Sanjay Tiwari
महामाया की महाछाया
मायावती ने निजी तौर पर भले ही शादी न किया हो लेकिन यहां के लोग मानते हैं कि गौतमबुद्ध नगर उनका मायका ...
जीत मिली लेकिन करिश्मा कम हुआ
महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों में पहले मतदान उम्मीद से कम हुआ और अब मतदान के दूसरे दिन नतीजा सामने है. महाराष्ट्र में ...
लाल गलियारे के लाल बुझक्कड़
उस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रमण िसंह जितनी देर रहे और जितना कुछ बोला उसमें खबर तो कुछ खास नहीं निकली लेकिन जब छत्तीसगढ़ सरकार की प्रेस रिलीज पहुंची तो खबर सिर्फ रमण सिंह की बोली गई बातें ही थीं. शायद खबर भी यही है. मुख्यमंत्री एक पूरे प्रदेश का मुखिया होता है और उसके लिए जो सरकारी तंत्र निर्मित किया जाता है उसका काम ही होता है कि उसके कम से कम बोले को अधिक से अधिक प्रचारित करे. छत्तीसगढ़ का यही प्रचारतंत्र अब रायपुर से निकलकर दिल्ली में दबिश दे रहा है. ... Full story
हमजा काशगरी का संदेश और पैगम्बर मोहम्मद का संकट
यह तेईस साल का नौजवान शायद अरब के पतझड़ से गिरा एक पत्ता ही है. दुबला पतला शरीर लेकिन दिमाग ऐसा कि तेईस साल की उम्र में कालम राइटर का काम वह भी जेद्दा के एक अखबार के लिए. इसके अलावा नये मीडिया के जरिए अभिव्यक्ति की आजादी का गुणगान और बखान भी. लेकिन इस नौजवान की एक ट्वीट ने इसके लिए जान का संकट पैदा कर दिया है. ... Full story
टूजी घोटाले की टूटी हुई कड़ियां
टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले पर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर फैसला देते हुए अदालत ने बहुत महत्वपूर्ण टिप्पणी की. यह टिप्पणी सॉलिसिटर जनरल की इस दलील पर आया कि कार्यपालिका के नीति निर्धारण के क्षेत्र में न्यायपालिका का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए. इस पर अदालत ने टिप्पणी की कि "राष्ट्र की संपत्तियों की रखवाली का जिम्मा सबका है. इसलिए राष्ट्रीय संपत्तियों का इस्तेमाल राष्ट्र के लिए होना चाहिए, इसका फायदा कुछ निजी लोगों को नहीं पहुंचाया जाना चाहिए. " ... Full story
आधार परियोजना का कॉरपोरेट विचार
विप्रो देश की जानी मानी आईटी कंपनी है. विप्रो के निदेशक अजीम प्रेमजी अपनी सदाशयता के लिए जाने जाते हैं. लेकिन इन दिनों विप्रो के अजीम प्रेमजी को एक कष्ट है. उनका यह कष्ट निजी नहीं है और वह हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करता है इसलिए इसका जिक्र जरूरी है. अजीम प्रेमजी की कंपनी को इस बात का दुख है कि अगर हर भारतीय को पहचानपत्र देनेवाली आधार परियोजना नष्ट हो जाती है तो उनका 30 करोड़ का निवेश बेकार चला जाएगा. यह 30 करोड़ रूपया उन्होंने ऐसे उपकरण खरीदने में निवेश किये हैं जो इंसान की आंखों, अंगुलियों की छाप ग्रहण करके उनका एक डाटाबेस तैयार करती है और वह डाटाबेस आगे चलकर लोगों की पहचान करने में काम आयेगी. ... Full story
जन्मतिथि पर जनरल की जंग
पाकिस्तान के जनरल की तरह हमारे सैन्य प्रमुख भी सरकार से एक जंग लड़ रहे हैं. हमारे सैन्य प्रमुख की जंग में सियासत तो है लेकिन उस सियासत से लोकतंत्र को कोई वैसा खतरा नहीं है जैसा पाकिस्तानी के जनरल से वहां के लोग महसूस कर रहे हैं. भारत के सैन्य प्रमुख जनरल वीके सिंह की जंग अपनी जन्मतिथि को लेकर है जिसे वे अपनी प्रतिष्ठा के लिए लड़ रहे हैं. जन्मतिथि विवाद में न्याय पाने सुप्रीम कोर्ट पहुंचे जनरल वीके सिंह ने सरकार को सकते में डाल दिया है. लेकिन जनरल वीके सिंह की जन्मतिथि का विवाद पैदा क्यों हुआ और आखिर वे यह लड़ाई क्यों लड़ रहे हैं? ... Full story
पाकिस्तान में डेमोक्रेसी को डर कैसा?
सेना, सरकार और सुप्रीम कोर्ट के त्रिकोण में आखिरकार वह क्षण आ ही गया जब प्रधानमंत्री युसुफ रजा गिलानी ने पार्टी फोरम पर अपने पद से इस्तीफे की पेशकश कर दी. हालांकि खबर यह है कि फिलहाल उनकी पार्टी और गठबंधन दोनों ने उन्हें सलाह दिया है कि वे प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने की बजाय 19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष हाजिर हों. तो क्या गिलानी के इस्तीफे या उनकी फजीहत से पाकिस्तान में सबकुछ सामान्य हो जाएगा? या फिर पाकिस्तान आवाम पर अभी भी फौजी शासन का साया मंडरा रहा है? ... Full story
कालिख ने लौटाई चेहरे पर चमक
रामदेव के चेहरे पर भले ही कामरान सिद्दीकी ने स्याही फेककर उनके चेहरे को काला करने की कोशिश की हो लेकिन कामरान की इस कोशिश ने रामदेव के चेहरे पर लाली लौटा दी है. दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में वे काले धन का मुद्दा उठाने के लिए एक बार फिर मीडिया से मुखाितब थे. मीडिया उन्हें नोटिस भी नहीं लेता अगर कामरान ने उनके चेहरे पर स्याही न फेंक दी होती. कामरान की करतूत के बाद बाबा रामदेव जब मीडिया से मुखातिब हुए तो उनके चेहरे पर कालिख लगाये जाने का अफसोस नहीं था बल्कि मीडिया द्वारा एक बार फिर मान िदये जाने की लाली झलक रही थी. ... Full story
इंटरनेट का नाम बदनाम ना करो
किसी जमाने में यही कोई आठ दस साल पहले जब बड़े पैमाने पर सरकार ने डिजिटल तकनीकि के उपयोग के लिए अरबों की खरीदारी शुरू की थी तो हर बाबू को एक डेस्कटॉप कम्प्यूटर दिया गया था जो इंटरनेट से कनेक्टेड होता था. उन बाबूओं ने सेक्स सर्च के अलावा शायद ही उस सिस्टम का कोई उपयोग किया हो लेकिन एक दशक भी न बीता होगा कि वही इंटरनेट सरकार के लिए सिरदर्दी साबित हो रहा है. कारण? अब इंटरनेट द्वारा पैदा की गई आजादी सरकार के माथे पर चिंता की लकीरें खींच रही है. "आजादी" बाबूओं के केबिन से निकलकर जनता के हाथ जा पहुंची है इसलिए उसकी नकेल कसने के लिए सरकार मय थाना अदालत के साथ इंटरनेट कंपनियों के सामने जा खड़ी हुई है. ... Full story
