Saleem Akhtar

देवबंद पर दावे की राजनीति

जिन्ना को सेकुलर बताकर जो फजीहत आडवाणी की हुई थी, वही वास्तनवी ने मोल ले ली है। मोदी की माफ करनेवाला बयान आते ही उनके विरोधियों को मौका मिल गया। विरोधियों को पता था कि मोदी मुद्दे पर वास्तनवी का विरोध सभी मुसलमान करेंगे। शायद यही वजह थी कि वास्तनवी ने दबाव में आकर इस्तीफे का ऐलान कर दिया था। लेकिन जब वास्तनवी का हिमायती ग्रुप सक्रिय हुआ और वास्तनवी के समर्थन में सड़कों पर आया तो वास्तनवी को ऑक्सीजन मिली और उन्होंने किसी हालत में पद छोड़ने से इंकार कर दिया। यह बताने की जरूरत नहीं है कि वास्तनवी का विरोध कौन लोग कर रहे हैं। मदनी परिवार दारुल उलूम एक तरह से मदनी परिवार की जागीर की तरह रहा है। दारुल उलूम के जरिए ही उनके राजनीतिक हित पूरे होते रहे हैं। ... Full story

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Saleem Akhtar Saleem Akhtar देश के अनेक समाचार-पत्रों में सामायिक मुद्दों पर लेख आदि लिखने के साथ ही टेक्निकल पुस्तकों का स्वतन्त्र लेखन। लेखन या पत्रकारिता का कोई कोर्स नहीं किया। लिखने की शुरुआत 1984 से दिल्ली से प्रकाशित होने वाले 'हिन्दुस्तान' और 'नवभारत टाइम्स' में सम्पादक के नाम पत्रों से की थी। हौसला बढ़ा तो सम्पादकीय पेज पर छपने के लिए लिखना शुरु किया। मशहूर पत्रकार स्व0 उदयन शर्मा मेरे आइडियल रहे हैं। इसलिए कलम का इस्तेमाल हमेशा ही फिरकापरस्त ताकतों के खिलाफ और दबे-कुचले लोगों के पक्ष में चली है। जनवादी लेखक संघ से भी जुड़ा हुआ हूँ।

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