Today's Affair's

अति के आगे अंत

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Feb

22

2012

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उत्तर प्रदेश में शर्मनाक अति हो चुकी है। वहाँ एनआरएचएम घोटालों से जुड़े नौ व्यक्तियों की सन्देहात्मक परिस्तिथियों में क्रमशः मृत्यु हो चुकी है और इन मौतों के हत्या होने में शायद ही किसी को सन्देह हो। इतना ही नहीं इन मौतों में से ज्यादातर को आत्महत्या बनाने की कोशिशें भी हुयी हैं। कुछ मौतें तो सरकारी कस्टडी में हुयी हैं। इससे पहले भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में शायद ही इतने ठंडे तरीके से किसी चर्चित मामले में क्रमशः हत्याओं का दुस्साहस पूर्ण कारनामा हुआ हो। ... Full story

ममता बनर्जी से बंगाल को एलर्जी

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Feb

22

2012

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4 साल के वामपंथी शासन से पश्चिम बंगाल को मुक्त कराने वाली ममता बनर्जी की मां-माटी-मानुष की सरकार का हनीमून शायद खत्म हो चुका है। वामपंथियों के खिलाफ ममता बनर्जी को राज्य की जनता ने पिछले विधानसभा चुनावों में पलकों पर बैठाया था, और उम्मीद की थी कि सादगी का पर्याय मानी जाने वाली ममता बनर्जी बंगाल में पारदर्शिता के साथ साफ-सुथरा प्रशासन देंगी, लेकिन हाल की कुछ घटनाओं से ममता बनर्जी की सरकार पर तर्जनी उठने लगी हैं। ... Full story

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस

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Feb

22

2012

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पूंजीवाद का अंतर्राष्ट्रीय वर्चस्व भाषाई भी है. आज भूमंडलीकरण के नाम पर दुनिया को अमेरिका-यूरो केंद्रित बनाने के प्रयास में दुनिया भर में मातृभाषाओं का वध किया जा रहा है. कई छोटी-बड़ी मातृभाषाएं बेमौत मर रही हैं. कइयों का अस्तित्व संकट में है. ऐसे में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा २१ फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में मनाना कई दृष्टियों से विडम्बना का सूचक भी है और महत्वपूर्ण भी. ... Full story

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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ कृपाशंकर सिंह (बाएं)
 

कोर्ट के हाथों कत्ल हो गये कृपाशंकर

मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष कृपाशंकर सिंह अपने आपको राजनीतिक आकाओं से अब तक कत्ल होने से बचते आये थे लेकिन आखिरकार कोर्ट के हाथों कत्ल हो गये. मुंबई हाईकोर्ट ने बुधवार को मुंबई पुलिस कमिश्नर को आदेश दिया कि वे कृपाशंकर सिंह की संपत्तियों को जब्त करके उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करें. मुंबई हाईकोर्ट ने यह आदेश संजय तिवारी की एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है. ... Full story

  1. बाढ़ से ज्यादा झूठ का प्रकोप (5.00)

  2. अब शुरू हुआ असली खेल (5.00)

  3. आसान नहीं है कश्मीर का समाधान (5.00)

  4. अशोक चव्हाण ने इस्तीफा दिया, कलमाड़ी हटाये गये (5.00)

  5. बुर्के को बैन करो! (5.00)

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D. P. Mishra

D. P. Mishra

आईआईएम लखनऊ से स्नातक डी. पी. मिश्र वन्यजीव प्रेमी और पत्रकार हैं. वे कहते हैं कि जब वे अपने आस पास की घटनाओं से परेशान होते हैं तो कलम का सहारा लेते हैं. सामाजिक सक्रियता, वन्यजीवन पर कार्य के अलावा सक्रिय लेखन और पत्रकारिता.

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संवाद विस्फोट

अनिल सौमित्र जब भी मुझे मिलते हैं मैं हमेशा उन्हें कहता हूं- अनिल जी के सौ मित्र, उसमें से एक मैं भी हूं. सौमित्र का संधि विच्छेद करके जो विशेषण निकलता है वे उस विशेषण के बिल्कुल अनुरूप हैं. सौम्य हैं. शांत हैं. और मित्र तो ऐसे बनाते हैं जैसे कोई चना चबैना हो. आसान सफर हो या मुश्किल डगर, जैसे चना चबैना सबसे सस्ता और सुमग होता है वैसे ही अपने अनिल सौमित्र सबके लिए सुगम हैं. यही अनिल सौमित्र अब संपादक हो गये हैं. ... Full story
डेढ़ दशक पहले की बात है. वह कोई 95-96 का समय था. पूर्वी उत्तर प्रदेश के जंघई जंक्शन से इलाहाबाद और इटारसी होते हुए एक किशोर मुंबई पहुंचा था. कैसे पहुंचा यह जाने बिना क्यों पहुंचा इसे समझना मुश्किल होगा. हम जिस इलाके में पैदा हुए वह स्वभाव से परजीवी इलाका है. इस परजीवी इलाके में कोई सौ साल पहले पिया लोग रंगून जाया करते थे. फिर कलकत्ता तक सिमट गये. इसके बाद हम जिस वक्त में बड़े हो रहे थे उस दौर में यहां के परजीवी मुंबई जाया करते थे. डेढ़ दशक बाद भी मुंबई जाने की इस रफ्तार में कोई कमी नहीं आई है लेकिन हम अपने जाने को अपनी उस नौजवान आंख से एक बार पीछे मुड़कर फिर देखना चाहते हैं जिसकी चर्चा जाने अनजाने राहुल गांधी ने कर दी है. ... Full story
संजय स्वदेश के उत्साह का कायल हुए बिना नहीं रहा जा सकता. पिछले तीन सालों से विस्फोट से जुड़े हैं और कई मौके ऐसे आये हैं जब उन्होंने हमसे ज्यादा उत्साह दिखाकर इस प्रयोग को व्यापक बनाने में योगदान दिया. कभी मुंबई गये तो वहां उनसे मिल आये जो विस्फोट के लिए लिखते हैं. कभी बिहार गये तो बात करते रहे कि यह स्टोरी विस्फोट के लिए अच्छी होगी. वे अखबारों में नौकरी करते रहे हैं. लेकिन उनके उत्साही चरित्र ने एक ऐसा कदम उठा लिया है जिसका जिक्र करना जरूरी है. ... Full story
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