Ashish Kumar

माया साहब को समझना है तो बाबा साहब को समझो

अम्बेकडकरवादी प्रो एल. कारुण्यकरा, डॉ बाबा साहब अंबेडकर दलित और आदिवासी अध्ययन केन्द्र, वर्धा के निदेशक हैं। प्रोफेसर कारुण्यकरा दलित चिंतक के ...

डिग्गी पैलेस में साहित्य की डुगडुगी

इसे संयोग ही कहा जाएगा कि 22 जनवरी को जयपुर में पंडित झाबरमल्ल शर्मा स्मृति व्याख्यान में प्रेस परिषद के अध्यक्ष पूर्व ...

लावारिश लाशों की तारणहार
 

लावारिश लाशों की तारणहार

शव, शवयात्रा, कफन और दाह संस्कार ऐसे शब्द हैं जिनका प्रयोग कोई आपके सामने करे तो सारा माहौल भारी हो जाएगा. मगर आज हम चंडीगढ़ की जिस महिला समाजसेवी का परिचय आपसे करवाने जा रहे हैं ये शब्द और उनसे जुड़ी हुई क्रियाएं उनकी रोजमर्रा की जिंदगी हैं. अमरजीत कौर ढिल्लों चंडीगढ़ में रहती हैं और मृत देह का कफन-दफन उनके जीवन का अनिवार्य हिस्सा है. आप कभी भी उनके घर में जाईये, वहां आपको कुछ कफन के टुकड़े हमेशा धरे मिल जाएंगे. ... Full story

लिखित परीक्षा दो, टिकट लो
 

लिखित परीक्षा दो, टिकट लो

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की छवि पूरे देश में एक तोड़-फोड़ वाली पार्टी के तौर पर ही बनी है, जिसके संबंध में महाराष्ट्र के बाहर रहने वाले लोगों की समझ यही है कि इस पार्टी के कार्यकर्ताओं के पास मराठी प्रेम और उत्तर भारतीयों से नफरत के अलावा करने के लिए कुछ भी नहीं है। बात सही भी है लेकिन मनसे ने एक ऐसा काम कर दिया है जो देश में दूसरे राजनीतिक दलों के लिए प्रेरक हो न हो चौंकानेवाला जरूर हो सकता है। ... Full story

मंडल क्यों हुए कमंडलधारी?
 

मंडल क्यों हुए कमंडलधारी?

‘इंडिया टुडे’ के किसी संपादक को लेकर शायद ही इतनी चर्चा पहले कभी हुई हो, जितनी दिलीप मंडल के संपादक बनने पर इन दिनों हो रही है। दिलीपजी जो मीडिया को अंडरवर्ल्ड कहकर दलाली का अड्डा बताते रहे, मीडिया के अंदर बैठे लोगों पर सवाल उठाते रहे, एक समय उनसे यह उम्मीद जगी थी कि वे वैकल्पिक मीडिया को मुख्यधारा की मीडिया के समानान्तर खड़ा करने की कुवत रखते हैं। लेकिन अचानक पाला बदलकर दिलीप मंडल मुख्य धारा की मीडिया के कमण्डलधारी क्यों हो गये? मुख्यधारा की मीडिया को गंदा धंधा बतानेवाले दिलीप मंडल उसी धंधे में क्यों उतर गये? मंडल ने हाथ में कारपोरेट मीडिया का कमंडल क्यों पकड़ लिया ? ... Full story

रालेगढ़ गांव के सरपंच जयसिंह सदाशिव महापारे
 

टीम अन्ना नहीं, यह टीम अरविन्द है

टीम अन्ना पर अभी तक दिल्ली के दिग्विजय सिंह ही सवाल उठा रहे थे लेकिन खुद अण्णा हजारे के गांव में भी भी टीम अण्णा को लेकर कोई बहुत सकारात्मक दृष्टिकोण नहीं है. दिल्ली में राहुल गांधी से मिलने के लिए आये और अपमानित होकर वापस गये रालेगढ़ गांव के सरपंच जयसिंह महापारे अपरिचित नाम नहीं रह गये हैं. वे उस गांव के सरपंच हैं जिस गांव में अण्णा रहते हैं, इसलिए उनकी बात का मायने होता है और उनका रूख अण्णा के गांव का रुख होता है. अण्णा के मौन व्रत के दौरान रालेगढ़ सिद्धि गांव पहुंचे आशीष कुमार अंशु ने महापारे से बातचीत करके बहुत सारे मुद्दों पर अण्णा के गांव का रुख जानने की कोशिश की. ... Full story

लक्ष्य पाने की नौजवान लगन
 

लक्ष्य पाने की नौजवान लगन

कौन कहता है कि आज के युवा समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी नहीं समझते। जिन्हें ऐसा लगता हो, उन्हें एक बार लक्ष्य की टीम से मिलना चाहिए। विश्वास जानिए आज के युवाओं को लेकर आपकी सोच बदल जाएगी। एक ओर जब गांव के नौजवान शहर और शहर के नौजवान विदेश जाने की जद्दोजहद में उलझे हुए हैं तो महाराष्ट्र के पचौड़ा गांव के ये नौजवान अपने गांव के उत्थान का लक्ष्य पाने में लगे हुए हैं। ... Full story

बाबा मार्क्स का अफीम
 

बाबा मार्क्स का अफीम

एक मित्र की फेसबुक बुक वॉल पर एक कमेन्ट था जिसका लब्बो लुआब यह कि राम-राम, सलाम वालेकुम, सत श्री अकाल जैसे संबोधन करने वाले साथी उनके फेसबुक की फ्रेन्ड लिस्ट से बाहर चले जाएं। वे लोग भी बाहर चले जाएं जिन्होंने अपनी तस्वीर की जगह किसी चर्च, मन्दिर या गुरुद्वारे की तस्वीर लगा रखी है। चूंकि इस नास्तिक फेसबुकधारी मित्र की नजर में ऐसे सभी लोग ‘धार्मिक’ किस्म के लोगों की श्रेणी में आते हैं। ... Full story

अनशन के साथ ही टूट गया विश्वास
 

अनशन के साथ ही टूट गया विश्वास

दिल्ली के रामलीला मैदान पर जब बाबा रामदेव के सत्याग्रह के साथ कांग्रेस ने आधी रात की इमरजंसी लागू की तो अगले दिन बाबा को हरिद्वार में होना पड़ा. बाबा रामदेव हरिद्वार पहुंचे, लेकिन वे अकेले नहीं थे. उनके साथ उनका सत्याग्रह भी था. कांग्रेस ने अपने अत्याचार के पीछे तर्क यह गढ़ा था कि बाबा रामदेव के समर्थक भारी संख्या में पहुंच रहे थे इसलिए दिल्ली में कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिए रामदेव का सत्याग्रह (तप) तोड़ना जरूरी था. कांग्रेसी सरकार के तर्क अपनी जगह लेकिन करीब उसी वक्त हम भी बाबा रामदेव का सत्याग्रह देखने हरिद्वार के लिए निकल पड़े जिस वक्त बाबा रामदेव को रामलीला मैदान से उठाकर हरिद्वार के लिए भेजा गया था. ... Full story

नीचे कोयले की आग, ऊपर माफिया का राज
 

नीचे कोयले की आग, ऊपर माफिया का राज

विकास के जिस उड़नखटोले पर बैठकर देश का खास वर्ग यात्रा कर रहा है, उसी विकास ने झरिया से उसकी हरियाली और खुशहाली दोनो छीन ली है। एक समय झारखंड का कोयला क्षेत्र झरिया जो अभ्यारण्य हुआ करता था आज आग के दरिया में तब्दील हो गया है। झरिया की कोयला खदानें ऐसी पहचान अख्तियार कर चुकी हैं जिसके नीचे कोयले में आग लगी हुई है लेकिन ऊपर माफिया का राज चल रहा है. ... Full story

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Ashish Kumar Ashish Kumar बेतिया से पढ़ना शुरू किया और दिल्ली आकर पत्रकारिता की पढ़ाई पढ़ ली. दसवीं कक्षा पहुंचने तक आधा दर्जन स्कूलों को नाप चुके आशीष कुमार 'अंशु' आजकल एक घुमंतू पत्रकार के तौर पर देश को नाप रहे हैं. लिखते-पढ़ते स्कूली छात्रों के साथ मिलकर मीडिया स्कैन भी निकालते हैं और सोपानस्टेप के लिए घूमते-फिरते कार्यरत भी हैं.

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