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पुलिस रिकार्ड में बलात्कारी भी हैं कृपालु महाराज

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इस कथित धर्म ध्वजावाहक संत कृपालु महाराज की संतई का भांडा पहली बार मई 1991 में उस समय फूट गया जब इस कथित धर्माचार्य को लड़कियों का अपहरण करने का ही आरोप नहीं लगा बल्कि लड़कियों के साथ जबरिया बलात्कार करने के आरोप भी लगा. इस आरोप में जगतगुरु कृपालु जी महाराज के विश्वश्त सहयोगी प्रिया शरण महाराज को नागपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भी भेज दिया था।

साक्ष्यों के अनुसार 11 मई 1991 को नागपुर निवासी के. पी. खरे नागपुर के तत्कालीन पुलिस आयुक्त सुरेन्द्र मोहन पठानियाँ के समक्ष उपस्थित होकर लिखित रूप से अवगत कराया कि मेरा पूरा परिवार कृपालु जी महाराज का भक्त था, इसलिए अक्सर ही कृपालु महाराज से मिलना - जुलना हुआ करता था। कृपालु महाराज और उनके शिष्य प्रिया शरण महाराज ने मौका देखकर हमारी दोनों एवं खुबसूरत बेटियों क्रमशः सीमा खरे (26 वर्षीय) एवं मीना खरे (24 वर्षीय) का अपरहण कर लिया है। खरे की शिकायत को पुलिस आयुक्त सुरेन्द्र मोहन पठानियाँ ने जांच के लिए थाना - धंतोली के प्रभारी इंस्पेक्टर को सुपुर्द कर दिया।

चूंकि प्रकरण शहर के एक प्रतिष्ठित परिवार के लड़कियों का एक तरफ था तो दूसरी तरफ एक चर्चित संत था। इसलिए पुलिस प्रशासन बारीकी के साथ प्रकरण की छानवीन करने लगा। शिकायत करने के करीब पांच-छः दिन बाद धंतोली प्रभारी को मुखबिर के माध्यम से पता चला कि सीमा एवं मीना को कृपालु महाराज की सेवा में मनगढ़ (प्रतापगढ़) स्थित आश्रम में रखा गया है। मुखबिर की खबर से प्रभारी-धंतोली ने पुलिस आयुक्त को अवगत करा दिया। यहाँ यह जान लेना आवश्यक है कि खरे प्रकरण के करीब महीनों पहले अप्रैल 1991 में अखिल भारतीय अंध श्रद्धा निर्मलून समिति राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष उमेश चौबे पुलिस आयुक्त पठानियाँ से मिलकर कृपालु महाराज की शिकायत कर चुके थे कि-कृपालु महाराज अपने भक्तों को पान का थूक चटाया करता है। 

इसी बीच खरे प्रकरण सामने आ गया। पठानियाँ ने तत्काल धंतोली प्रभारी को निर्देश दिया कि पुलिस बल के साथ मनगढ़ जाकर लड़कियों को तत्काल बरामद करें। 19 मई 1991 को नागपुर पुलिस मनगढ़ पहुंच गई। कृपालु मनगढ़ आश्रम में पुलिस छापे के दौरान कृपालु तो पुलिस के हत्थे नहीं चढे़ पर के.पी.खरे की दोनों लड़कियाँ सीमा तथा मीना बरामद हो गईं। इतना ही नहीं पुलिस को इस छापे में सीमा और मीना के अलावा नागपुर की ही एक और नाबालिक लड़की सुनयना 14 वर्षीय (पुत्री- आर. उस. तापसे) भी बरामद हो गई। पुलिस की पूछताछ में सुनयना- सीमा एवं मीना ने बताया कि नागपुर में उनका अपहरण करके उन्हें यहाँ लाया है तथा यहाँ पर हम लोगों के साथ ‘जबरिया बलात्कार’ भी किया गया है। बरामद लड़कियों ने पुलिस से बताया कि उनके साथ किये बलात्कार की साजिश में कृपालु के दाहिने हाथ प्रिया शरण महाराज तथा उनकी दो शिष्याओं  क्रमशः सुहासिनी, सर्वरी के अलावा तीन अन्य लोग भी शामिल हैं।

बरामद लड़कियों के बयान के बाद पुलिस को सर्वरी एवं सुहासिनी मौंके पर ही मिल गईं, जिन्हें पुलिस अपनें हिरासत में लेकर नागपुर लौट आई। 21 मई को थाना - धंतौली (नागपुर) में राम कृपालु त्रिपाठी एवं उसके अन्य छः सहयोगियों के विरूद्ध बलात्कार तथा अपहरण सहित कई अन्य गंभीर आरोपों के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया। 21 मई 1991 को ही प्रकरण के विवेचनाधिकारी ने सीमा-मीना तथा सुनयना को नागपुर की विशेष अदालत में धारा 164 के तहत बयान कलमबद्ध कराने के लिए पेश कर दिया। तीन दिन तक लगातार रिकार्ड कराये गये बयान में लड़कियों ने स्पष्ट कहा कि उनके साथ पांच बार बलात्कार किया गया है। बयान दर्ज हो जाने के बाद विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट ने लड़कियों को उनके परिवार वालों को सुपुर्द करने के साथ-साथ पुलिस को निर्देश जारी कर दिया कि - इस प्रकरण के सातों अभियुक्तों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। अदालत के कड़े रूख को जानकर यह कथित अवतारी कृष्ण अपनी जमानत कराने के लिए एड़ी-चोट का जोर पुलिस से बचकर लगाता रहा, पर कामयाब नहीं हो सका।

27 सितम्बर 1991 को मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने इस कथित धर्मध्वजावाहक को नागपुर हवाई अड्डे पर गिरफ्तार कर लिया, तथा नागपुर के सक्षम अदालत में उसे पेश कर दिया। जहाँ से विद्वान न्यायधीश ने इस कु-कर्मी को सीधे जेल भेज दिया। अक्टूबर 1991 में कृपालु के वकील कृपालु की जमानत के लिए उच्च न्यायालय चले गये जहां से उनकी जमानत हो गई। जिस पर पुलिस ने मुम्बई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ में पुनर्निरीक्षण याचिका दायर कर दी। इतना ही नहीं महाराष्ट्र सरकार ने मुम्बई उच्चन्यायालय के फैसले के विरूद्ध सर्वोच्च न्यायालय में दस्तक दे दी।

11 मार्च 1997 को सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की इस याचिका को स्वीकार कर लिया। फिर न्यायमूर्ति जी.एन. राय और न्यायमूर्ति जी.एन. नानावटी की खंडपीठ ने 13 पृष्ठ के अपने फैसले में हाई कोर्ट के फैसले को निरस्त करते हुए कहा कि - लड़कियों द्वारा देर से जानकारी देने के तथ्य को हाई कोर्ट ने ज्यादा ही तवज्जों दे दी। यही देखा जाना चाहिए था कि बलात्कार की शिकारी महिलाएँ लोकलाज व सामाजिक अवमानना के भय से ग्रस्त होती हैं। इतना ही नहीं सर्वोच्च न्यायालय ने यहां तक कहा कि तथा कथित असाधारण व्यक्तियों द्वारा महिलाओं का भवनात्मक और यौन शोषण कोई अनहोनी बात नहीं रह गई है। अतः नागपुर अदालत को इस मामले पर आगे सुनवाई के लिए आदेश दिया जाता है। मामला अभी भी खत्म नहीं हुआ है.

सरकार से की कर चोरी
अभी हाल ही में इस कलियुगी कथित धर्माधिकारी के झूठ एवं फरेब का भांडा उस समय फूटा है जब साक्ष्यों के अनुसार जिला प्रशासन ने इन पर 3 करोड़ अस्सी लाख रूपये का जुर्माना लगाया है। वृंदावन के कृपालु महाराज एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। मथुरा के कलेक्टर डी.सी. शुक्ला ने कृपालु महाराज की संस्था जगदगुरु कृपालु कुंज परिषद ट्रस्ट से तीन करोड़ 80 लाख रूपये जुर्माने के रूप में वसूलने का आदेश दिया है। यह जुर्माना एक महीनें की रजिस्ट्री में की गई स्टाम्प ड्यूटी के हेराफेरी उजागर होंने के बाद लगाया गया है। मथुरा में स्टाम्प चोरी का यह अब तक का सबसे बड़ा मामला बताया गया है।

धार्मिक चैनलों पर पर रोजाना प्रवचन करने वाले संत कृपालु वृंदावन में साढ़े अट्ठाईस हजार वर्ग मीटर भूमि पर सफेद संगमरमर के पत्थरों का एक भव्य मंदिर के निर्माण में जुटे हुए हैं। इस निर्माणाधीन प्रेम मंदिर में लगाए जा रहे पत्थर इटेलियन हैं। कृपालु के पास श्यामा श्याम ट्रस्ट और जगद्गुरु कृपालु कुंज परिषद ट्रस्ट के नाम से दो संस्थाएँ हैं। प्रेम मंदिर श्यामा श्याम ट्रस्ट के अधीन था। पिछले साल 29 दिसंबर को इस ट्रस्ट ने मंदिर को मिल्कियत दूसरे ट्रस्ट के नाम कर दी। रजिस्ट्रर दफ्तरों में दाखिल कागजों में मंदिर की भूमि 17 करोड़ दस लाख रूपये दिखाई गई और करीब सवा करोड़ रूपये के स्टांप लगाए गए। कागजों में जमीन खाली बताई गई और जमीन पर बने मंदिर का उल्लेख नहीं किया गया। कुछ दिनों बाद सब रजिस्ट्रार की ओर से लगाई गई आपत्ति पर स्टांप चोरी का मामला दर्ज कर लिया गया। मामला ए.डी.एम. वित्त की अदालत में गया। चार महीनें पहले ये मामला कलेक्टर के पास भेजा दिया गया। कलेक्टर ने तीन सदस्यीय जांच का कमेटी का गठन किया। जांच कमेटी ने अपनी रपट में मंदिर के निर्माण पर 46 करोड़ से ज्यादा की रकम खर्च करने की बात कही है। इस आधार पर कलेक्टर ने वृंदावन के संत कृपालु महाराज से तीन करोड़ अस्सी लाख रूपये वसूलने के आदेश जारी किये हैं। 

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Jayant Jain on 16 March, 2010 02:16;22
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लेखक का परिचय: "पत्रकारिता को बतौर आंदोलन इस्तेमाल करनेवाले शिव आसरे अस्थाना धर्म के नाम पर होनेवाले धंधे के खिलाफ लगातार अभियान चलाये रखते हैं."

भाई चर्च के पादरी ननो का बलात्कार करने में सबसे आगे रहते हैं. मुल्लाओं की करतूते भी कम नहीं हैं. उधर से क्या कोई हफ्ता आता है, जो आपका यह अभियान ठंडा पद जाता है ?? कभी धर्म के इन धंधेबाजो के खिलाफ भी कुछ लिखा है या सिर्फ सस्ती पब्लिसिटी के लिए हिन्दू संतो को बदनाम करने की ही सुपारी ली है.
विस्फोट भी ना जाने कैसे-कैसो को छाप देता है.:)
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nirmla. kapila on 16 March, 2010 10:13;59
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ये एक ही बाबा ऐसा नही मुझे तो सभी बाबा सब से खतरनाक गुम्डे लगते हैं बस फर्क यही है कि सब का नाम अभी सामने नही आ रहा। सभी बाबाओं पर लगाम कसी जानी चाहिये नही तो यही लोग देश को बर्बाद कर देंगे। अच्छा आलेख है। धन्यवाद्
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rajeev on 16 March, 2010 10:34;19
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Mr.ashthana why you dont writ about his barbados rape case where he was arrested for 3 months. kindly look into the case and published also. so that indian people know some thing more about kripalu .
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Pushkar on 16 March, 2010 11:46;19
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There is big money involved in maligning Hindu Babas these days. I think a lot of budget is released by Vatican.Finally they want to create negative image about Baba Ramdev.They are going to fail miserably.
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psudo on 16 March, 2010 11:49;13
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Writer himself looks like a rapist!
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prakash chandalia on 16 March, 2010 18:27;51
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हिन्दू धर्म में ऐसे संत और कई कथावाचकों की लीलाओं का संसार अभी बेपर्दा होने की प्रतीक्षा में है. भगवत कथाओं के नाम पर आजकल समुद्री जहाजों पर जाने को जो दौर शुरू हुआ है, उसमे दारूबाजी, से लेकर भोग विलास की तमाम व्यवस्थाएं रहती हैं. कौन नहीं जानता की पैसेवाले भक्तों के गुलाम कथावाचक महाशय भी अपनी इच्छाओं को पूरा कर रहे हैं. हिन्दू धर्म के अत्यंत लोकप्रिय शंकराचार्य की दौलत कलकत्ते, दिल्ली और देश के कई बड़े शहरों में धन्नासेठों के यहाँ खट रही है. ये शंकराचार्य महाशय अपना चातुर्मास भी आम आदमी के समक्ष नहीं, सेठों की हवेलियों पर करते हैं. राजनैतिक पार्टियों का भरपूर आशीर्वाद इनके साथ रहा है.
हिन्दू धर्मध्वजा फहराने का दावा करने वाले ऐसे कथित संतो को जैनाचार्य श्री महाप्रज्ञ से सीख लेनी चाहिए. जीवन के नब्बे साल पूरे कर लेने वाले और २५० से अधिक पुस्तकों के लेखक आचार्य श्री महाप्रज्ञ ने अपने पूरे जीवन में कभी धन का स्पर्श तक नहीं किया. उनकी जिन्दगी के प्रत्येक दिन, प्रत्येक क्षण के गवाह उनके भक्त हैं. तेरापंथ धर्म में आचार्य तो दूर की बात, दीक्छित होने वाले सभी संत आडम्बरों से कोसो दूर रहते हैं. हिन्दू धर्म के भोगी संतों में कहीं मर्यादा बची हो तो आचार्य महाप्रज्ञ जैसे त्यागी संत से सीख लेनी चाहिए.
प्रकाश चंडालिया
कोलकाता
हिन्दू धर्म में ऐसे संत और कई कथावाचकों की लीलाओं का संसार अभी बेपर्दा होने की प्रतीक्षा में है. भगवत कथाओं के नाम पर आजकल समुद्री जहाजों पर जाने को जो दौर शुरू हुआ है, उसमे दारूबाजी, से लेकर भोग विलास की तमाम व्यवस्थाएं रहती हैं. कौन नहीं जानता की पैसेवाले भक्तों के गुलाम कथावाचक महाशय भी अपनी इच्छाओं को पूरा कर रहे हैं. हिन्दू धर्म के अत्यंत लोकप्रिय शंकराचार्य की दौलत कलकत्ते, दिल्ली और देश के कई बड़े शहरों में धन्नासेठों के यहाँ खट रही है. ये शंकराचार्य महाशय अपना चातुर्मास भी आम आदमी के समक्ष नहीं, सेठों की हवेलियों पर करते हैं. राजनैतिक पार्टियों का भरपूर आशीर्वाद इनके साथ रहा है.
हिन्दू धर्मध्वजा फहराने का दावा करने वाले ऐसे कथित संतो को जैनाचार्य श्री महाप्रज्ञ से सीख लेनी चाहिए. जीवन के नब्बे साल पूरे कर लेने वाले और २५० से अधिक पुस्तकों के लेखक आचार्य श्री महाप्रज्ञ ने अपने पूरे जीवन में कभी धन का स्पर्श तक नहीं किया. उनकी जिन्दगी के प्रत्येक दिन, प्रत्येक क्षण के गवाह उनके भक्त हैं. तेरापंथ धर्म में आचार्य तो दूर की बात, दीक्छित होने वाले सभी संत आडम्बरों से कोसो दूर रहते हैं. हिन्दू धर्म के भोगी संतों में कहीं मर्यादा बची हो तो आचार्य महाप्रज्ञ जैसे त्यागी संत से सीख लेनी चाहिए.

प्रकाश चंडालिया
कोलकाता
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Vicky G on 16 March, 2010 19:13;08
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@प्रिय श्री चंडालिया,
आचार्य तुलसी और आचार्य महाप्रज्ञ जैसे संत न सिर्फ़ तेरापंथियों, न सिर्फ़ जैनियों, बल्कि सभी हिंदुओं के लिए आदरणीय हैं, पूज्य हैं. वे इस कलयुग में सच्चे अर्थों में संत हैं. आपने यह बिल्कुल सही लिखा है कि उनसे तो तमाम संत-साधू-महात्माओं को प्रेरणा लेनी चाहिए.
लेकिन मेरा निवेदन है कि इसे "जैन संत बनाम हिंदू संत" का रूप देने की कोशिश न की जाए. आप शायद जानते ही होंगे कि आचार्य महाप्रज्ञ के शिष्यों में जैन मतावलंबियों से ज़्यादा संख्या अन्य लोगों की है. करोडों लोग उनके व्यसन मुक्ति अभियानों से जुडे हुए हैं. और जहां तक जैन मतावलंबियों और हिंदू धर्मावलंबियों को अलग-अलग गिनने का प्रश्न है, तो आचार्य तुलसी ने काफ़ी पहले ही स्पष्ट रूप से कह दिया था कि दोनों में कोई भेद नहीं है और जैन भी हिंदू धर्म के ही एक अंग हैं. आचार्य महाप्रज्ञ भी इसी परंपरा के समन्वयवादी संत हैं. इसलिए उनके भक्तों को ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए, जिससे विभाजन की बू आए. आशा है, अन्यथा नहीं लेंगे.
और हां, धर्म-अध्यात्म के नाम पर होने वाले पापाचार का विरोध करने में मैं आपके साथ हूं.
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on 16 March, 2010 21:17;03
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एक कड़ी और आ गयी अस्थाना जी की पर ये झूठ ज्यादा नहीं चलता चाहे किरपालु जी का हो चाहे अस्थाना का पर ये जो हिन्दू साधू संतो का अपमान कर रहे हैं सोफ्ट टार्गेट ढूढ़ रहे हैं क्योकि आधे हिन्दू तो साधू संतो को ढोंगी कहने सुनने मैं ही गर्व महसूस करते हैं . समाज मैं हर जगह पापाचार हो रहा है साधू भी हम मैं से ही बनते हैं पर एक बार फिर आग्रह करूंगा की रचनात्मक लेख लिखे जाये तो ठीक है . बचपन मैं एक गाना सुना था " यार हमारी बात सुनो ऐसा एक इन्सान चुनो जिसने पाप न किया हो जो पापी न हो " अस्थाना या विस्फोट के अन्य तथाकथित लेखक गंदे भाषा साधू संतो के प्रति लिखते हैं इससे इनके संस्कारो का पता चलता है . आज पत्रकार वो लड़के बन रहे हैं जो जीवन मैं कुछ नहीं कर पाए और जबरदस्ती समाज मैं अपना स्थान चाहते हैं इसके लिए दलाली , संभ्रांत लोगो की बेईज़ती ,अधिकारियो ,प्रोपर्टी डीलरो से पैसा उगाही करते हैं .अपना समय बर्बाद कर रहे हम जैसे पाठक इन्हें मिल जाते हैं
हे राम इनकी मदद करना.
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prashant mehrishi on 16 March, 2010 21:22;34
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भूल वश प्रशांत महरिशी नाम लिखने से रह गया ऊपर
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marwaha tk on 17 March, 2010 12:02;07
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इस तरह के आचरण करने वाले बाबाओं को ही पूरा आरोप लगाना तर्क संगत नहीं हे , जो बाबा पान खायेगा वो थूकेगा भी सही पर उस थूक को मलाई समझकर चाट जाने वाली वीरांगनाएँ को क्या कहेंगे , जब भी कोई बाबा मुसीबत मैं पड़ता हे उसका सिरा इन वीरांगनयों की बदोलत ही निकलता हे ,लेकिन हेरानी की बात ये हे की नारी शक्ति की कथित पैरोकार ऐसे मोकों पर सदेव अद्रश्य रहती हैं , अब आग के आस पास घी मंडराएगा तो क्या पिघलेगा नहीं , बाबाओं से ज्यादा इनके चमचे चम्चियों पर भी ध्यान देना होगा ...
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image S A Asthana पत्रकारिता को बतौर आंदोलन इस्तेमाल करनेवाले शिव आसरे अस्थाना धर्म के नाम पर होनेवाले धंधे के खिलाफ लगातार अभियान चलाये रखते हैं. वर्तमान समय में लखनऊ से विविध पत्रिकाओं का प्रकाशन और लेखन.
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यौनाचार के दलदल में कैथोलिक चर्च
आयरिश बिशपों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पोप बेनेडिक्ट (सोलहवें) से मंगलवार को वेटिकन में ‘बच्चों के यौन शोषण’ के मुद्दों पर चर्चा की। अमेरिका के बाद आयरलैंड में कैथोलिक चर्च को यह दूसरा सबसे बड़ा झटका है। अमेरिका की तरह आयरलैंड के चर्च विश्वासी ‘पोप’ के प्रतिनिधि बिशपों एवं पादरियों को न्यायालय में घसीट रहे है। पीड़ित परिवार मुआवजे के रुप में 1.37 अरब डालर की मांग कर रहे है। वही दूसरी और पादरियों द्वारा पीड़ित लोग वेटिकन से उन गुप्त फाइलों को सर्वाजिनक किये जाने की मांग कर रहे है जिनमें रोमन कैथोलिक चर्च में यौन दुर्व्यवहार की अदरुनी जांच का ब्यौरा है।...
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संत वही जो पंथ दिखाए
जगदगुरु रामानंदाचार्य श्रीरामनरेशाचार्य आज के आपाधापी भरे, भौतिकता के प्रमाद में ऊभचूभ करते समय में एक ऐसे अकम्पित ज्योति-स्तम्भ हैं, जिनसे जो भी चाहे अपने जीवन में प्रकाश पा सकता है। एक ऐसे स्नेहिल-प्रेमिल संत, जो धर्म-अध्यात्म, ज्ञान-दर्शन और तत्व चिंतन के अगाध समुद्र हैं और जिनकी शीतल वाणी हृदय के दाह को शांत करके मन के तार को इस तरह झंकृत कर देती है। ...
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बीबी-बच्चों वाले शंकराचार्य
भारत में हिन्दू धर्म व्यवस्था में शंकराचार्य सर्वोच्च स्थान पर होता है. लेकिन इस पद की गरिमा और शक्ति ने इस शंकराचार्य पदवी को पूरी तरह से शक्ति प्रदर्शन के अखाड़ों में बदल दिया है. आदि शंकर द्वारा भले ही चार पीठ स्थापित किये गये हों लेकिन इस समय दर्जनों शंकराचार्य अपनी धर्म की दुकानदारी चला रहे हैं. विस्फोट.कॉम ऐसे शंकरायार्यों की कलई खोलनेवाली एक विशेष श्रृंखला शुरू कर रहा है जिसकी पहली कड़ी में हम माधवाश्रम के बारे में आपको बता रहे हैं जो कि खुद को ज्योतिर्मठ पीठ का शंकराचार्य घोषित करते हैं. ...
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