पत्रकारिता लेखन और विभिन्न मीडिया स्कूलों में पढ़ाते भी हैं. लिमटी की लालटेन नाम से विस्फोट.कॉम में नियमित लिमटी की लालटेन नामक स्तंभ लेखन. limtykhare@gmail.com
Rate this article
3.00
More from बात करामात
Previous
image
अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
image
खुद ही खुदा बनने चला संघ
आर एस एस ने अब शायद बी जे पी को हाशिये पर लाने का मन बना लिया है .अपनी आबरू बचाने के लिए १० नवम्बर को आरएसएस के नेता खुद सडकों पर उतरेगें और धरना प्रदर्शन करेगें . उनकी शिकायत है कि यूपीए सरकार संघी आतंकवाद के ब्रैंड को प्रचारित करने में लगभग कामयाब हो गयी है और बीजेपी वाले कोई भी राजनीतिक पहल नहीं कर रहे हैं. नाराज़ संघी नेतृत्व अब खुद ही मैदान ले रहा है ....
image
शाबाश ओबामा, पहले दिन ही दस अरब डालर का बिजनेस
अपने भारत दौरे के पहले दिन ही बराक ओबामा दस अऱब डालर का बिजनेस कर गए। बेशक भारत को कुछ न मिले। पर भारत ओबामा को काफी कुछ देगा। भारत अमेरिकी बेरोजगारी को दूर करेगा। बेशक आतंकी हमलों से संबंधित भाषण में ओबामा ने पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, पर भारत ने अपनी सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ी। भारत सरकार और भारत के प्राइवेट कारपोरेट ने ओबामा को खुश कर दिया है। चीन से परेशान बराक ओबामा को भारत दौरे से राहत मिली है।...
image
भारत के रुख से चीन बेचैन
इस समय चीन बैचेन है। बैचेनी का कारण भारत की विस्तारवादी विदेश नीति है। इस विदेश नीति के तहत भारत ने उन देशों से दोस्ती बढ़ानी शुरू कर दी है, जो देश चीन से किसी न किसी मसले पर भीड़े है। चीन काफी बैचेने से भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की हाल ही में हुई विदेश यात्रा और बराक ओबामा का नवंबर के दूसरे सप्ताह में होने वाली दक्षिण एशिया की यात्रा पर नजर रखे है। भारतीय प्रधानमंत्री की जापान, मलेशिया, दक्षिण कोरिया, वियतनाम यात्रा की आलोचना चीनी अखबार पीपुल्स डेली कर रहा है। जबकि ओबामा की यात्रा को भी चीनी अखबार विस्तारवादी यात्रा बता रहा है।...
image
चड्ढी पहन के फूल खिलाने वाले उपेक्षित
छत्तीसगढ़ के सन्दर्भ में कुछ साल पहले ‘ विकास बनाम संस्कृति ’ पर चर्चा करते हुए डा. रमन सिंह ने एक बड़ी अच्छी बात कही थी. बकौल डा. सिंह ‘आखिर कब तक आप संस्कृति के नाम पर गरीब आदिवासियों के सिर पर सिंह लगा उन्हें नचाते रहेंगे ? उनको भी विकास और समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का अवसर दीजिए.’ तो ज़ाहिर सी बात है कि अगर हम प्रदेश को बदलते वैश्विक परिवेश के अनुसार आगे बढते और विकसित प्रदेश के रूप में उसकी पहचान बनाना देखना चाहते हों तो हमें नवाचार को बढ़ावा देना होगा....
image
बस, एक सरदार चाहिए कश्मीर के लिए!
कश्मीर समस्या ने इस मिथक को भी तोड़ दिया की विकास की योजनाओं और बुनियादी अवशक्ताओ की पूर्ति से किसी भी समस्या का हल ढूंढा जा सकता है ,कश्मीर में वो सब प्रयास विफल रहे है। वो हाथ जो डल झील में नाव चलाते थे, अब पत्थर-बाजी में शरीक है। इन स्थितियों में तो ऐसा लगता है काश आज सरदार पटेल के कद और राजनीतिक दृढता वाला कोई नेता देश में होता तो अब तक ये विवाद कब का हल हो गया होता। ...
image
शुक्र मनाओ कि तुम भारत में हो अरुंधती
भारतीय समाज में बुद्धजीवी का दर्जा पा चुकी अरुंधती रॉय ने कहा है कि कश्मीर कभी भी भारत का अभिन्न हिस्सा रहा ही नहीं है. गिलानी दिल्ली में सेमिनार में कह रहें है कि उन्हें आज़ादी से कम कुछ भी नहीं चाहिए. गिलानी अगर ऐसी बात कहें तो कोई हैरानी नहीं होती लेकिन अरुंधती ऐसा कहें तो आश्चर्य होता है. हालांकि इसके पहले भी अरुंधती रॉय एक ऐसा ही बयान दे चुकी हैं. तब उन्होंने मावोवाद का समर्थन किया था. कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा ना मानने सम्बन्धी बयान वहां पर अपनी जान कि बाज़ी लगा रहे जवानों के लिए एक तमाचा है. साथ ही शेष देश के लोगों के लिए क्षोभ और शर्मिंदगी की वजह है....
image
आइये अरुंधती को लानत भेंजे
उसका बस चले तो वो हिंदुस्तान के सिर्फ इसलिए टुकड़े टुकड़े कर दे क्यूंकि ऐसा करने से वो भीड़ से अलग नजर आएगी। उसके पास हत्याओं को वाजिब ठहराने के तमाम तर्क हमेशा मौजूद रहते हैं ,क्यूंकि इसे वो खुद को महान साबित करने का औजार समझती है। संभव है इसके बहाने वो नोबेल पुरस्कार पाने की कोशिश कर रही हो। वो वामपंथ का ऐसा क्रूर चेहरा है जिसका इस्तेमाल मीडिया कभी अपनी टीआरपी बढाने में तो कभी व्यवस्था के विरुद्ध अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए करता है। संभव है बहुतों को उससे मोहब्बत हो लेकिन हम अरुंधती को लानत भेजते हैं क्योंकि उसे राष्ट्र के अस्तित्व से नफरत है।...
image
टुम बोले टुम बोले हम टो टुप्पई टाप!
पुरानी कहानी है कि एक परिवार के तीन तोतलों की शादी नहीं हो पा रही थी। पिता ने हिदायत दी कि इस बार जो लडकी वालों के सामने बोलेगा उसको घर से निकाल दिया जाएगा। लकड़ी वाले आए, बडे बोला -‘पितादी ती बात याद है न।‘‘ मंझला बोला -‘‘टुप्प भईया।‘‘ छोटा बोल उठा -‘‘टुम बोले टुम बोले हम टो टुप्पई टाप!‘‘ इस तरह तीनों की पोल खुल गई। कांग्रेसनीत केंद्र सरकार में भी कमोबेश एसा ही कुछ होता दिख रहा है।...
image
संघ को बदनाम करने की कांग्रेसी साजिश
राजस्थान सरकार के आतंकवाद विरोधी दस्ते ने अजमेर दरगाह शरीफ पर कुछ साल पहले हुूए बम धमाके के मामले में कुछ तथाकथित अभियुक्तों के खिलाफ अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया है। इस आरोप पत्र में जिन आरोपियों को नाम हैं उनमें इन्द्रेश कुमार का नाम नहीं है। यहां तक का किस्सा सामान्य जांच प्रक्रिया का अंग है। परंतु उसके बाद की कहानी राजनैतिक कहानी है।...
image
सामी नहीं, कांग्रेस के मुंह पर कालिख
कहने के लिए भले ही छत्तीसगढ़ कांग्रेस में केंद्रीय राज्य मंत्री वी नारायण सामी पर कालिख फेंके जाने का मुद्दा शांत होता दिख रहा हो लेकिन इसकी गूंज अभी लंबे समय तक सुनाई देगी। हकीकत यह है कि यहां कांग्रेस की गुटबाजी को आलाकमान अपना पूरा दम लगाकर भी शांत नहीं कर सकता। प्रभारी के रूप में सामी की यहां यह दूसरी बार फजीहत हुई है। मंगलवार को पीसीसी प्रतिनिधियों की बैठक में जब महज एक लाइन का प्रस्ताव पारित करवाने के लिए सामी यहां पहुंचे थे तो कांग्रेस भवन के बाहर ही उन पर काली स्याही फेंकी गई जो उनके चेहरे और कपड़े पर होते हुए उनके साथ कार से उतरे शहर कांग्रेस अध्यक्ष इंदरचंद धाड़ीवाल पर भी पड़े।...
image
अब देखिए राजनीति का कॉमनवेल्थ
कॉमनवेल्थ घोटाले की कड़ी से कड़ी जुडऩे लगी। पहले दिन बीजेपी नेता सुधांशु मित्तल निशाने पर रहे, तो दूसरे दिन खेल गांव बनाने वाली कंपनी एम्मार-एमजीएफ का खेल बिगड़ गया। डीडीए के पास जमा 183 करोड़ की बैंक गारंटी जब्ती का नोटिस जारी हो गया। पर अभी तो सिर्फ ठेका लेने वाली कंपनियों पर शिकंजा कसा। यक्ष प्रश्न, ठेका देने वाले नौकरशाहों-नेताओं ने कितना खाया, इसकी परतें कब उधड़ेंगी? अब ठेकेदारों पर कार्रवाई में तेजी दिखाने से क्या होगा? ठेकेदार तो अपना टेंडर भरते। यह तो देने वाले पर निर्भर, किस कंपनी को ठेका दे। सो सवाल, ठेका देते वक्त नौकरशाहों-नेताओं ने होश क्यों गंवाया?...
image
अब शुरू हुआ असली खेल
कॉमनवेल्थ खेलों के लिए लगाये गये टेन्ट, तंबू कनात उखड़ गये हैं. लेकिन असली खेल उसके बाद शुरू हुआ है. भारतीय जनता पार्टी बनाम कांग्रेस के इस खेल में राजनीति का स्वर्ण पदक कौन हासिल करेगा यह कहना मुश्किल है लेकिन जो खुलासे होंगे वे यह साबित कर देंगे कि खेल भारतीय राजनीति में पर्दे के पीछे असली समाजवाद कायम है. अगर भाजपा की सरकार में कांग्रेसी सुरेश कलमाड़ी कामनवेल्थ खेलों के लिए अगुआ बने रहते हैं तो कांग्रेस की सरकार में आठ सौ करोड़ का ठेका भाजपा के हितैषी सुधांशु मित्तल को मिल जाता है. ...
image
बताओ भला, सीएजी शीला और कलमाड़ी का क्या बिगाड़ लेगी?
कॉमनवेल्थ के आयोजक सफलता की खुमारी में हैं तो देश की जनता विजयादशमी के जश्न में डूबी है, ऐसे में रामायण के एक प्रसंग का जिक्र लाजिमी होगा। जब भगवान राम लंका पर फतह कर अयोध्या लौटे। राज्याभिषेक हो गया तब सिर्फ एक धोबी की टिप्पणी सुन राम ने अग्नि परीक्षा दे चुकी सीता को तज दिया था। पर कॉमनवेल्थ के आयोजकों पर न जाने कितने आरोप लग चुके, फिर भी किसी ठोस कार्रवाई की उम्मीद बेमानी। पहले भी जांच हुई, रपटे आईं लेकिन उन्हीं शीला दीक्षित ने सीएजी को ठेंगा दिखा दिया जिनके खिलाफ अब कामनवेल्थ खेलों में भ्रष्टाचार के खिलाफ जांच करने की बात कही जा रही है....
image
काश हर मस्जिद की खिडकी मंदिर में खुलती
6 दिसंबर, 1992 को जब विवादित ढांचा ढहाया गया, तब मैं जवान हो रहा था। बारहवीं में था। पिताजी उन दिनों बुलंदशहर में बतौर अध्यापक तैनात थे। हम सब उनके साथ ही रह रहे थे। दंगे भडक चुके थे। हमने छत पर चढकर दूर मकानों से उठती लपटों की आंच महसूस की थी। मौत के खौफ से बिलबिलाते लोगों की चीखें सुनी थीं। हैवानियत का नंगा नाच देखा था। 'जयश्री राम' और 'अल्लाह ओ अकबर' के नारों में भले ही ईश्वर और अल्लाह का नाम हो, लेकिन तब उन्हें सुनकर रीढ़ में बर्फ-सी जम जाती थी।...
image
ऐसे आदमी का सियासत में क्या काम?
कहां इकबाल,गालिब व फैज का शौक और कहां सियासत! जो भी हो पर पंजाब के कमजोर आर्थिक पक्ष व सियासत की गफलत में पंजाब के पूर्व वित्त मंत्री (निलंबन के दूसरे दिन उन्हें पूर्व भी कर दिया गया है) मनप्रीत सिंह बादल पंजाब के उन अहम से मारे सियासतदानों से बिल्कुल अलग है जो सियासतदान गनमैनों के लाव लश्कर के बिना चलना अपनी तौहीन समझते हैं।...
image
आरटीआई का दिल है इंटरनेट
इन्टरनेट आरटीआई का दिल है, यह बात किसी आईटी प्रोफेसनल या इन्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर द्वारा अथवा ईमेल सेवा प्रदाता कंपनी ने नहीं कही, बल्कि ऐसे शख्स श्री वजाहत हबीबुल्लाह ने कही, जो केन्द्रीय सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त रहे हैं। जिस कार्यक्रम में मुख्य सूचना आयुक्त ने दिल की बात दिल से जोड़कर कही, उस कार्यक्रम में मैं भी मौजूद था। मैंने कार्यक्रम में आये भारत के विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों व अन्य देशों से आये विषय विशेषज्ञों से आरटीआई को इन्टरनेट के जरिए प्रोत्साहित करने की बात कही।...
Next
Tags
No tags for this article
सर्वाधिकार (अ)सुरक्षित

विस्फोट.कॉम में प्रकाशित सामग्री पर हमारी ओर से कोई कापीराइट नहीं है.

Powered by Vivvo CMS v4.1.2