Ashish Kumar

लावारिश लाशों की तारणहार

शव, शवयात्रा, कफन और दाह संस्कार ऐसे शब्द हैं जिनका प्रयोग कोई आपके सामने करे तो सारा माहौल भारी हो जाएगा. मगर आज हम चंडीगढ़ की जिस महिला समाजसेवी का परिचय आपसे करवाने जा रहे हैं ये शब्द और उनसे जुड़ी हुई क्रियाएं उनकी रोजमर्रा की जिंदगी हैं. अमरजीत कौर ढिल्लों चंडीगढ़ में रहती हैं और मृत देह का कफन-दफन उनके जीवन का अनिवार्य हिस्सा है. आप कभी भी उनके घर में जाईये, वहां आपको कुछ कफन के टुकड़े हमेशा धरे मिल जाएंगे. ... Full story

लिखित परीक्षा दो, टिकट लो
 

लिखित परीक्षा दो, टिकट लो

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की छवि पूरे देश में एक तोड़-फोड़ वाली पार्टी के तौर पर ही बनी है, जिसके संबंध में महाराष्ट्र के बाहर रहने वाले लोगों की समझ यही है कि इस पार्टी के कार्यकर्ताओं के पास मराठी प्रेम और उत्तर भारतीयों से नफरत के अलावा करने के लिए कुछ भी नहीं है। बात सही भी है लेकिन मनसे ने एक ऐसा काम कर दिया है जो देश में दूसरे राजनीतिक दलों के लिए प्रेरक हो न हो चौंकानेवाला जरूर हो सकता है। ... Full story

मंडल क्यों हुए कमंडलधारी?
 

मंडल क्यों हुए कमंडलधारी?

‘इंडिया टुडे’ के किसी संपादक को लेकर शायद ही इतनी चर्चा पहले कभी हुई हो, जितनी दिलीप मंडल के संपादक बनने पर इन दिनों हो रही है। दिलीपजी जो मीडिया को अंडरवर्ल्ड कहकर दलाली का अड्डा बताते रहे, मीडिया के अंदर बैठे लोगों पर सवाल उठाते रहे, एक समय उनसे यह उम्मीद जगी थी कि वे वैकल्पिक मीडिया को मुख्यधारा की मीडिया के समानान्तर खड़ा करने की कुवत रखते हैं। लेकिन अचानक पाला बदलकर दिलीप मंडल मुख्य धारा की मीडिया के कमण्डलधारी क्यों हो गये? मुख्यधारा की मीडिया को गंदा धंधा बतानेवाले दिलीप मंडल उसी धंधे में क्यों उतर गये? मंडल ने हाथ में कारपोरेट मीडिया का कमंडल क्यों पकड़ लिया ? ... Full story

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Ashish Kumar Ashish Kumar बेतिया से पढ़ना शुरू किया और दिल्ली आकर पत्रकारिता की पढ़ाई पढ़ ली. दसवीं कक्षा पहुंचने तक आधा दर्जन स्कूलों को नाप चुके आशीष कुमार 'अंशु' आजकल एक घुमंतू पत्रकार के तौर पर देश को नाप रहे हैं. लिखते-पढ़ते स्कूली छात्रों के साथ मिलकर मीडिया स्कैन भी निकालते हैं और सोपानस्टेप के लिए घूमते-फिरते कार्यरत भी हैं.

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