Awesh Tiwari
बहुत याद आयेगा बीबीसी
हिंदुस्तान के खबरे प्रेमियों के लिए ये खबर, अब तक की सबसे बड़ी त्रासदी है। बीबीसी की हिंदी सेवा बंद होने जा रही है। अपनी बेबाकी और ख़बरों के मामलों में निरपेक्षता को लेकर एक मिसाल कायम करने वाली इस रेडियो समाचार सेवा का बंद होना ख़बरों की दुनिया पर कारपोरेट जगत के संयुक्त हमले का एक बड़ा प्रतीक है, ये ब्रिटिश हुकूमत के उस कंगलेपन का भी परिणाम है जो देश के सारे संसाधन बेवकूफाना युद्ध में झोंकने के बाद पैदा हुई है, उचित होता कि जर्जर आर्थिक स्थिति का शिकार हो चुकी बीबीसी सेवा को बहाल रखने के लिए दुनिया भर के बीबीसी प्रशंसकों से अनुदान लिए जाते, जैसा कि अभी कुछ दिनों पहले मशहूर वेबसाईट विकिपीडिया ने किया। लेकिन बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ने अनुदान न लेकर अपनी सेवाओं में से 650 कर्मचारियों की छुट्टी करने का फैसला किया है। उसने यह कदम विदेश मंत्रालय से मिलने वाले धन में 16 फीसदी कमी किए जाने के बाद उठाया है। इससे मार्च के अंत तक बीबीसी हिंदी रेडियो के प्रसारण बंद हो जाएंगे। ... Full story
किसानों को कर्महीन बनाया जा रहा है
कहते हैं हर शाम के बाद सुबह होती है हर दुःख के बाद सुख आता है, विदर्भ के भी कुछ इलाकों में ऐसा ही हुआ, बेहाल और बदहाल विदर्भ को जिस व्यक्ति से रोशनी मिली उसके पास भी एक सपना था वो सपना था विदर्भ को देश में उन्नत कृषि की सबसे बड़ी प्रयोगशाला बनाने का ,स्वामी विवेकानंद के आदर्शों पर चलते हुए आदिवासी –किसानों की सेवा को ही धर्म मानने वाले शुकदास जी महाराज विदर्भ के कवि घाघ हैं, आप यकीन न करें मगर आज सच है कि विदर्भ के कुछ गाँवों में आज बासमती गेंहू की फसल उपजाई जा रही है। रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग के बिना, लगभग सभी फसलों में ज्यादा से ज्यादा उत्पादन, परम्परागत कृषि को त्यागकर नयी तकनीक अपनाई जा रही है किसान कृषि और मौसम के अंतर्संबंधों को फिर से जानने और उस ओर लौटने की कोशिश भी कर रहे हैं। परिवर्तन की यह शुरूआत करनेवाले शुकदास जी महाराज से बात की विदर्भ के दौरे पर गये आवेश तिवारी ने। ... Full story
हम घोषित आपातकाल में हैं- एलिना बिनायक
“जनतंत्र में बहुत गलतियाँ होती हैं सालों बाद पता लगता है कि किसी के साथ नाइंसाफी हुई है अगर हमारे साथ ऐसा हुआ तो ये मान लेना कि इसमें जनता का हित जुड़ा है “|ये शब्द बिनायक सेन ने जेल जाने से पहले अपनी पत्नी एलीना को कहे थे । एलीना बिनायक के साथ, अराजकतावादी राज्य और साम्राज्यवादी अदालतों के निर्णयों के खिलाफ लगातार संघर्ष कर रही है। वो हारी नहीं है ना आगे हारने वाली है ,एलिना जब ये कहती हैं कि हम लड़ेंगे ,हम जहाँ तक ले जा सकेंगे ले जायेंगे जीतेंगे या नहीं जीतेंगे हम नहीं जानतेतो इन शब्दों में उनका अदम्य साहस नजर आता है ,इस साहसी महिला के साथ आवेश तिवारी ने थोड़ी देर पहले बातचीत की ... Full story
धधक उठा उर्जा प्रदेश का सीना
यह प्रकृति का वरदान नहीं अभिशाप है। देश की उर्जा राजधानी कहे जाने वाले सोनभद्र के कंडाकोट के पहाड़ों में विशालकाय ज्वालामुखी ने सांस लेना शुरू कर दिया है ,पश्चिमी सोन तट के रिजुल गाँव स्थित लगभग ५०० फीट ऊँची खरहरिया पहाड़ के एक बीघे क्षेत्र में पिछले चार दिनों से जमीन धधक रही है ,पहाड़ से निकलने वाली गर्म भाप और पानी के गर्म सोते से इलाके में रहने वाले आदिवासी गिरिजन हतप्रभ हैं ,कल से ही गाँव के लोग इस कुदरती अलाव में आग ताप रहे हैं. ... Full story
