Home | धर्म-अधर्म | कृष्णं वन्दे जगतगुरुम्

कृष्णं वन्दे जगतगुरुम्

image

भारत भूमि में जन्मा कौन ऐसा व्यक्ति होगा जिसने श्रीकृष्ण का नाम न सुना हो? श्रीकृष्ण को वन्दे जगदगुरु भी कहा जाता है। श्रीरामचन्द्र के समान श्रीकृश्ण भी करोड़ों भारतवासियों की श्रद्वा और भक्ति के पात्र रहे है। वास्तव में श्रीकृष्ण की सम्पूर्ण जीवन लीला, उनका दुष्टों से लड़ना और सज्जनों की रक्षा करना, उनकी राजनीतिक क्षमता और सबसे अधिक उनका गीता के द्वारा दिया हुआ कर्मयोग का संदेश भारतीय संस्कृति की अमूल्य निधि है।

मनुष्य कहने को तो मुठ्ठी भर माटी है परंतु उसमें शैतान भी है, देवता भी और भगवान भी। इसलिए व्यक्ति का व्यवहार सदैव एक सा नही होता, उसके मन में देवासुर संग्राम चलता ही रहता है। हिंदू धर्म के अनुसार मन एक प्रकार का रथ है जिसमें कामना, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईर्ष्या और घृणा नाम के सात अश्व जुटे हैं जो व्यक्ति को उसके कर्मपथ से दूर ले जाते है।

मानव को कर्तव्यपालन में तत्पर करने की दृष्टि से श्रीकृष्ण ने जो उपदेश दिया था उसकी व्यख्या गीता में की गई है वह युग-युग तक मानव जाति का पथ प्रदर्शन करती रहेगी। श्रीकृष्ण के मुख से निकले यह अमर शब्द ‘‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेशु कदाचन’’ अंधकार में भटकते मनुष्य के लिए प्रेरणादायी और उत्साहवर्धक है। फल की चिन्ता से मुक्त होकर कर्तव्यपालन को ही सुखी और सफल जीवन का मंत्र कहा जा सकता है। यह उपदेश किसी देश, काल, धर्म, संप्रदाय या जाति विशेष के लिए नही अपितु समस्त मानव जाति के लिए है। इसे समस्त मानव जाति के लिए ही श्रीकृष्ण ने अर्जुन को निमित्त बना कर कहा है। इन उपदेशों के मूल में यह है कि कर्म करो क्योंकि कर्म करना मनुष्य का कर्त्तव्य है परंतु यह कर्म निष्काम भाव से होना चाहिए।

श्रीकृष्ण के उपदेश सतत कर्म एवं समाज के कल्याणार्थ प्रयत्न करने की शिक्षा देते है। इन उपदेषों की खासयित यह है कि इसमें समाज एवं व्यक्ति दोनों के कल्याण अविभाज्य रुप से एक हो जाते है। श्रीकृष्ण कर्म के माध्यम से किंकर्तव्यविमूढ़ मनुष्य को सत्य मार्ग दिखाने का कार्य करते है। दरअसल श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व बहुआयामी दिखाई देता है। वह दार्शनिक, चितंक, गीता के माध्यम से कर्म और योग के संदेशवाहक और महाभारत युद्व के नीति निर्देशक थे। किंतु आम भारतीय के लिए तो वह आज भी गाय चराने, मटकी फोड़ने और माखन चोर और नटखट कन्हैया ही है। गीता में इसी की भावाभिव्यक्ति है- श्रीकृष्ण कहते है- हे अर्जुन! जे भक्त मुझे जिस भावना से भजता है मैं भी उसको उसी प्रकार से मिलता हूँ। देवी देवताओं में मात्र श्रीकृष्ण ही ऐसे है जिनके संबंध में सबसे अधिक साहित्य की रचना हुई है। उतर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक के लोकगीतों, लोककलाओं में श्रीकृष्ण का यशोगान किया गया है।

श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है कि काम, क्रोध व लोभ-ये तीनों नरक के द्वार है। इन तीनों का त्याग करें क्योंकि इनसे आत्मा तक का हनन होता है। कामुक आचार से व्यक्ति भ्रष्ट हो जाता है। क्रोध बुद्वि को भ्रष्ट करता है और विवेक में कमी लाता है जबकि लोभ उसे भिखारी बना देता है और कामनाओं के पूरा न होने से निराशा होती है। आज भौतिकातावाद के इस दौर में मानवीय संवेदनाए लगातार दम तोड़ रही है। मानव अपने कर्म पथ से भटककर अपने क्षुद्र स्वार्थ के लिए एक दूसरे का गला काटने से भी परहेज नही करते। जब होश आता है कि निज स्वार्थ की पूर्ति के लिए कितनों को दुख पहुंचाया है उसके बाद पश्चाताप होता है और वह जीवन को नए सिरे से जीना चाहता है। दरअसल सत्कर्म केवल मनुश्य के खुद के जीवन को ही प्रभावित नही करता बल्कि समाज पर भी असर करता है।

इसलिए आज के युग में कृष्ण और उनका संदेश किसी धर्म विशेष के लिए नहीं बल्कि समूची मानव सभ्यता के लिए पथ-प्रदर्शक का काम कर रही है. सच्चे अर्थों में इस युग के लिए कृष्ण जगतगुरु हैं जो मनुष्य को मोक्ष का मार्ग दिखा रहे हैं.

Subscribe to comments feed Comments (10 posted):

अब्दुल हमीद on 02 September, 2010 17:35;36
avatar
धन्य हैं श्रीकृष्ण और धन्य हैं श्री फ़्रांसिस. आज भारत भूमि को श्री फ़्रांसिस जैसे लोगों की ही ज़रूरत है, जो किसी भी मज़हब के हों, पर भारत के सनातन महापुरुषों पर गर्व करें, अपनी विरासत को मान दें.
Thumbs Up Thumbs Down
4
prashant mehrishi on 02 September, 2010 22:23;31
avatar
फ्रांसिस और अब्दुल हमीद जैसे हिन्दू (हिंदुस्तान के नागरिक )ही इस देश को व् इसके प्राण हिंदुत्व को बचा सकते हैं . इनको जन्म देने वाली माताओ को शत शत नमन .
Thumbs Up Thumbs Down
2
वीरेन्द्र जैन् on 02 September, 2010 23:48;55
avatar
बाँसुरी की मधुर धुन छेड़ने वाला कृष्ण चरित्र ही नये भारत का सच्चा आदर्श हो सकता है किंतु धर्म के नाम पर सत्ता पाकर भ्रष्टाचार की रोटियाँ सेंकने वाले कृष्ण की इसलिए उपेक्षा करते हैं क्योंकि वे नफरत की जगह प्रेम में विश्वास करते हैं। किंतु वेलंटाइन डे का विरोध करने वाले और युवाओं पर पार्कों में हिंसक हमले करवाने वाले, श्री राम सेना से कन्याओं पर हमले कराने वाले श्री कृष्ण की उपेक्षा करते हैं क्योंकि उनके नाम पर नफरत नहीं फैलायी जा सकती और त्रिशूल तलवार नहीं उठायी जा सकती। इन्हें भारतीय संस्कृति की विशालता और विविधिता का पता ही नहीं है।
Thumbs Up Thumbs Down
-1
prashant mehrishi on 04 September, 2010 21:46;35
avatar
वीरेंदर जी कृष्ण जी ने तो पैदा होते ही युद्ध शुरू कर दिया था पूतना से और पूरा जीवन युद्ध ही करते रहे बांसुरी तो १-२ साल गोउ चराते समय ही बजाई thi बस . लेकिन आप चिंता न करो अयोध्या मैं ram जी का मंदिर बन्ने के बाद कृष्ण जी वाले की चिंता भी हम कर लेंगे आप तो मनमोहन राहुल जी व् वृंदा जी की मधुर बांसुरी सुनना .गीता महाभारत हम देख लेंगे.क्या भारतीय संस्कृति मैं राम और कृष्ण के अलावा भी कुछ बचता है
Thumbs Up Thumbs Down
2
वीरेन्द्र जैन on 04 September, 2010 23:22;53
avatar
@ प्रशांत महर्षि जी
कृष्ण की पहचान पूतना से युद्ध करते हुये नहीं बनती अपितु बांसुरी बजाते हुये ही बनती है। पोस्ट के साथ दिये गये चित्र में भी वे पूतना से युद्ध करते हुये नहीं अपितु बांसुरी बजाते हुये दिख रहे हैं।
2- क्या विवादास्पद स्थलों पर मन्दिर बनए से ही सारी समस्याएं हल हो जायेंगीं? शायद समझदार लोग ऐसी बातों के पीछे छुपी कुटिलिता को समझ लेंगे।
3- भारतीय संस्कृति में राम कृष्ण के अलावा बहुत कुछ है, वहाँ शाक्त हैं, शैव हैं,चार्वाक हैं, बुद्ध हैं महावीर हैं, कबीर हैं, गुरुनानक हैं,मीरा हैं, रैदास हैं तथा गैर विवादास्पद स्थलों पर बने लाखों अन्य धर्मस्थल हैं, जिनमें आस्था रख कर धर्म प्रेमी लोग जीवन संघर्षों से गुजर रहे हैं। जो कुएं के मैंढक नहीं हैं उनके लिए आकाश बहुत बड़ा है। युद्ध लक्ष्य नहीं होता वह भी प्रेम को पाने के लिए किया जाता रहा है और किसी के जीवन का बहुत थोड़ा सा हिस्सा होता
Thumbs Up Thumbs Down
-2
सीता राम on 04 September, 2010 23:40;28
avatar
अरे जैन साहेब कहाँ फंस रहे हैं . यह बेचारे प्रशांत महर्षि थोड़े पगलेट हैं . इनको कोई गंभीरता से नहीं लेता. और यह अब्दुल हमीद कोई और नहीं , बी जे पी का ही कार्यकर्ता है . नाम मुसलमानों जैसा रख लिया है . यह सब भाजपाई हैं . इन्हें तो केवल इग्नोर करो आप.
Thumbs Up Thumbs Down
-3
nirbhai on 04 September, 2010 23:41;26
avatar
वीर भोग्या वसुंधरा
Thumbs Up Thumbs Down
0
sanjay modi on 05 September, 2010 15:02;20
avatar
विवादित स्थल विवादित नहीं बल्कि हिंदों के आराध्य देओं की निशानी है,
और फिर अपना गोरव जिसे प्यारा नहीं वो इन्सान कैसा?
कश्मीर भी तो विवादित बना हुआ है, तो क्या हम उस पे दावा छोड़ दें ?
कश्मीरी पंडितों को भगा दिया गया, क्या कह दे उनको भूल जाओ अपनी जन्म भूमि को अब्ब विवादित है?
नहीं वीरन्द्रजी आप की बड़ी भूल है. जो माँ बाप को भूल सकता है वो ही अपना गोरव भूल सकता है,
जननी , जन्मभूमि कैसे भूली जाएगी? ये काम तो सिर्फ कांग्रेसी ही कर सकतें है. इंदिरा याद रही और फ़िरोज़ को भुला दिया, सोनिया याद रही और मेनका को भुला दिया. अरे परिवारवाद भी याद रखा तो सिर्फ मतलब का . नालायक congression .
Thumbs Up Thumbs Down
1
prashant mehrishi on 05 September, 2010 19:46;30
avatar
भैया सीता राम बिना पागल बने कोई कार्य पूरा नहीं होता है . तुम्हारे गंभीरता से लेने का प्रश्न ही नहीं उठता क्योकि बच्चे बड़ो की बात समझ नहीं पाते इसलिए गंभीरता से नहीं लेते . राम और कृष्ण की जन्म भूमि को विवादित स्थल कहने वालो को देश का बटवारा होने के बाद दुसरे पक्ष के साथ चले जाना चाहिए था .लेकिन अगर रुक ही गए तो कृष्ण की बांसुरी के साथ सुदर्शन चक्र को भी ध्यान रखना होगा . हिन्दू धर्म मैं स्थान का महत्व बहुत ज्यादा है गंगा पुरे उत्तरी भारत मैं बहती है पर हरिद्वार का महत्व है . वाराणसी ,अलाहाबाद का महत्व है इसी प्रकार अयोध्या मथुरा का भी महत्व है . क्या हज मक्का के अतिरिक्त भी हो सकता है ?कोम्मुनिस्ट्स इसे नहीं समझ सकते और कांग्रेसियो की आत्मा तो आदरणीय बापू ji के मरने के साथ ही मर गयी . हरे राम हरे राम .
Thumbs Up Thumbs Down
3
R.K.GUPTA on 06 September, 2010 16:06;26
avatar
एक कीचड़ में रहने वाला जानवर होता है जो की हर जगह गन्दगी फैला देता है.

मैं ठीक कह रहा हूँ ना जैन साब.

मैं फ्रांसिस जी को काफी अरसे से पढ़ रहा हूँ उन्होंने ने क्या लिखा है इसकी गहराई में जाने की किसी ने भी कोशिश नहीं की है एक अच्छी खासी पोस्ट का कबाड़ा कर दिया है

कुछ लोग ऐसे भी होते है कि जहा भी जायेंगे गन्दगी जरूर करेंगे| अगर इन लोगो को एक एक गिलास पानी भी दे दिया जाये तो वहाँ भी ये लोग - कांग्रेस पानी बी जे पी पानी, हिन्दू पानी मुस्लिम पानी कह कर बहस शुरू कर देंगे.
यहाँ भी आखिर एक शख्स ने दूध में खट्टा डाल ही दिया.
Thumbs Up Thumbs Down
2
total: 10 | displaying: 1 - 10

Post your comment comment

Type in Hindi (हिन्दी में कमेन्ट करने के लिए यहां रोमन में लिखिए यह अपने आप हिन्दी में बदल देगा.)

Title :
Body
Powered by Vivvo CMS v4.1.2
Share |
  • email Email to a friend
  • print Print version

ईमेल से विस्फोटः अपना ईमेल यहां भरें और सब्सक्राइब करें:

Delivered by FeedBurner

Author info
image आरएल फ्रांसिस पुअर क्रिश्चियन लिबरेशन मुवमेन्ट के अध्यक्ष आर एल फ्रांसिस ईसाई मिशनरियों के बीच व्याप्त भेदभाव और कटुता के खिलाफ लगातार अपनी आवाज बुलंद किये हुए हैं. आप उन्हें pclmfrancis@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं.
Rate this article
5.00
More from धर्म-अधर्म
Previous
image
ईसाईयत बनाम इस्लाम की मजहबी जंग
९/११ की नौंवीं वर्षगाँठ के निमित्त आतंकवाद के नाम पर पूरी दुनिया में तरह-तरह की चर्चा छिड़ी. फ्लोरिडा के कोई एक पादरी टेरी जोन्स ने आतंकवाद का स्रोत इस्लामपंथियों की परमपवित्र पुस्तक कुरआन शरीफ को करार देकर उसे जलाने की घोषणा कर सुर्ख़ियों में रहे. उनकी इस घोषणा से पूरी दुनिया चिंतित हुई. अमेरिकी विदेश मंत्री हिलारी क्लिंटन से लेकर भारतीय गृहमंत्री पी.चिदंबरम तक हर किसी को इस चिंता ने सताया कि फ्लोरिडा के पादरी की इस हरकत से पूरी इस्लामी दुनिया में उत्पात मच जाएगा....
image
कुरान जले पर भारत को पता न चले
इस्लाम को मानवता विरोधी बताते हुए अमेरिकी चर्च के एक हिस्से ने 9/11 को अमेरिका पर हुए अलकायदा के हमले की वर्षगांठ पर पवित्र कुरान को जलाने की घोषणा करके दुनिया भर के मुस्लिम समाज में बैचानी पैदा कर दी है। लेकिन इस घटनाक्रम को भी वेटिकन अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहा है. चर्च संगठनों की कोशिश है कि इन घटनाओं को भारत में ज्यादा प्रचार न मिले ताकि भारत में मुस्लिम-ईसाई एकता पर फर्क न पड़े. अगर ऐसा होता है तो ईसाई संगठनों के बड़े दुश्मन "हिन्दुओं" को इसका फायदा मिल सकता है और हिन्दू-मुसलमानों के बीच दूरियां कम हो सकती है जिसका सीधा नुकसान मिशनरियों को होगा. ...
image
कृष्णं वन्दे जगतगुरुम्
भारत भूमि में जन्मा कौन ऐसा व्यक्ति होगा जिसने श्रीकृष्ण का नाम न सुना हो? श्रीकृष्ण को वन्दे जगदगुरु भी कहा जाता है। श्रीरामचन्द्र के समान श्रीकृश्ण भी करोड़ों भारतवासियों की श्रद्वा और भक्ति के पात्र रहे है। वास्तव में श्रीकृष्ण की सम्पूर्ण जीवन लीला, उनका दुष्टों से लड़ना और सज्जनों की रक्षा करना, उनकी राजनीतिक क्षमता और सबसे अधिक उनका गीता के द्वारा दिया हुआ कर्मयोग का संदेश भारतीय संस्कृति की अमूल्य निधि है।...
image
स्टेनगनाय नमः, टेलीविजनाय स्वाहा! (हवन)
भारत में यज्ञ का महत्व क्या है और हम यज्ञ क्यों करते हैं इसकी विधिवत जानकारी हमें भले ही न हो लेकि यज्ञ को लेकर भारत में भ्रांतियां बहुत हैं. स्वामी श्री अड़गड़ानंद वर्तमान यज्ञ व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं. उनके सवाल तार्किक और सटीक हैं जिसके बारे में हिन्दू समाज को निश्चित रूप से गंभीरता से विचार करना होगा. यज्ञ पर स्वामी जी के लेखन को दो किश्तों में हम यहां प्रस्तुत कर रहे हैं....
image
हिन्दुत्व क्या है?
दस अगस्त को विस्फोट पर स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी द्वारा रचित पुस्तक ‘शंका समाधान’ से ‘गाय धर्म नहीं जानवर है’ प्रकाशित हुई थी, जिस पर विस्फोट के सुधी पाठकों ने अपना-अपना उन्मुक्त विचार व्यक्त किया है। इस लेख पर कुछ पाठकों ने स्वामी श्री अड़गड़ानन्द जी महाराज जी को तमाम तरह से लांक्षित कर उन्हें हिन्दू एवं हिन्दुत्व विरोधी करार देते हुए हिन्दुत्व पर अपने-अपने विचार व्यक्त किये हैं। स्वामी अड़गड़ानन्द जी महाराज के हिन्दुत्व की विचार धारा के प्रति तो हिन्दू एवं हिन्दुत्व के प्रति स्वामी अड़गड़ानन्द जी के विचार (अनछुये प्रश्न के माध्यम से) ‘हिन्दुत्व क्या है?’ को प्रस्तुत कर रहा हूं. प्रस्तुति- एस ए अस्थाना...
image
हिन्दुत्व क्या है-२
शोध संस्थान वालों ने तर्क दिया है कि दक्षिण भारत के लोग अपने को आर्य नहीं मानते ‘द्रविड़’ मानते हैं, हिन्दू मानते हैं। आर्य-दर्शन का प्रचार करने से उत्तर-दक्षिण भारतीयों में घृणा पनपेगी। राष्ट्रीय-गान आपको स्मरण ही होगा। पंजाब, सिन्धु, गुजरात, मराठा, द्रविड़, उत्कल, बंग। हिमाचल..............। ये भू-भाग के नाम हैं। एक श्लोक निरन्तर पढ़ने में आता है-...
image
गोरक्षा सनातन धर्म है, किन्तु पशु गाय धर्म नहीं
आये दिन ‘गो-वध बन्द हो’ का नारा लगता है। धर्माचार्यों के अनशन और लाखों रूपये के चन्दे इसी के नाम पर होते हैं। इन सबका परिणाम केवल इतना निकला है कि यदि सन् 1942 में 17,000 गायें नित्य दिन कटती थीं तो आज उनकी संख्या 50,000 तक पहुंच चुकी है। विचारणीय है कि क्या गाय हमारा धर्म है ?क्या इसके समर्थन में हमारे पूर्वजों ने वेद, गीता और रामचरितमानस-जैसे आर्षग्रन्थों में कुछ कहा है ? यदि नहीं कहा तो यह एक धोखा है। इससे हम सबको सतर्क हो जाना चाहिए। ...
image
अमेरिका का आध्यात्म, भारत का हिन्दुत्व
हालीवुड अभिनेत्री जूलिया राबर्ट्स हिन्दू हो गयी. देशभर की मीडिया इस खबर से अटी पड़ी है है कि उन्हें हिन्दू धर्म ने इतना प्रभावित किया कि उन्होंने पिछले साल स्वामी धर्मदेव से हुई मुलाकात ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उन्होंने हिन्दू धर्म स्वीकार कर लिया. इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम को मीडिया भले ही आश्चर्य की नजर से देख रहा हो लेकिन खुद स्वामी धर्मदेव को कोई आश्चर्य नहीं है. जूलिया के धर्मपरिवर्तन के बाद उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि वे जबरन धर्म परिवर्तन के पक्ष में नहीं हैं लेकिन अगर जूलिया ने अपनी आत्मा से हिन्दू धर्म को स्वीकार किया है तो उनका स्वागत किया जाना चाहिए. ...
image
दाता दरबार पर आतंक का कहर
पाकिस्तान में कट्टरपंथी जमातें उदारवादी धड़ों को लगातार निशाना बना रही हैं. अभी हाल में ही अहमदी समुदाय की मस्जिद पर हमले के बाद अब लाहौर के सूफी संत की मजार दाता दरबार पर आतंकियों ने हमला किया है जिसमें 42 से अधिक लोग मारे गये हैं और पौने दो सौ से अधिक लोग घायल हो गये हैं. पाकिस्तान में सूफी परंपरा और दाता गंज बख्श साहिब के बारे में विस्तार से बता रहे हैं प्रकाश रे....
image
अल्लाह के नाम पर
क्या यह तथ्य हैरान परेशान और पशेमाान करने वाला नहीं है कि 121 वर्ष से स्थापित एक इस्लामिक मूवमेंट जमायत अहमदिया को पाकिस्तान में खुद को मुस्लिम कहने से रोकने के लिये बाकायदा एक कड़ा कानून काम कर रहा है। पाकिस्तान में अहमदिया लोग मुस्लिम जगत में मिलने पर प्रयोग होने वाले इस्लामावालेकुम - वालेकुम इस्लाम अभिवादन करते हुए पकड़े जायें तो तीन साल तक कैद व जुर्माना लगने का कानून है।...
image
घाना में हिन्दुत्व और घनानंद
हॉल में धूप-अगरबत्ती की ख़ुशबू फैली हुई है और मूर्तियों के आगे दिए टिमटिमा रहे हैं. अगर सिर्फ़ आवाज़ें सुनी जाएँ तो लगेगा कि आप उत्तर भारत के किसी मंदिर की पूजा में शामिल हैं. लेकिन आँख खोलकर वहाँ मौजूद भक्तगणों पर नज़र डालें तो चौंके बिना नहीं रह सकते. ये घाना की राजधानी अकरा के छोर पर ओडोरकोर बस्ती में बना एक हिंदू मंदिर है लेकिन यहाँ पूजा करने आए लोगों में से एक भी भारतीय नहीं है....
image
अहमदिया संप्रदाय: सबके लिए शांति के उपासक
गुरुदासपुर के कादियान नामक कस्बे में 23 मार्च 1889 को इस्लाम के बीच एक आंदोलन शुरू हुआ जो आगे चलकर अहमदिया आंदोलन के नाम से जाना गया. यह आंदोलन बहुत ही अनोखा था. इस्लाम धर्म के बीच पहली बार एक व्यक्ति ने घोषणा की कि "मसीहा" फिर आयेंगे. मसीहा माने ईसा मसीह. इस्लाम धर्म के बीच इस अनोखे संप्रदाय को शुरू करनेवाले मिर्जा गुलाम अहमद ने अहमदिया आंदोलन शुरू करने के दो साल बाद 1891 में अपने आप को "मसीहा" घोषित कर दिया. बात सिर्फ यहीं तक नहीं रुकी. मिर्जा गुलाम अहमद ने खुद को विष्णु का आखिरी अवतार भी घोषित कर दिया. ...
image
मंदिरों की कमाई पर कब्जे की फिराक में सरकार
महाराष्ट्र सरकार की नजर अब मंदिरों पर है। दो मंदिरों का संचालन करके मलाई काट रही सरकार अब प्रदेश के दो लाख मंदिरों पर नजरें गड़ाए हुए है। अशोक चव्हाण की सरकार ने प्रदेश के तकरीबन दो लाख से भी ज्यादा मंदिरों को अपने कब्जे में लेने के लिए एक व्यापक प्रस्ताव तैयार किया है। सरकार का कहना है कि पब्लिक ट्रस्ट एक्ट के तहत जिन दो लाख मंदिरों का संचालन हो रहा है, उनके संचालन में गड़बड़ी की शिकायतें है।...
image
कुंभ पर फूटा पाप का घड़ा
यह कैसा अजब संयोग है कि जिस वक्त देश में पवित्र महाकुंभ चल रहा था उसी वक्त एक एक करके संतों के पाप का घड़ा भी फूट रहा था. तीन महीने तक हरिद्वार में चले पवित्र महाकुंभ के मौके पर "अपवित्र संन्यासियों" के पाप का घड़ा भी फूटता रहा. साधु संतों के पाप के इन फूटते घड़ों ने न केवल धर्म की मर्यादा को भंग किया बल्कि उस पावन महाकुंभ को भी कलंकित व शर्मसार कर दिया जिसका भक्तगण 12 वर्षों तक बेसब्री से इंतज़ार करते हें। ...
image
यौनाचार के दलदल में कैथोलिक चर्च
आयरिश बिशपों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पोप बेनेडिक्ट (सोलहवें) से मंगलवार को वेटिकन में ‘बच्चों के यौन शोषण’ के मुद्दों पर चर्चा की। अमेरिका के बाद आयरलैंड में कैथोलिक चर्च को यह दूसरा सबसे बड़ा झटका है। अमेरिका की तरह आयरलैंड के चर्च विश्वासी ‘पोप’ के प्रतिनिधि बिशपों एवं पादरियों को न्यायालय में घसीट रहे है। पीड़ित परिवार मुआवजे के रुप में 1.37 अरब डालर की मांग कर रहे है। वही दूसरी और पादरियों द्वारा पीड़ित लोग वेटिकन से उन गुप्त फाइलों को सर्वाजिनक किये जाने की मांग कर रहे है जिनमें रोमन कैथोलिक चर्च में यौन दुर्व्यवहार की अदरुनी जांच का ब्यौरा है।...
image
संत वही जो पंथ दिखाए
जगदगुरु रामानंदाचार्य श्रीरामनरेशाचार्य आज के आपाधापी भरे, भौतिकता के प्रमाद में ऊभचूभ करते समय में एक ऐसे अकम्पित ज्योति-स्तम्भ हैं, जिनसे जो भी चाहे अपने जीवन में प्रकाश पा सकता है। एक ऐसे स्नेहिल-प्रेमिल संत, जो धर्म-अध्यात्म, ज्ञान-दर्शन और तत्व चिंतन के अगाध समुद्र हैं और जिनकी शीतल वाणी हृदय के दाह को शांत करके मन के तार को इस तरह झंकृत कर देती है। ...
image
बीबी-बच्चों वाले शंकराचार्य
भारत में हिन्दू धर्म व्यवस्था में शंकराचार्य सर्वोच्च स्थान पर होता है. लेकिन इस पद की गरिमा और शक्ति ने इस शंकराचार्य पदवी को पूरी तरह से शक्ति प्रदर्शन के अखाड़ों में बदल दिया है. आदि शंकर द्वारा भले ही चार पीठ स्थापित किये गये हों लेकिन इस समय दर्जनों शंकराचार्य अपनी धर्म की दुकानदारी चला रहे हैं. विस्फोट.कॉम ऐसे शंकरायार्यों की कलई खोलनेवाली एक विशेष श्रृंखला शुरू कर रहा है जिसकी पहली कड़ी में हम माधवाश्रम के बारे में आपको बता रहे हैं जो कि खुद को ज्योतिर्मठ पीठ का शंकराचार्य घोषित करते हैं. ...
Next
Tags
No tags for this article
सर्वाधिकार (अ)सुरक्षित

विस्फोट.कॉम में प्रकाशित सामग्री पर हमारी ओर से कोई कापीराइट नहीं है.

Powered by Vivvo CMS v4.1.2