Awesh Tiwari
मेरा बेटा भूत नहीं है
विकलांग बेटे , विधवा बहु और उनके बच्चों के साथ झोपड़ी के किसी कोने में दुबकी माया बार बार आवाज देने पर भी दरवाजा नहीं खोलती है ,जब खोलती है तो उसकी आँख में आंसू और हाँथ में हंसिया होती है |"कौन हौवा तू ?"माई पत्रकार है, बतियाना चाहते हैं -बेटे के इशारे पर वो अपना हंसिये वाला हाँथ नीचे कर लेती है और आँचल से आँखों का आंसू पोंछ मुझे खटिया पर बैठने का इशारा करते हुए नाती को खटिया के नीचे रखा खाना अन्दर ले जाने को कहती है |इसके पहले की मै बैठ कर अपने झोले से डायरी निकालूं ,वो अचानक मेरा पाँव पकड़ कर बिलख पड़ती है "भैया हमार बेटवा भूत नाही हौ "! मै एक झटके में अपने पाँव खींचकर बोलता हूँ "जानता हूँ तुम्हारा बेटा भूत नहीं है"। ... Full story
चिदम्बरम की वाणी कांग्रेस का विचार
ये कांग्रेस का वर्णसंकर संस्करण है, जो परिवारवाद और व्यक्ति पूजा के साये में फल फूल रहा है। उत्तर प्रदेश, बिहार समेत अन्य हिंदी राज्यों में जनता द्वारा पूरी तरह से नकार दी गयी कांग्रेस में इन राज्यों की राजनीति के साथ साथ वहाँ की जनता के प्रति दुराग्रह की संस्कृति तेजी से पनप रही है। दिल्ली और मुंबई की कांग्रेस है, कोट पैंट टाई की कांग्रेस है, लोबिस्टों की कांग्रेस हैं, ये कारपोरेट कांग्रेस है जिसे उस हर एक चीज से नफरत है जिसमें पसीने और मेहनतकशी की बू आती हो, जिसे झूठलाने के लिए कभी युवराज राहुल किसी गरीब की झोपड़ी में खाना खाते हैं तो कभी आम आदमी के साथ ट्रेन में यात्रा करते हैं। सच ये है कि कांग्रेस पूरे देश में ऐसी संस्कृति विकसित करना चाहती है जो गरीब दिहाड़ी मजदूरों और बेरोजगार पूरबियों के खिलाफ़ हो। ... Full story
हाँ, छिनरौ वाले तू लोग सुतल रहा!
इंसानियत के पवित्र शहर बनारस को एक बार फिर आतंकियों ने अपना निशाना बनाया है. बनारस के उस पवित्र घाट पर आतंकियों ने विस्फोट किया जहां आरती की घंटिया घनघना रही थीं. आंतकियों का इरादा रहा होगा कि इस विस्फोट के बाद न केवल बनारस बल्कि देश ही सन्नाटे में आ जाएगा. देश सन्नाटे में आया या नहीं, कह नहीं सकते, लेकिन बनारस सन्नाटे में कत्तई नहीं है. विस्फोट के एक दिन बाद बनारस का दौरा करनेवाले आवेश तिवारी की अनुभूति. ... Full story
कुलक्षणी मीडिया के गर्भ का अल्ट्रासाउंड
हिद्नुस्तान में मीडिया की स्थिति उस बेवफा औरत की तरह हो चुकी है जो अपने पेट में नौ महीने का बच्चा लेकर सारी दुनिया से ये बात छुपाना चाहती है कि वो गर्भ से है। कार्पोरेट घरानों ,बिचौलियों और दलालों ने मीडिया के नामचीन घोड़ों के साथ हमबिस्तरी की और सारे बिरादरी के मुंह पर कालिख पोत दिया। २ जी स्पेक्ट्रम मामले में बरखा दत्त ,वीर संघवी और प्रभु चावला का नाम सामने आने से ये तो साबित हो गया कि हिंदुस्तान में पत्रकारों की एक बड़ी जमात कारपोरेट हाथों में या तो बिक चुकी है या फिर खुद को बेचने के लिए खड़ी है ,मगर आश्चर्य ये है कि इस खुलासे के बावजूद भी बेशर्मी कम नहीं हुई। ... Full story
